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बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाकर सक्षम बनाएं
कैथल
Updated Mon, 10 Feb 2014 11:51 PM IST
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अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान में श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन का स्टॉफ और विद्यार्थियों ने भी शामिल हो गए हैं। जेबीटी और बीएड की छात्राओं ने बेटी के हक में आवाज बुलंद की। कॉलेज के प्राचार्य टीएन कौशिक ने कहा कि बेटियों के बिना कोई भी धार्मिक काम पूरा नहीं होता है।
भगवान श्रीराम ने भी अश्वमेध यज्ञ को सीता माता की सोने की मूर्ति रख कर पूरा किया था। उन्होंने बताया कि बेटियां के जन्म पर भगवान खुश होते हैं। बेटियोें को जीवन में दो-दो बार अलग-अलग घरों में अपनी पहचान के लिए मेहनत करनी पड़ती है। बेटियां देश की संसद तक चला रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी एक बेटी है। जब से उसका जन्म हुआ है घर में खुशियां ही खुशियां हैं। उनकी बेटी लेक्चरर के पद पर कार्यरत है।
डॉ. नीटा ग्रोवर ने बताया कि वे चार बहनें हैं। उनके पिता जी ने सभी बहनों को उच्च शिक्षा दिलवाई जिसके बल पर आज वे सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्र अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनकी एक बेटी है जो कोर्स कर रही है। बेटी के जन्म से ही अच्छी शिक्षा देकर उसे कामयाब बनाना ही एकमात्र लक्ष्य है।
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डाईट के प्राध्यापक डा. महेश गौड़ ने बताया कि बेटी के बिना इस संसार की कल्पना नहीं हो सकती है। बेटियां आजीवन माता-पिता के प्रति सेवा भाव रखती हैं। उन्होंने कहा कि बेटी होने पर बेटी को अच्छी शिक्षा देकर सक्षम बनाना चाहिए। कॉलेज की छात्रा पूजा कौशिक, सावित्री, मोनिका, सविता, नीलम सिंगला, रानी देवी, कोमल रानी, सोनिया, सुदेश कुमारी, आशा रानी, मनीषा रानी, नीलम, पूनम, काजल, हिना, मोनिका, दीक्षा, सपना धीमान, अर्पित कौर, मनीषा, अनीता, अंजू रानी ने कहा कि अमर उजाला द्वारा चलाया जा रहा अभियान देश की बेटियों को अपनी पहचान देगा। बेटा-बेटी में समानता लाने के लिए समाज की सोच में परिवर्तन लाना अनिवार्य है।
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भगवान श्रीराम ने भी अश्वमेध यज्ञ को सीता माता की सोने की मूर्ति रख कर पूरा किया था। उन्होंने बताया कि बेटियां के जन्म पर भगवान खुश होते हैं। बेटियोें को जीवन में दो-दो बार अलग-अलग घरों में अपनी पहचान के लिए मेहनत करनी पड़ती है। बेटियां देश की संसद तक चला रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी एक बेटी है। जब से उसका जन्म हुआ है घर में खुशियां ही खुशियां हैं। उनकी बेटी लेक्चरर के पद पर कार्यरत है।
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डॉ. नीटा ग्रोवर ने बताया कि वे चार बहनें हैं। उनके पिता जी ने सभी बहनों को उच्च शिक्षा दिलवाई जिसके बल पर आज वे सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्र अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनकी एक बेटी है जो कोर्स कर रही है। बेटी के जन्म से ही अच्छी शिक्षा देकर उसे कामयाब बनाना ही एकमात्र लक्ष्य है।
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डाईट के प्राध्यापक डा. महेश गौड़ ने बताया कि बेटी के बिना इस संसार की कल्पना नहीं हो सकती है। बेटियां आजीवन माता-पिता के प्रति सेवा भाव रखती हैं। उन्होंने कहा कि बेटी होने पर बेटी को अच्छी शिक्षा देकर सक्षम बनाना चाहिए। कॉलेज की छात्रा पूजा कौशिक, सावित्री, मोनिका, सविता, नीलम सिंगला, रानी देवी, कोमल रानी, सोनिया, सुदेश कुमारी, आशा रानी, मनीषा रानी, नीलम, पूनम, काजल, हिना, मोनिका, दीक्षा, सपना धीमान, अर्पित कौर, मनीषा, अनीता, अंजू रानी ने कहा कि अमर उजाला द्वारा चलाया जा रहा अभियान देश की बेटियों को अपनी पहचान देगा। बेटा-बेटी में समानता लाने के लिए समाज की सोच में परिवर्तन लाना अनिवार्य है।