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Karnal News: जज्बे को सलाम, दो साल तक कंधे की दर्द से उबरकर रिद्धि ने जीते दो पदक
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पदक दिखाती रिद्धि फोर
गगन तलवार
करनाल। बैंकॉक तीरंदाजी एशिया कप में कर्णनगरी की रिद्धि ने चांदी और कांसे पर निशाना साधा है। कंधे की चोट के कारण रिद्धि पिछले दो साल से मैदान से बाहर थीं। लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मैदान में उतरीं और देश की झोली में दो पदक डाल दिए। रिद्धि अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर के 14 पदक जीत चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 22 से 28 मार्च तक बैंकॉक में हुआ। इसमें करनाल से एकमात्र रिद्धि फोर ने हिस्सा लिया था। रिद्धि ने व्यक्तिगत स्तर पर रजत और टीम प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीता। गत माह उन्होंने नेशनल रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हुए भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। पिता मनोज फोर ने बताया कि रिद्धि इस स्पर्धा के लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में सुरेंद्र रंधावा कोच के सानिध्य में अभ्यास किया था। उन्होंने बाबा रामदास विद्यापीठ से स्कूली शिक्षा और गुरु नानक खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की।
2014 में जीता था पहला पदक
तीरंदाज रिद्धि फोर अब तक 84 पदक जीत चुकी हैं। इनमें 14 अंतरराष्ट्रीय और 70 पदक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के हैं। रिद्धि ने वर्ष 2012 में शुरुआती प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2014 में आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित अंडर-14 मुकाबलों में पहला स्वर्ण पदक जीता।
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पिता बने पहले गुरु, थमाया धनुष
रिद्धि के पिता मनोज ने उनके हुनर को पहचाना। खुद तीरंदाजी सीखकर अपनी बेटी को धनुष चलाना सिखाया। आठ वर्ष की उम्र में ही रिद्धि ने निशानेबाजी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। 15 साल की उम्र में अपना नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज कराया। मां पिंकी का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। रिद्धि उन लोगों के लिए उदाहरण हैं जो ये सोचते हैं कि बेटे ही खेलों में नाम रोशन कर सकते हैं और अपनी बेटियों के हुनर को दबा देते हैं।
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करनाल। बैंकॉक तीरंदाजी एशिया कप में कर्णनगरी की रिद्धि ने चांदी और कांसे पर निशाना साधा है। कंधे की चोट के कारण रिद्धि पिछले दो साल से मैदान से बाहर थीं। लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मैदान में उतरीं और देश की झोली में दो पदक डाल दिए। रिद्धि अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर के 14 पदक जीत चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 22 से 28 मार्च तक बैंकॉक में हुआ। इसमें करनाल से एकमात्र रिद्धि फोर ने हिस्सा लिया था। रिद्धि ने व्यक्तिगत स्तर पर रजत और टीम प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीता। गत माह उन्होंने नेशनल रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हुए भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। पिता मनोज फोर ने बताया कि रिद्धि इस स्पर्धा के लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में सुरेंद्र रंधावा कोच के सानिध्य में अभ्यास किया था। उन्होंने बाबा रामदास विद्यापीठ से स्कूली शिक्षा और गुरु नानक खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की।
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2014 में जीता था पहला पदक
तीरंदाज रिद्धि फोर अब तक 84 पदक जीत चुकी हैं। इनमें 14 अंतरराष्ट्रीय और 70 पदक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के हैं। रिद्धि ने वर्ष 2012 में शुरुआती प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2014 में आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित अंडर-14 मुकाबलों में पहला स्वर्ण पदक जीता।
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पिता बने पहले गुरु, थमाया धनुष
रिद्धि के पिता मनोज ने उनके हुनर को पहचाना। खुद तीरंदाजी सीखकर अपनी बेटी को धनुष चलाना सिखाया। आठ वर्ष की उम्र में ही रिद्धि ने निशानेबाजी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। 15 साल की उम्र में अपना नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज कराया। मां पिंकी का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। रिद्धि उन लोगों के लिए उदाहरण हैं जो ये सोचते हैं कि बेटे ही खेलों में नाम रोशन कर सकते हैं और अपनी बेटियों के हुनर को दबा देते हैं।