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खुफिया एजेंसियों के निशाने पर बब्बर खालसा के स्लीप सेल्स

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 02:57 AM IST
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Rinda's sleep sales linked to Babbar Khalsa are on target of intelligence agencies
बब्बर खालसा से जुड़े हरविंद्र सिंह रिंदा द्वारा पाकिस्तान से भारत में आतंकियों गतिविधियों की बड़ी साजिश का खुलासा होने के बाद अब देश की खुफिया एजेंसियों की निगाहें रिंदा के स्लीप सेल्स पर टिक गई है। इसकी शुरुआत पंजाब से होनी मानी जा रहा है। एजेंसियां अब पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक उससे जुड़ी हर प्रकाश में आई गतिविधियों को गंभीरता से लेकर उसका नेटवर्क खंगालने में जुट गई है।
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बताया जा रहा है कि हरविंद्र सिंह रिंदा कई साल पहले पंजाब के तरनतारन को छोड़कर महाराष्ट्र के नादेड़ चला गया था। ये भी जानकारी मिली है कि वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे नेपाल होते हुए पाकिस्तान चला गया। तब से वह वहीं रहकर आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। बताते हैं कि पहले वह कनाडा जाने की तैयारी में था लेकिन इसकी भनक पुलिस को लग जाने के कारण उसने अपनी योजना बदल दी। उसे तरनतारन में एक युवक की हत्या के मामले में सजा भी हो चुकी है। उसने 2014 में पटियाला सेंट्रल जेल के अधिकारियों पर भी हमला किया था। 2016 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में एक छात्र नेता भी हमला किया था। उस पर 2017 में होशियारपुर में सरपंच की हत्या का आरोप भी लग चुका है। रिंदा पर पंजाब और महाराष्ट्र में कई आपराधिक मामले दर्ज है।
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जानकारी के अनुसार करीब दो दशक पहले ही वह बब्बर खालसा इंटरनेशनल के चीफ बधावा के संपर्क में आ चुका था। करनाल पुलिस द्वारा पांच मई को बसताड़ा टोल प्लाजा पर गिरफ्तार किए चार आतंकियों से मिली जानकारी में नई साजिश का खुलासा हुआ है, जिससे भारतीय खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ गई है। लगातार जांच के बावजूद अभी तक महाराष्ट्र के नादेड़ पहुंच चुके विस्फोटक की जानकारी नहीं मिल सकी है। इससे जुड़े कई अहम सवालों के जवाब तो जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे लेकिन अब खुफिया एजेंसियों का ध्यान बब्बर खालसा के स्लीप सेल्स की ओर केंद्रित हो चुका है। पंजाब, नादेड़ आदि के नाम सामने आने के बाद ये समझ में ही आ ही गया है कि इन दोनों स्थानों पर कोई न कोई नेटवर्क है, जो विस्फोटकों को रिसीव करता है, उसे छिपाता है या फिर कहीं न कहीं पहुंचाता है। देश में कहां कहां उसका नेटवर्क और फैला है, उस तक पहुंचना भी आवश्यक है, अन्यथा स्लीप सेल कब सक्रिय हो जाएं, कुछ नहीं कहा जा सकता।
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