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Karnal News: बैंक की गलती का खामियाजा भुगत रहे किसान को राहत, बैंक लौटाएगा 1,28,561 रुपये

Sat, 21 Mar 2026 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 21 Mar 2026 01:53 AM IST
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Relief for farmer bearing the brunt of bank's mistake, bank to refund Rs 1,28,561
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बैंक की लापरवाही के कारण किसान पर थोपे गए ब्याज को अनुचित ठहराया है। आयोग ने द करनाल सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक को आदेश दिया है कि वह किसान से जबरन वसूले गए 1,28,561 रुपये की राशि वापस करे।
जलमाना गांव निवासी किसान वजीर सिंह का करनाल सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में खाता है, जिसकी ऋण सीमा 4.20 लाख रुपये है। 6 जून, 2023 को उन्होंने अपने पंजाब एंड सिंध बैंक के खाते में 4.20 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए एक चेक दिया था। बैंक अधिकारी की गलती से उनके खाते में 4.20 लाख की जगह 42 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। सितंबर, 2023 में जब किसान ने पासबुक की एंट्री करवाई, तब उसे इस भारी-भरकम राशि के बारे में पता लगा। बैंक अधिकारी ने किसान से खुद की नौकरी जाने का हवाला देकर विनती की, जिस पर किसान ने 2 सितंबर, 2023 को पूरी राशि वापस बैंक को लौटा दी।
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इधर बैंक ने किसान से 6 जून से 2 सितंबर तक की अवधि के लिए 42 लाख रुपये पर 1,28,560 रुपये ब्याज की मांग की। बैंक ने किसान को डराया कि यदि ब्याज नहीं दिया तो उसका सिबिल स्कोर खराब कर दिया जाएगा और भविष्य में ऋण नहीं मिलेगा। दबाव में आकर किसान ने एक दिसंबर, 2023 को यह राशि जमा कर दी और न्याय के लिए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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आयोग ने पाया कि किसान ने कभी भी 42 लाख रुपये की मांग नहीं की थी और न ही उस रुपये का इस्तेमाल किया। अदालत ने बैंक को निर्देश दिया कि वह वसूला गया ब्याज 45 दिनों के भीतर वापस करे। क्योंकि रुपये किसान के बचत खाते में रहा था, इसलिए कोर्ट ने अलग से मुआवजे या मुकदमेबाजी खर्च की मांग को स्वीकार नहीं किया।


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बैंक की दलील सर्वर डाउन रहा, राशि का नहीं लगा पता

बैंक ने अदालत में तर्क दिया कि सर्वर डाउन होने के कारण वे समय पर गलती नहीं पकड़ पाए और किसान ने इस राशि का लाभ उठाया। हालांकि जसवंत सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि यह मानना असंभव है कि जून से अगस्त तक बैंक का सर्वर लगातार डाउन था । कोर्ट ने इसे बैंक की बड़ी भूल और सेवा में कोताही करार दिया।
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