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संकीर्तन आध्यात्मिक कृपा पाने का प्रमुख साधन : विशाल दास
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संवाद न्यूज एजेंसी
नीलोखेड़ी। सोशल ऑर्गेनाइजेशन गुदगुदी जंक्शन समूह के तत्वावधान में धर्म एवं अध्यात्म ग्रुप भक्ति सागर की ओर से श्री परशुराम धर्मशाला में सोमवार को हरिनाम संकीर्तन एवं धर्म चर्चा की गई।
उपाध्यक्ष एवं ठाकुरद्वारा श्री नाभिकमल मंदिर कुरुक्षेत्र के महंत विशाल दास ने हरिशयनी एकादशी का महत्व बताया और कहा कि भगवान के पवित्र नामों का जाप करके आध्यात्मिक कृपा प्राप्त करने में संकीर्तन प्रमुख है। महंत विशाल दास ने कहा कि आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी से कार्तिक माह की देव उठनी एकादशी (चार माह) तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं।
अर्थात् ब्रह्मांडीय व्यवस्था देवशक्तियों पर आधारित हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु विशेष रूप से भक्तों की प्रार्थनाओं को स्वीकार करते हैं और उनके जीवन को पुण्य, रक्षा और कल्याण से भर देते हैं। महंत गोविंद दास ने बताया कि यह एक शक्तिशाली भक्ति अभ्यास है जो भक्तों को भगवान के साथ गहरे संबंध बनाने, मन और हृदय को शुद्ध करने और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करने में सहायक है।
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हरिनाम संकीर्तन भगवान के साथ प्रेमपूर्ण संबंध विकसित करने और आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है।
धर्मशाला सभा की ओर से सभी संतों को दोशाला और श्रीफल प्रदान किया गया। गुदगुदी समूह की ओर से नीलोखेड़ी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न दिया गया।
धर्म चर्चा के पश्चात सभी सदस्य आरती में शामिल हुए। इस अवसर पर हरविंदर शर्मा, अशोक धवन, सुनील कुमार, नीना शर्मा, ममता, संतोष जोशी आदि मौजूद रहे।
अध्यक्षता समूह अध्यक्ष चंद्रमौलि गौड़ ने की और मंच संचालन संरक्षक जितेंद्र बंसल ने किया।
संयोजक सतीश जोशी, कर्णराज शर्मा और हरिमोहन नारंग ने अन्य सदस्यों सहित संतों और आगंतुकों का स्वागत किया। इस दौरान माहौल भक्तिमय रहा आैर श्रद्ध्ालु उमड़े।
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नीलोखेड़ी। सोशल ऑर्गेनाइजेशन गुदगुदी जंक्शन समूह के तत्वावधान में धर्म एवं अध्यात्म ग्रुप भक्ति सागर की ओर से श्री परशुराम धर्मशाला में सोमवार को हरिनाम संकीर्तन एवं धर्म चर्चा की गई।
उपाध्यक्ष एवं ठाकुरद्वारा श्री नाभिकमल मंदिर कुरुक्षेत्र के महंत विशाल दास ने हरिशयनी एकादशी का महत्व बताया और कहा कि भगवान के पवित्र नामों का जाप करके आध्यात्मिक कृपा प्राप्त करने में संकीर्तन प्रमुख है। महंत विशाल दास ने कहा कि आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी से कार्तिक माह की देव उठनी एकादशी (चार माह) तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं।
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अर्थात् ब्रह्मांडीय व्यवस्था देवशक्तियों पर आधारित हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु विशेष रूप से भक्तों की प्रार्थनाओं को स्वीकार करते हैं और उनके जीवन को पुण्य, रक्षा और कल्याण से भर देते हैं। महंत गोविंद दास ने बताया कि यह एक शक्तिशाली भक्ति अभ्यास है जो भक्तों को भगवान के साथ गहरे संबंध बनाने, मन और हृदय को शुद्ध करने और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करने में सहायक है।
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हरिनाम संकीर्तन भगवान के साथ प्रेमपूर्ण संबंध विकसित करने और आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है।
धर्मशाला सभा की ओर से सभी संतों को दोशाला और श्रीफल प्रदान किया गया। गुदगुदी समूह की ओर से नीलोखेड़ी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न दिया गया।
धर्म चर्चा के पश्चात सभी सदस्य आरती में शामिल हुए। इस अवसर पर हरविंदर शर्मा, अशोक धवन, सुनील कुमार, नीना शर्मा, ममता, संतोष जोशी आदि मौजूद रहे।
अध्यक्षता समूह अध्यक्ष चंद्रमौलि गौड़ ने की और मंच संचालन संरक्षक जितेंद्र बंसल ने किया।
संयोजक सतीश जोशी, कर्णराज शर्मा और हरिमोहन नारंग ने अन्य सदस्यों सहित संतों और आगंतुकों का स्वागत किया। इस दौरान माहौल भक्तिमय रहा आैर श्रद्ध्ालु उमड़े।