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प्रभु का नाम सुमिरन करना यज्ञ के समान : राधे
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संवाद न्यूज एजेंसी
निसिंग। गांव अमुपूर माजरा स्थित श्री राधा कृष्ण आदर्श गोशाला में आयोजित श्रीमद्धभागवत कथा में प्रवचन करते हुए राधे प्रिया ने कहा कि कलयुग में भगवान का नाम सुमिरन करना ही यज्ञ के समान है। श्रीमद्भागवत के चतु श्लोकों में सम्पूर्ण भागवत के सभी बावन अध्यायों का सार छिपा हुआ है। जिनके चारों श्लोकों को सुनने मात्र से जन-मानस को समस्त भागवत कथा का पुनः ज्ञान प्राप्त हो जाता है। भागवत कथा का मूल मंत्र सदाचार है।
कलयुग में नाम संकीर्तन और प्रभु महिमा का महत्व इस बात पर जोर देता है कि भगवान का नाम जप और कथा श्रवण करने से जीवन सफल होता है, वहीं मोक्ष प्राप्त होता है। उन्होंने कथा के मध्य श्रद्धालुओं को हे गोविंद रखो शरण, अब तो जीवन हारे के भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायक हैं तथा आत्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाती है।
इसलिए श्री भागवत पुराण को मुक्ति ग्रंथ कहा गया है। इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए हर जन-मानस को कथा आयोजन करवाते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से रोग-दोष, पारिवारिक अशांति दूर करने सहित समृद्धि तथा खुशहाली के लिए इसका आयोजन किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है। आत्मा को अपने स्वयं की अनुभूति से जोड़ता है। सांसारिक दुख, लोभ-मोह- क्षुधा जैसी तमाम प्रकार की भावनाओं के बंधन से मुक्त करते हुए नश्वर ईश्वर तथा उसी का एक अंश आत्मा से साक्षात्कार कराता है। कथा का आयोजन गौशाला संचालक गोपाल गो स्वामी व गौशाला प्रधान प्रवीन गर्ग की अध्यक्षता में किया जा रहा है।
जिसमें मंच संचालन पूर्व प्रधान रामकुमार गर्ग ने किया। गौशाला में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं।
इस मौके पर उपप्रधान मेवा सिंह,जगदीश राणा, जसविंद्र सिंह, गुलाब सिंह, राजू, विष्णु, राकेश वर्मा, किशन चंद, हंसराज मिगलानी, जयपाल शर्मा, बाबू राम, सत्यनारायण शर्मा के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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निसिंग। गांव अमुपूर माजरा स्थित श्री राधा कृष्ण आदर्श गोशाला में आयोजित श्रीमद्धभागवत कथा में प्रवचन करते हुए राधे प्रिया ने कहा कि कलयुग में भगवान का नाम सुमिरन करना ही यज्ञ के समान है। श्रीमद्भागवत के चतु श्लोकों में सम्पूर्ण भागवत के सभी बावन अध्यायों का सार छिपा हुआ है। जिनके चारों श्लोकों को सुनने मात्र से जन-मानस को समस्त भागवत कथा का पुनः ज्ञान प्राप्त हो जाता है। भागवत कथा का मूल मंत्र सदाचार है।
कलयुग में नाम संकीर्तन और प्रभु महिमा का महत्व इस बात पर जोर देता है कि भगवान का नाम जप और कथा श्रवण करने से जीवन सफल होता है, वहीं मोक्ष प्राप्त होता है। उन्होंने कथा के मध्य श्रद्धालुओं को हे गोविंद रखो शरण, अब तो जीवन हारे के भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायक हैं तथा आत्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाती है।
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इसलिए श्री भागवत पुराण को मुक्ति ग्रंथ कहा गया है। इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए हर जन-मानस को कथा आयोजन करवाते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से रोग-दोष, पारिवारिक अशांति दूर करने सहित समृद्धि तथा खुशहाली के लिए इसका आयोजन किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है। आत्मा को अपने स्वयं की अनुभूति से जोड़ता है। सांसारिक दुख, लोभ-मोह- क्षुधा जैसी तमाम प्रकार की भावनाओं के बंधन से मुक्त करते हुए नश्वर ईश्वर तथा उसी का एक अंश आत्मा से साक्षात्कार कराता है। कथा का आयोजन गौशाला संचालक गोपाल गो स्वामी व गौशाला प्रधान प्रवीन गर्ग की अध्यक्षता में किया जा रहा है।
जिसमें मंच संचालन पूर्व प्रधान रामकुमार गर्ग ने किया। गौशाला में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं।
इस मौके पर उपप्रधान मेवा सिंह,जगदीश राणा, जसविंद्र सिंह, गुलाब सिंह, राजू, विष्णु, राकेश वर्मा, किशन चंद, हंसराज मिगलानी, जयपाल शर्मा, बाबू राम, सत्यनारायण शर्मा के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।