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प्रदूषण की शर्तों से डगमगाने लगा चावल, कृषि यंत्र, दवाई उद्योग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Dec 2021 02:18 AM IST
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Rice, agricultural machinery, pharmaceutical industry started staggering due to pollution conditions
देव शर्मा
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करनाल। दिल्ली सहित एनसीआर की खराब होती आबोहवा को सुधारने के लिए लागू की गई शर्तों से करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाले चावल और कृषि यंत्र उद्योग और दवाई सहित कई उद्योग डगमगाने लगे हैं। औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होने लगा है। अकेले दवाई उद्योग को ही करीब एक हजार करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान होने का अनुमान है।
उद्यमियों ने आशंका जताई है कि यदि यही स्थिति रही तो उद्योगों को बंद करना पड़ेगा। चौबीस घंटे में आठ घंटे संचालन व सप्ताह में दो दिन की बंदी इसका औचित्यपूर्ण समाधान नहीं है। उद्यमियों का कहना है कि दिल्ली में हर साल प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है, लेकिन फिर भी सरकार अब तक सिर्फ पराली, उद्योगों का राग अलाप रही है। सरकार को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार वास्तविक कारकों की पहचान करके कोई ठोस और स्थायी समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि अधिकांश उद्योग ऐसे हैं, जिनकी एक बार की प्रोसेसिंग की 20 से 24 घंटे की है, उन्हें बीच में रोका नहीं जा सकता है। सप्ताह में दो दिन की बंदी व रात्रिकालीन हर रोज बंदी से लेबर भी चली जाती है, फिर उसे वापस लाने में कई दिन लग जाते हैं। जिन उद्यमों के पास देश-विदेश से आर्डर हैं, वह आखिर आर्डर कैसे पूरे हो सकेंगे। ऐसा नहीं होने पर कंपनियों की साख पर बट्टा लगेगा। उनकी मार्केट खराब होगी।
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प्रदूषण को रोकने के लिए जो नियम लागू किए गए हैं, इनसे उद्योगों की कमर टूट जाएगी। प्रदूषण कई साल से लगातार हो रहा है, इसके मुख्य कारकों को पहचान कर सरकार को इसका स्थायी समाधान निकालना चाहिए। दिल्ली से दूरस्थ क्षेत्रों में उद्योगों को बंद करना या उन पर ऐसी पाबंदियां लगाना, शर्तें थोपना कोई समाधान नहीं है।
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आरएल शर्मा, प्रधान हरियाणा फार्मास्युटिकल्स एंड मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की शर्तों से उद्योगों पर बड़ा असर पड़ रहा है। कई इंडस्ट्रीज ऐसी हैं, जिनकी प्रोसेसिंग ही 20 से 24 घंटे की होती है, इसलिए उन्हें प्रोसेसिंग के बीच में रोका नहीं जा सकता है। यही स्थिति रही तो ऐसे उद्योगों को बंद करना पड़ेगा, दूसरा कोई रास्ता नहीं है। जुर्माने का भी प्राविधान कर रखा है, यदि आठ घंटे से अधिक इंडस्ट्री चलती मिली तो 25 लाख रुपये का जुर्माना है।
मनोज अरोड़ा, प्रधान हरियाणा स्टेट इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड
सरकार इतने साल में प्रदूषण फैलाने वाले मुख्य कारकों को नहीं तलाश पाई है। इसका दोष इंडस्ट्री पर मढ़कर पाबंदियां लगा देती है, जो उचित नहीं है। अकेले फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री को ही एनसीआर क्षेत्र में करीब 1000 करोड़ रुपये का रोजाना नुकसान होने लगा है, क्योंकि करनाल, गुरुग्राम, रोहतक, बहादुरगढ़, सोनीपत, पानीपत आदि में बड़ी इंडस्ट्री हैं। शीघ्र समाधान तलाशा जाना चाहिए।

विकास पुरुथी, महासचिव हरियाणा फार्मास्युटिकल्स एंड मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
उद्योगों की हालत तो पहले से नाजुक है। हालांकि काफी हद तक कृषि यंत्र इंडस्ट्री पीएनजी पर चली गई लेकिन शहर से बाहरी क्षेत्र में दिक्कत अधिक है। राइस मिलर्स के सामने बड़ी परेशानी है। जेनरेटर भी पूरी तरह बंद हैं। जो क्षेत्र दिल्ली से दूर है, उनके लिए उदारतापूर्ण नियम बनाने चाहिए ताकि उद्योगों को बंद करने की नौबत न आए, अन्यथा औद्योगिक घाटा विकास दर को भी प्रभावित करेगा।
भावुक मेहता, महा सचिव करनाल एग्रीकल्चरल इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर एसोसिएशन
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