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Karnal News: आरसी न देने पर टीवीएस डीलर पर 31 हजार जुर्माना
Tue, 16 Dec 2025 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 16 Dec 2025 02:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने टीवीएस डीलर पर 31 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने डीलर को आदेश दिया कि वो या तो ग्राहक को वाहन की आरसी उपलब्ध कराए या फिर वाहन की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाए।
बाल रांगडान निवासी शिकायतकर्ता मुल्तान सिंह ने बताया कि उन्होंने 2019 में मेसर्स ग्रीन मोटर्स (अब न्यू ग्रीन टीवीएस) से एक टीवीएस मोपेड एक्सएल खरीदी थी। वाहन की कुल कीमत 47 हजार रुपये थी। इसमें वाहन की लागत, बीमा और चार हजार 191 रुपये आरसी शुल्क शामिल था। डीलर ने पंजीकरण के पैसे लेने के बावजूद न तो वाहन का पंजीकरण कराया और न ही उन्हें आरसी दी। आरसी न होने के कारण वह वाहन को सड़क पर चलाने में असमर्थ थे।
मामले में टीवीएस डीलर ने तर्क दिया कि उनके मैनेजर अश्विनी कुमार और गौरव ने ग्राहक से पैसे लिए थे, लेकिन कंपनी में जमा नहीं करवाए, उन्होंने कंपनी के साथ धोखाधड़ी की है। डीलर ने कहा कि इसके लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने डीलर की दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि मालिक अपने कर्मचारी की ओर से किए कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है, भले ही कर्मचारी ने धोखाधड़ी क्यों न की हो। क्योंकि ग्राहक ने डीलर के प्रतिनिधि को भुगतान किया था, इसलिए डीलर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
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जिला उपभोक्ता आयोग ने मैसर्स ग्रीन मोटर्स को आदेश दिए कि उन्हें उपभोक्ता को 45 दिनों के भीतर वाहन का पंजीकरण करवाकर ग्राहक को आरसी देनी होगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए ग्राहक को 20 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का भुगतान करें। वहीं अगर 45 दिनों में डीलर को आरसी दी तो ग्राहक से वाहन वापस लेकर ग्राहक को 47 हजार रुपये वापस लौटाने होंगे।
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने टीवीएस डीलर पर 31 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने डीलर को आदेश दिया कि वो या तो ग्राहक को वाहन की आरसी उपलब्ध कराए या फिर वाहन की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाए।
बाल रांगडान निवासी शिकायतकर्ता मुल्तान सिंह ने बताया कि उन्होंने 2019 में मेसर्स ग्रीन मोटर्स (अब न्यू ग्रीन टीवीएस) से एक टीवीएस मोपेड एक्सएल खरीदी थी। वाहन की कुल कीमत 47 हजार रुपये थी। इसमें वाहन की लागत, बीमा और चार हजार 191 रुपये आरसी शुल्क शामिल था। डीलर ने पंजीकरण के पैसे लेने के बावजूद न तो वाहन का पंजीकरण कराया और न ही उन्हें आरसी दी। आरसी न होने के कारण वह वाहन को सड़क पर चलाने में असमर्थ थे।
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मामले में टीवीएस डीलर ने तर्क दिया कि उनके मैनेजर अश्विनी कुमार और गौरव ने ग्राहक से पैसे लिए थे, लेकिन कंपनी में जमा नहीं करवाए, उन्होंने कंपनी के साथ धोखाधड़ी की है। डीलर ने कहा कि इसके लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने डीलर की दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि मालिक अपने कर्मचारी की ओर से किए कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है, भले ही कर्मचारी ने धोखाधड़ी क्यों न की हो। क्योंकि ग्राहक ने डीलर के प्रतिनिधि को भुगतान किया था, इसलिए डीलर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
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जिला उपभोक्ता आयोग ने मैसर्स ग्रीन मोटर्स को आदेश दिए कि उन्हें उपभोक्ता को 45 दिनों के भीतर वाहन का पंजीकरण करवाकर ग्राहक को आरसी देनी होगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए ग्राहक को 20 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का भुगतान करें। वहीं अगर 45 दिनों में डीलर को आरसी दी तो ग्राहक से वाहन वापस लेकर ग्राहक को 47 हजार रुपये वापस लौटाने होंगे।