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मां शाकंभरी देवी मेले में दूसरे दिन भी उमड़ी श्रद्धा
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बड़ागांव स्थित माता शाकंभरी देवी मंदिर में आयोजित मेले के दूसरे दिन मां के दर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा। दूर-दराज से श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने मां की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कोरोना जैसी महामारी से बचाव की अरदास की। मंदिर परिसर में लगे मेले में महिलाओं व बच्चों ने खूब खरीददारी की और व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
दो दिन चले मेले में मंगलवार को जहां माता के भोग के लिए हलवा, पूरी और सब्जी का प्रसाद बनाया गया, वहीं बुधवार को कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
1516 में बसा था गांव
बड़ागांव के पूर्व सरपंच चरण सिंह राणा ने बताया कि 1516 ईसवी में लाल सिंह राणा ने इस गांव को बसाया था। उनके पिता मुला सिंह राणा मैनमती गांव के रहने वाले थे, वहीं से आकर लाल सिंह राणा ने गांव बसाया था। उनके द्वारा ही सहारनपुर स्थित मां के स्थल से मां शाकंभरी देवी की ज्योत लाने के बाद मां के मंदिर का निर्माण करवाया गया। बताया जाता है कि तब से केवल कोविड काल को छोड़ यहां चौदस के दिन मां शाकंभरी देवी पूजा, भंडारा और दंगल का आयोजन किया जाता है।
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करनाल। बड़ागांव स्थित माता शाकंभरी देवी मंदिर में आयोजित मेले के दूसरे दिन मां के दर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा। दूर-दराज से श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने मां की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कोरोना जैसी महामारी से बचाव की अरदास की। मंदिर परिसर में लगे मेले में महिलाओं व बच्चों ने खूब खरीददारी की और व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
दो दिन चले मेले में मंगलवार को जहां माता के भोग के लिए हलवा, पूरी और सब्जी का प्रसाद बनाया गया, वहीं बुधवार को कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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1516 में बसा था गांव
बड़ागांव के पूर्व सरपंच चरण सिंह राणा ने बताया कि 1516 ईसवी में लाल सिंह राणा ने इस गांव को बसाया था। उनके पिता मुला सिंह राणा मैनमती गांव के रहने वाले थे, वहीं से आकर लाल सिंह राणा ने गांव बसाया था। उनके द्वारा ही सहारनपुर स्थित मां के स्थल से मां शाकंभरी देवी की ज्योत लाने के बाद मां के मंदिर का निर्माण करवाया गया। बताया जाता है कि तब से केवल कोविड काल को छोड़ यहां चौदस के दिन मां शाकंभरी देवी पूजा, भंडारा और दंगल का आयोजन किया जाता है।
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