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Karnal News: पांच एकड़ से अधिक क्षति दर्ज न होने का प्रतिबंध हटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Mar 2024 03:55 AM IST
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Restriction of not registering damage to more than five acres removed
अब जिस किसान का जितना नुकसान है, पूरा पोर्टल पर हो सकता है दर्ज
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दो मार्च को हुई बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों की पांच एकड़ से अधिक रकबे की क्षति दर्ज न होने की समस्या को शनिवार को हरियाणा सरकार ने खत्म कर दिया है। अब क्षतिपूर्ति पोर्टल से खराब फसलों के नुकसान की सीमा को हटा लिया है। जिससे अब किसान अपने पूरे नुकसान को पोर्टल पर एक साथ दर्ज सकते हैं।
दो मार्च को जिले के कई क्षेत्रों में बारिश व ओलावृष्टि हुई थी। जिसके कारण कई फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने फसली नुकसान को क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज कराने की बात किसानों से कही थी। किसान जब क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना फसली नुकसान दर्ज कराने लगे तो पोर्टल में पांच एकड़ से अधिक जमीन का नुकसान दर्ज नहीं हो पाया था। इससे बड़ी संख्या में किसान पूरा नुकसान दर्ज नहीं करा सके। ऐसे में भाकियू सर छोटूराम के प्रवक्ता बहादुर मेहला आदि किसान नेताओं ने पांच एकड़ से अधिक नुकसान पर लगा प्रतिबंध हटाए जाने की मांग उठाई थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने भी ये बात आई थी।
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भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम के प्रवक्ता बहादुर मेहला ने बताया कि शनिवार से क्षतिपूर्ति पोर्टल से पांच एकड़ की शर्त हटा ली गई है। अब हरियाणा के किसान पांच एकड़ से ज्यादा का पंजीकरण करवाकर भी सरकार से फसल बर्बाद होने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे के लिए आवेदन कर सकेंगे। बारिश व ओलावृष्टि से सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं। इनकी विशेष गिरदावरी करवा सरकार जल्द से जल्द मुआवजा दे। पोर्टल के बहाने सरकार किसानों को परेशान करना चाहती है। सरकार की मंशा ठीक है तो टीमें बनाकर प्रदेशभर में भेजें और गिरदावरी का कार्य जल्द से जल्द पूरा करवाया जाए।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि असंध, निसिंग ब्लाॅक क्षेत्र का क्षतिपूर्ति पोटल खुला है। कोई भी किसान, जिसका जितना नुकसान है, वह क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज कर सकता है। पांच एकड़ से अधिक क्षति दर्ज नहीं होने जैसी कोई शिकायत नहीं है।
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