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करनाल पहुंचे सरसंघचालक: बोले- शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही मूलभूत जरूरतें, दोनों ही हो रही महंगी और दुर्लभ

Sun, 05 Mar 2023 07:07 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 05 Mar 2023 07:07 PM IST
सार

मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा-चिकित्सा सेवा की बजाय व्यावसायीकरण से महंगी हो गई है। उन्होंने श्री आत्ममनोहर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से धर्मार्थ बनाए गए श्री आत्ममनोहर जैन बहुविशेषीय अस्पताल का लोकार्पण किया।

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Sarsanghchalak of RSS Dr. Mohan Bhagwat reached Karnal
करनाल पहुंचे सरसंघचालक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के करनाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को श्री आत्म मनोहर जैन बहुविशेषीय चिकित्सालय का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने सेवा और धर्म को परिभाषित करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरतें हैं, दोनों ही महंगी और दुर्लभ हो रही हैं।

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इसका एक कारण तो जनसंख्या के आधार पर उपलब्धता की कमी, दूसरा कर्तव्य और सेवा के स्थान पर व्यावसायिक होना है। इसके लिए समाज को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करके अपनी शिक्षा हमारे देश में लागू की, जिससे अशिक्षा और कई अन्य समस्याएं बढ़ी।

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नगर के इंद्री रोड स्थित श्री आत्ममनोहर आराधना जैन मंदिर में उपप्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज के सानिध्य में आयोजित सद्भावना सेवा समारोह में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। उन्होंने श्री आत्ममनोहर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से यहां धर्मार्थ बनाए गए श्री आत्ममनोहर जैन बहुविशेषीय अस्पताल का लोकार्पण किया।

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इस दौरान यहां कई संत महात्मा भी पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने यहां मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अंग्रेजों से पहले हमारे देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर थी। बेरोजगारी नहीं थी, उस समय इंग्लैड की साक्षरता 17 प्रतिशत थी लेकिन अंग्रेजों ने भारत में हावी होने के बाद हमारी शिक्षा पद्धति को खत्म कर अपनी शिक्षा प्रणाली को लागू कर दिया, जिससे यहां साक्षरता दर 17 प्रतिशत रह गई।

 

हमारी शिक्षा पद्धति में शिक्षक सिखाता था, ज्ञान देता था, ये उसकी सेवा थी। एक एक प्रांत में 70-70 हजार विद्यालय थे और उनकी साक्षरता 70 प्रतिशत हो गई। जिनमे सस्ती और सुलभ शिक्षा मिलती थी। इसी तरह 10-15 गावों को मिलाकर एक वैद्य हुआ करते थे, वह खुद दवा देने जाते थे। फैमिली डॉक्टर की तरह, वह वैद्य सबकों जानता था, उसकी बीमारी का इतिहास जानता था दवा काम करती थी। उनकी आजीविका की चिंता गांव के लोग करते थे। अब ये प्रणाली विलुप्त हो गई है।


 

उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन अच्छी शिक्षा और चिकित्सा सबको को कैसे मिले, इस पर हमें काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा अभाव दूर करती है। ये अस्पताल भी धर्मार्थ बनाया गया है। यही संत का कार्य है, वह करके सिखाने के लिए करते हैं। समाज को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

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