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नियम 134ए- अब अभिभावक सड़क पर, प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

Wed, 11 May 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Wed, 11 May 2016 01:03 AM IST
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Rule 134 A, guardian now on the road, performing assigned memo
नियम 134-ए - फोटो : अमर उजाला

निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा नियम 134-ए के तहत मेधावी छात्रों को स्कूलों में प्रवेश न दिए जाने के विरोध में मंगलवार को जिले भर में अभिभावक सड़क पर उतर आए। अभिभावकों ने स्कूलों के खिलाफ नारेबाजी कर जिला व ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। अभिभावकों ने निजी स्कूलों के खिलाफ शिकंजा कसकर उनकी मनमानियों पर रोक लगाने की मांग की। जिला अभिभावक संघ के जिला प्रधान दिनेश नरूला की अगुवाई में सैकड़ों की संख्या में अभिभावकों ने जिला सचिवालय पहुंचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। साथ ही हड़ताल के दौरान बच्चों की फीस वापस दिलाने की भी मांग की।

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मंगलवार सुबह अभिभावक लघु सचिवालय के बाहर एकत्रित हुए और सचिवालय तक प्रदर्शन करते हुए पहुंचे। डीसी को मांगों का ज्ञापन सौंपा। इससे पहले, अभिभावकों को संबोधित करते हुए प्रधान दिनेश नरूला ने कहा कि उनके बच्चों ने सरकार की सभी शर्तों को पूरा करते हुए 134-ए के तहत दिए गए टेस्ट में 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, लेकिन प्राइवेट स्कूल बच्चों का एडमिशन लेने से साफ मना कर रहे हैं। इतना ही नहीं 134-ए के विरोध में पिछले पांच दिनों से स्कूलों के बाहर ताला जड़े बैठे हैं। इससे न सिर्फ उनके बच्चों को एडमिशन नहीं मिल पा रहा है, बल्कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले अन्य बच्चों की पढ़ाई को भी नुकसान पहुंच रहा है। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों पर लगने वाले चार्जों का कोई हिसाब नहीं है और स्कूल मोटी कमाई कर रहे हैं। इसके बावजूद भी 10 प्रतिशत बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से पीछे हट रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार भी स्कूलों पर कोई शिकंजा नहीं कस रही है। शिक्षा निदेशालय द्वारा इस बार शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों ने अपनी मर्जी से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लागू कर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया है। इसके अलावा स्कूल संचालकों ने मान्यता के लिए जिन शर्तों को पूरा करने की हामी भरी थी, अब स्कूल उनसे पीछे क्यों हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्कूल अपनी जिद पर अड़ हैं तो अभिभावक संघ भी अपनी जिद पर अड़ा है। जब तक बच्चों को स्कूलों में एडमिशन नही दिलाएंगे तब तक वे हार नहीं मानेंगे। प्रदर्शन के बाद अभिभावकों ने डीसी को ज्ञापन सौंपा और गरीब बच्चों के दाखिले की मांग की। इस मौके पर रानी, बृजेश कुमार, संदीप रोहिल्ला, रमन आदि मौजूद रहे।
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स्कूल सरकार का सहयोग नहीं करते तो नियमों का पालन करें
घरौंडा।
निजी स्कूलों द्वारा 134-ए के नियमों का विरोध करने भड़के अभिभावकों ने कहा कि निजी स्कूल सरकार के आदेशों पालन नहीं करते, तो फिर शिक्षा नियमों का पालन करें। अभिभावकों ने कहा कि सरकार को भी इन स्कूलों पर कोई रहमो कर्म करने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले तो सरकार स्कूलों को रियायती दरों पर दी गई जमीन वापिस ले तथा किसी भी स्कूलों को नियमों का पालन न करने पर मान्यता रद्द करने का प्रावधान को अमल में लाए

मंगलवार को अभिभावक एकता संघ के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए बीईओ कार्यालय पहुंचे अभिभावक सुरेंद्र, बिरमति, सुमित्रा, गीता, प्रदीप कुमार कैमला, अक्षय, उदय कुमार आदि ने कहा कि निजी स्कूल हर वर्ष करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। आज से 10 वर्ष पहले दो स्कूल दो कमरों से शुरू हुए थे, आज वो दो एकड़ में फैल गए हैं। आखिर स्कूलों के पास इतना रुपया कहां से आया है, इसकी सीबीआई जांच करवाई जाए तथा लूट मचाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताली छुट्टियों की वजह से विद्यार्थियों को जो शिक्षा का नुकसान हुआ है, स्कूल उसकी फीस वापिस कर भरपाई करें। उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा उनकी मांगों का पूरा नहीं किया गया तो,अभिभावक संघ प्रदेश में जनांदोलन शुरू करेगा।

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