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बिना अनुमति लगे मोबाइल टावर, रेडिएशन का खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Mon, 30 Nov 2015 12:38 AM IST
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मोबाइल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को 4जी सेवा देने के लिए ट्राई के नियमों को ताक पर रखकर मोबाइल टावर खड़े कर दिए हैं और निगम प्रशासन को इसकी खबर तक नहीं है। मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों ने नए साल से शहर में 4जी सेवा देने के लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसके लिए कंपनियों ने हर पांच सौ मीटर की दूरी पर 4जी रेडिएशन के लिए ट्रांसपोंडर (रेंज छोड़ने वाला यंत्र) लगाए हैं।
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कंपनियों ने आपसी मिलीभगत कर एक-एक टावर पर ही कई-कई ट्रांसपोंडर लगा दिए हैं। जिससे नगर निगम को भी टैक्स के रूप में करोड़ों का झटका लगा है। वहीं दूसरी ओर शहर में टावरों की संख्या बढ़ने से रेडिएशन का खतरा भी बढ़ गया है। लेकिन निगम प्रशासन व ट्राई (टेली कम्युनिकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी) द्वारा भी कोई कदम नहीं उठाया गया है।
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ट्राई द्वारा वर्ष 2012 में मोबाइल कंपनियों को निर्देश जारी कर ग्रामीण व शहरी क्षेत्र की रिहायशी कॉलोनियों में टावर लगाने पर रोक लगाई गई थी। यही नहीं रिहायशी क्षेत्रों में पहले से लगे टावरों पर भी रेडिएशन जांच के साथ अन्य सावधानियां बरतने की भी हिदायतें दी थी। ट्राई द्वारा मोबाइल कंपनियों को अस्पताल, स्कूल, खेल के मैदान व अन्य सार्वजनिक स्थान जहां पर लगे टावरों से रेडिएशन के खतरे को देखते हुए हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कंपनियों ने टावर हटाने की बजाए अपने मुनाफे के लिए उन्हीं टावरों पर ट्रांसपोंडर की संख्या बढ़ा दी है। इससे उन टावरों का रेडिएशन भी दोगुना हो गया।
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शहर की रिहायशी कॉलोनियों में लगे 110 टावर
शहर में विभिन्न मोबाइल कंपनियों के छोटे और बड़े करीब 110 टावर लगे हुए हैं। कुछ स्थानों पर तो ये टावर जमीन पर लगाए गए हैं। लेकिन ज्यादातर टावर दुकानों व मकानों की छत पर लगाए गए हैं। जबकि रिहायशी कॉलोनियों में टावर लगाने की अनुमति भी नहीं है। यदि कारणवश रिहायशी कॉलोनियों में टावर लगाना भी पड़े तो इसके लिए कंपनी व मकान मालिक को नगर निगम से अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन मोबाइल कंपनियों ने बार-बार निगम प्रशासन से अनुमति लेने की बजाय आपसी समझौता कर एक ही टावर पर कई ट्रांसपोंडर लगा दिए हैं।
मोबाइल टावर के लिए क्या हैं नियम
ट्राई नियमों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में लगे टावरों के बीच कम से कम पांच सौ मीटर का फासला होना जरूरी है। दोनो टावरों के ट्रांसपोंडर एक दिशा में न हो। शहर में अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र व अस्पताल, खेल का मैदान, स्कूल, कॉलेज के पास टावर नहीं होना चाहिए। मोबाइल टावर ग्राउंड लेवल से पांच मीटर ऊंचा होना चाहिए तथा उसके सामने कोई भी ऑफिस या ऊंची इमारत नहीं होनी चाहिए।
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वर्जन
शहर में टावर लगाने के लिए अब किसी भी कंपनी को अनुमति नहीं दी गई है। निगम के रिकॉर्ड में 56 टावरों की अनुमति दी गई है। वहीं सेक्टरों में टावर लगवाने के लिए हुडा प्रशासन जिम्मेवार है। बिना अनुमति के टावर लगाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। धीरज कुमार, ईओ, नगर निगम