{"_id":"672e7ef3a71bb0720d025157","slug":"rakesh-became-a-badminton-coach-after-overcoming-his-disability-karnal-news-c-18-knl1008-515314-2024-11-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: दिव्यांगता को मात देकर राकेश बने बैडमिंटन प्रशिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: दिव्यांगता को मात देकर राकेश बने बैडमिंटन प्रशिक्षक
Sat, 09 Nov 2024 02:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 09 Nov 2024 02:43 AM IST
विज्ञापन
सुखदेव चौहान
करनाल। खेल विभाग में बतौर जूनियर कोच भर्ती हुए राकेश पांडेय दिव्यांगता को मात देकर बैडमिंटन प्रशिक्षक बन गए हैं। वह जिले के खिलाड़ियों को नौ साल से अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देकर उनका भविष्य संवार रहे है। उनके सिखाए दो खिलाड़ी पैरा बैडमिंटन में वर्ल्ड नंबर एक की श्रेणी में आते है।
उनके साथ बैडमिंटन का अभ्यास करके नीतीश कुमार ने इस बार पेरिस में आयोजित पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं उनके सहयोगी तरुण ढिल्लन भी राकेश पांडेय से ही प्रशिक्षण लेते है। उन्होंने इस वर्ष चीन में आयोजित एशियाड में स्वर्ण पदक जीता है, वह खेल में भीम अवार्डी है। उनके सिखाए हुए जूनियर वर्ग के खिलाड़ी भी विभिन्न प्रतियोगिताओं में जिले का नाम रोशन कर रहे हे।
बेहतर खिलाड़ियों में गौतम, रियांश, चिराग, अनिरुद्ध व अन्नया विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक पाकर नाम चमका रहे है। अब वह खेल विभाग में बतौर खेल उपनिदेशक सेवाएं दे रहे है। राकेश पांडेय ने बताया कि उन्होंने 1995 में स्कूल समय से ही बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। उनके खेल करियर में उनके बड़े भाई योगेश पांडेय व राजेश पांडेय का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बचपन से ही दाहिने हाथ से 70 प्रतिशत ऑर्थो दिव्यांग होने पर भी उन्होंने निरंतर खेल जारी रखा।
विज्ञापन
धीरे-धीरे वह इतने परिपक्व हो गए कि एक हाथ से भी बेहतर बैडमिंटन खेलने लगे। उन्होंने 2005 में पैरा बैडमिंटन खेलना शुरू किया। कड़ी मेहनत व रोजाना के बेहतर अभ्यास से वह इस काबिल बने कि खिलाड़ियों को हर दाव-पेंच सिखाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर है। राकेश पांडेय अपने खिलाड़ियों को सुबह व शाम को बेहतर प्रशिक्षण दे रहे है।
वह सुबह चार बजे से साढ़े आठ बजे तक तथा ढाई से सात बजे तक प्रशिक्षण दे रहे है। खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने के लिए वह सुबह तीन बजे ही उठ जाते है। वह साढ़े तीन बजे मैदान में पहुंचकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए खुद वॉर्मअप होते है। दिन में आराम करने बाद शाम का सत्र ढाई बजे से ही शुरू हो जाता है, जो शाम को सात बजे तक चलता है। संवाद
ये हैं उपलब्धियां
बैडमिंटन की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में दो स्वर्ण, छह रजत व आठ कांस्य पदक जीते। राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 19 स्वर्ण, पांच रजत व दो कांस्य पदक हासिल किए। 2017 में खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने पर भीम अवार्ड मिला। 2014 में पैरा एशियन बैडमिंटन में रजत पदक जीता। 2009 में बीडब्ल्यूएफ पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया।
विज्ञापन
करनाल। खेल विभाग में बतौर जूनियर कोच भर्ती हुए राकेश पांडेय दिव्यांगता को मात देकर बैडमिंटन प्रशिक्षक बन गए हैं। वह जिले के खिलाड़ियों को नौ साल से अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देकर उनका भविष्य संवार रहे है। उनके सिखाए दो खिलाड़ी पैरा बैडमिंटन में वर्ल्ड नंबर एक की श्रेणी में आते है।
उनके साथ बैडमिंटन का अभ्यास करके नीतीश कुमार ने इस बार पेरिस में आयोजित पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं उनके सहयोगी तरुण ढिल्लन भी राकेश पांडेय से ही प्रशिक्षण लेते है। उन्होंने इस वर्ष चीन में आयोजित एशियाड में स्वर्ण पदक जीता है, वह खेल में भीम अवार्डी है। उनके सिखाए हुए जूनियर वर्ग के खिलाड़ी भी विभिन्न प्रतियोगिताओं में जिले का नाम रोशन कर रहे हे।
विज्ञापन
बेहतर खिलाड़ियों में गौतम, रियांश, चिराग, अनिरुद्ध व अन्नया विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक पाकर नाम चमका रहे है। अब वह खेल विभाग में बतौर खेल उपनिदेशक सेवाएं दे रहे है। राकेश पांडेय ने बताया कि उन्होंने 1995 में स्कूल समय से ही बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। उनके खेल करियर में उनके बड़े भाई योगेश पांडेय व राजेश पांडेय का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बचपन से ही दाहिने हाथ से 70 प्रतिशत ऑर्थो दिव्यांग होने पर भी उन्होंने निरंतर खेल जारी रखा।
विज्ञापन
धीरे-धीरे वह इतने परिपक्व हो गए कि एक हाथ से भी बेहतर बैडमिंटन खेलने लगे। उन्होंने 2005 में पैरा बैडमिंटन खेलना शुरू किया। कड़ी मेहनत व रोजाना के बेहतर अभ्यास से वह इस काबिल बने कि खिलाड़ियों को हर दाव-पेंच सिखाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर है। राकेश पांडेय अपने खिलाड़ियों को सुबह व शाम को बेहतर प्रशिक्षण दे रहे है।
वह सुबह चार बजे से साढ़े आठ बजे तक तथा ढाई से सात बजे तक प्रशिक्षण दे रहे है। खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने के लिए वह सुबह तीन बजे ही उठ जाते है। वह साढ़े तीन बजे मैदान में पहुंचकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए खुद वॉर्मअप होते है। दिन में आराम करने बाद शाम का सत्र ढाई बजे से ही शुरू हो जाता है, जो शाम को सात बजे तक चलता है। संवाद
ये हैं उपलब्धियां
बैडमिंटन की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में दो स्वर्ण, छह रजत व आठ कांस्य पदक जीते। राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 19 स्वर्ण, पांच रजत व दो कांस्य पदक हासिल किए। 2017 में खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने पर भीम अवार्ड मिला। 2014 में पैरा एशियन बैडमिंटन में रजत पदक जीता। 2009 में बीडब्ल्यूएफ पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया।