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Karnal News: लवणीय मिट्टी, खराब पानी में फसल उत्पादकता बढ़ाने पर होंगे शोध
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- सीएसएसआरआई और सिंजेंटा इंडिया के बीच एमओयू पर हुए हस्ताक्षर
- स्थायी कृषि पद्धतियों को विकसित किया जाएगा, देशभर में की जाएगी खराब मिट्टी-पानी की पहचान
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच लवण प्रभावित मिट्टी वाले और ऊसर क्षेत्रों में कैसे फसलें लहलहाएं और खराब पानी का क्या और कैसे उपयोग किया जाए, इस पर शोध कार्यों के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और स्थायित्व के लिए केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) और सिंजेंटा इंडिया के बीच एक एमओयू साइन किया गया है। जिस पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करके वहां की मिट्टी और पानी के सुधार और वहां के लिए नई किस्मों सहित विभिन्न स्तर पर व्यवस्थागत तैयारी की जाएगी। आधुनिक कृषि का टिकाऊ और किसानों की समृद्धि का मॉडल बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
जिसका फायदा आने वाले समय में किसानों को तो मिलेगा, साथ ही देश को अतिरिक्त खाद्यान्न भी मिल सकेगा। इस एमओयू के तहत सीएसएसआरआई के मृदा प्रबंधन के शोध अनुभव और सिंजेंटा के नवाचारी कृषि समाधान व्यवस्था की साझेदारी होगी। दोनों की साझेदारी किसानों को ऐसी पद्धतियां अपनाने में सहायता करेगी, जो फसल उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थायित्व सुनिश्चित करेगी।
सिंजेंटा इंडिया के कंट्री हेड एवं प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि हम जलवायु परिवर्तन, भूमि कटाव और जैव विविधता की हानि जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचारों को अपना आधार बनाकर काम कर रहे हैं। हमारे संयुक्त प्रयासों से हम कृषि को टिकाऊ और किसानों की समृद्धि का मॉडल बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि सीएसएसआरआई, देश के विभिन्न कृषि-पर्यावरणीय क्षेत्रों में लवणता और क्षारीयता प्रबंधन एवं कम गुणवत्ता वाले सिंचाई जल के उपयोग पर बहुआयामी शोध कार्य कर रहा है। जिसका फायदा सीधे किसानों को मिलेगा।
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सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ आरके यादव ने कहा कि हम सिंजेंटा इंडिया के साथ मिलकर लवणग्रस्त मिट्टी प्रबंधन और स्थायी कृषि पद्धतियों के माध्यम से फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए संयुक्त शोध एवं विकास परियोजनाएं चलाएंगे। सबसे पहले इसका अध्ययन किया जाएगा कि क्या मुख्य चुनौतियां हैं, उन्हें क्षेत्र क्या क्या है, उनका समाधान क्या हो सकता है, उसी दिशा में शोध कार्य व तकनीकियों पर कार्य किए जाएंगे। जिन्हें देशभर में किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इस सहयोग में वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी जैसे शोध निष्कर्ष, लवणीय मृदा डेटा और कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा।
सिंजेंटा इंडिया के प्रमुख (फसल सुरक्षा विकास) विनोद शिवरेन ने कहा कि सिंजेंटा तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय सहायता और विशेष तकनीकों के साथ सहयोग करेगा, जबकि सीएसएसआरआई अनुसंधान सुविधाएं, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और परीक्षणों को समर्थन प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सिंजेंटा द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षुओं को प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के साथ काम करने और मृदा स्वास्थ्य व लवणता प्रबंधन में अपने कौशल को निखारने के अवसर भी मिलेंगे।
एमओयू की शर्तों के अनुसार मिट्टी लवणता प्रबंधन, फसल संरक्षण, और स्थायी कृषि के क्षेत्रों में किसानों, शोधकर्ताओं तथा इससे जुड़े लोगों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। संचालन डॉ. गजेंद्र यादव ने किया। मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कमार राय, डॉ. सतेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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- स्थायी कृषि पद्धतियों को विकसित किया जाएगा, देशभर में की जाएगी खराब मिट्टी-पानी की पहचान
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच लवण प्रभावित मिट्टी वाले और ऊसर क्षेत्रों में कैसे फसलें लहलहाएं और खराब पानी का क्या और कैसे उपयोग किया जाए, इस पर शोध कार्यों के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और स्थायित्व के लिए केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) और सिंजेंटा इंडिया के बीच एक एमओयू साइन किया गया है। जिस पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करके वहां की मिट्टी और पानी के सुधार और वहां के लिए नई किस्मों सहित विभिन्न स्तर पर व्यवस्थागत तैयारी की जाएगी। आधुनिक कृषि का टिकाऊ और किसानों की समृद्धि का मॉडल बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
जिसका फायदा आने वाले समय में किसानों को तो मिलेगा, साथ ही देश को अतिरिक्त खाद्यान्न भी मिल सकेगा। इस एमओयू के तहत सीएसएसआरआई के मृदा प्रबंधन के शोध अनुभव और सिंजेंटा के नवाचारी कृषि समाधान व्यवस्था की साझेदारी होगी। दोनों की साझेदारी किसानों को ऐसी पद्धतियां अपनाने में सहायता करेगी, जो फसल उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थायित्व सुनिश्चित करेगी।
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सिंजेंटा इंडिया के कंट्री हेड एवं प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि हम जलवायु परिवर्तन, भूमि कटाव और जैव विविधता की हानि जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचारों को अपना आधार बनाकर काम कर रहे हैं। हमारे संयुक्त प्रयासों से हम कृषि को टिकाऊ और किसानों की समृद्धि का मॉडल बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि सीएसएसआरआई, देश के विभिन्न कृषि-पर्यावरणीय क्षेत्रों में लवणता और क्षारीयता प्रबंधन एवं कम गुणवत्ता वाले सिंचाई जल के उपयोग पर बहुआयामी शोध कार्य कर रहा है। जिसका फायदा सीधे किसानों को मिलेगा।
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सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ आरके यादव ने कहा कि हम सिंजेंटा इंडिया के साथ मिलकर लवणग्रस्त मिट्टी प्रबंधन और स्थायी कृषि पद्धतियों के माध्यम से फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए संयुक्त शोध एवं विकास परियोजनाएं चलाएंगे। सबसे पहले इसका अध्ययन किया जाएगा कि क्या मुख्य चुनौतियां हैं, उन्हें क्षेत्र क्या क्या है, उनका समाधान क्या हो सकता है, उसी दिशा में शोध कार्य व तकनीकियों पर कार्य किए जाएंगे। जिन्हें देशभर में किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इस सहयोग में वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी जैसे शोध निष्कर्ष, लवणीय मृदा डेटा और कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा।
सिंजेंटा इंडिया के प्रमुख (फसल सुरक्षा विकास) विनोद शिवरेन ने कहा कि सिंजेंटा तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय सहायता और विशेष तकनीकों के साथ सहयोग करेगा, जबकि सीएसएसआरआई अनुसंधान सुविधाएं, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और परीक्षणों को समर्थन प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सिंजेंटा द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षुओं को प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के साथ काम करने और मृदा स्वास्थ्य व लवणता प्रबंधन में अपने कौशल को निखारने के अवसर भी मिलेंगे।
एमओयू की शर्तों के अनुसार मिट्टी लवणता प्रबंधन, फसल संरक्षण, और स्थायी कृषि के क्षेत्रों में किसानों, शोधकर्ताओं तथा इससे जुड़े लोगों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। संचालन डॉ. गजेंद्र यादव ने किया। मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कमार राय, डॉ. सतेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।