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Karnal News: राजवंती ने निखारा हुनर, 20 हजार महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

Mon, 17 Nov 2025 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Mon, 17 Nov 2025 01:53 AM IST
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Rajwanti honed her skills, 20,000 women became self-reliant.
करनाल। ग्रामीण भारत की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कभी चहारदीवारी तक सिमटी रहने वाली महिलाएं आज ड्योढ़ी से बाहर निकल रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से घरों की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं। इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण चिड़ाव गांव की राजवंती हैं। वह खुद के व्यवसाय के साथ अन्य महिलाओं के हुनर को भी निखार रही हैं। उनकी प्रशिक्षित 20 हजार महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
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राजवंती 14 साल से स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम कर रही हैं। अचार-पापड़ और जेवरात निर्माण का उनका सफल व्यवसाय है। उनके साथ अन्य महिलाएं भी काम करती हैं। राजवती ने बताया कि जब उन्होंने इस सफर की शुरुआत की थी, तब उनके पास न संसाधन थे, न कोई बड़ा मंच। लेकिन सीखने की चाह और कुछ कर गुजरने की लगन ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। पहले स्वयं को सशक्त बनाया। बाद में अन्य ग्रामीण महिलाओं को सिखाया।
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राजवंती वर्तमान में 15 स्वयं सहायता समूह की सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उनके समूह में हर महिला अपनी प्रतिभा के अनुसार अलग-अलग काम करती हैं। कोई जेवरात बनाती है तो कोई जूट के बैग और अन्य घरेलू उत्पाद। महिलाओं के बनाए उत्पाद शहर के बाजारों, मेलों और प्रदर्शनियों में खूब पसंद किए जा रहे हैं।
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दूसरे राज्यों में भी महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
राजवंती का काम सिर्फ अपने गांव या समूह तक सीमित नहीं है। बीते वर्षों में वह हिसार, कटरा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंचकूला जैसे कई इलाकों में जाकर महिलाओं को आभूषण निर्माण का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। अब तक लगभग 20 हजार महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। इनमें से बड़ी संख्या में महिलाएं आज स्वयं का रोजगार स्थापित कर चुकी हैं। राजवंती ने बताया कि वह पिछले तीन साल से महिला कैदियों को जेवरात, आचार-पापड़ और खाना बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। महिला कैदियों को बेकरी से जुड़े उत्पाद और फास्ट फूड बनाने का प्रशिक्षण भी दिया है।



समूह की हर महिला कमा रही 15 हजार तक
राजवंती ने बताया कि उन्होंने 14 साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आचार-पापड़ बनाना शुरू किया था। मेलों में अपने उत्पाद बेचती थीं। वर्ष 2017 में पहली बार डेढ़ लाख रुपये की कमाई हुई। इस सफलता से आत्मविश्वास बढ़ा। जेवरात बनाना सीखा। यही प्रशिक्षण आज हजारों महिलाओं के जीवन में बदलाव ला रहा है। समूह की महिलाएं हर माह 10 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं।
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