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23 नवंबर से पहले हुई रजिस्ट्री होंगी कैसिंल
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एनडीसी पोर्टल हैक कर फर्जी तरीके से अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने के मामले में हरियाणा सरकार ने संज्ञान लिया है। ऐसा मामला करनाल में ही नहीं राज्य के अन्य नगरीय क्षेत्रों में भी हो सकता है। दूसरी तरफ नगर निगम ने पोर्टल में बदलाव से पहले यानी 23 नवंबर से पहले जारी की गई अस्थायी संपत्ति आईडी व उन पर हुई रजिस्ट्रियों की जांच कराने के लिए भी लिखा है। यदि ऐसा होता है तो बड़ी संख्या में फर्जी संपत्ति आईडी के मामले प्रकाश में आ सकते हैं। इधर, तहसील कार्यालय ने फर्जी आईडी पर रजिस्ट्रियों को खंगालना शुरू कर दिया गया है। नगर निगम के साथ पुलिस ने भी रजिस्ट्री की जानकारी मांगी की है।
नगर निगम कमिश्नर विक्रम ने अवैध कालोनियों में लगातार हो रही जमीनों की रजिस्ट्री को देखते हुए फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी होने की जांच के आदेश तो 29 जनवरी को दिए थे। संयुक्त आयुक्त ने इसकी जांच रिपोर्ट 12 फरवरी को सौंपी। जिसमें 209 अस्थायी संपत्ति आईडी फर्जी मिलीं लेकिन इस जांच में सिर्फ 23 नवंबर-2020 के बाद जारी की गईं अस्थायी संपत्ति आईडी हैं। 23 नवंबर को ही हरियाणा सरकार ने निगमायुक्त विक्रम के सुझावों पर एनडीसी पोर्टल में बदलाव कर अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करते समय निगम अधिकारियों से अनुमोदन लेना अनिवार्य कर दिया था।
यह उठ रहा सवाल
सवाल है कि जब बदलाव के बाद पोर्टल हैक कर अनुमोदन देने वाले अधिकारियों के फोन नंबरों के स्थान पर हैकर्स ने अपने फोन नंबरों को फीड करा आईडी जारी की तो बिना अनुमोदन की अनिवार्यता के समय कितनी फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी की गई होंगी। इसलिए नगर निगम आयुक्त ने सरकार को 23 नवंबर से पहले हुई रजिस्ट्रियों की जांच कराने को भी लिखा है। साथ ही निगम अधिकारियों को भी अस्थायी संपत्ति आईडी की जांच के निर्देश दिए हैं।
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रजिस्ट्री खंगालने में जुटा राजस्व महकमा
-पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नो ड्यूज सर्टिफिकेट पोर्टल हैक कर फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने के गोरखधंधे की जांच शुरू कर दी है। तहसील कार्यालय से भी रजिस्ट्री संबंधी जानकारी मांगी है। तहसीलदार राजबख्श ने बताया कि निगम द्वारा जो आईडी दी गई हैं, उन पर रजिस्ट्री खंगाली जा रही हैं। शीघ्र इसकी जानकारी निगम व पुलिस को उपलब्ध करा दी जाएगी।
भवन तो तोड़े जाते हैं, नहीं होती कालोनाइजर्स पर कार्रवाई
अवैध कालोनियों में जो लोग प्लाट खरीदकर मकान बनवाते हैं, उनके भवन तो तोड़ दिए जाते हैं। लेकिन उन कालोनाइजर्स पर कार्रवाई नहीं हो पाती जो इन अनाधिकृत कालोनियों में लोगों को सस्ते और सुलभ बताकर प्लाट बेचते हैं। जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विक्रम कुमार के अनुसार पिछले एक साल में 14 कालोनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर की जा चुकी है। सवाल है कि इन कालोनियों में भवनों को तत्काल तोड़कर भवन स्वामियों को तो नुकसान पहुंचा दिया लेकिन कालोनियों को बसाकर मोटा मुनाफा कमाने वाले किसी भी कालोनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस इन रसूखदार धनाड्यों पर हाथ डालने से बच रही है।
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नगर निगम कमिश्नर विक्रम ने अवैध कालोनियों में लगातार हो रही जमीनों की रजिस्ट्री को देखते हुए फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी होने की जांच के आदेश तो 29 जनवरी को दिए थे। संयुक्त आयुक्त ने इसकी जांच रिपोर्ट 12 फरवरी को सौंपी। जिसमें 209 अस्थायी संपत्ति आईडी फर्जी मिलीं लेकिन इस जांच में सिर्फ 23 नवंबर-2020 के बाद जारी की गईं अस्थायी संपत्ति आईडी हैं। 23 नवंबर को ही हरियाणा सरकार ने निगमायुक्त विक्रम के सुझावों पर एनडीसी पोर्टल में बदलाव कर अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करते समय निगम अधिकारियों से अनुमोदन लेना अनिवार्य कर दिया था।
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यह उठ रहा सवाल
सवाल है कि जब बदलाव के बाद पोर्टल हैक कर अनुमोदन देने वाले अधिकारियों के फोन नंबरों के स्थान पर हैकर्स ने अपने फोन नंबरों को फीड करा आईडी जारी की तो बिना अनुमोदन की अनिवार्यता के समय कितनी फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी की गई होंगी। इसलिए नगर निगम आयुक्त ने सरकार को 23 नवंबर से पहले हुई रजिस्ट्रियों की जांच कराने को भी लिखा है। साथ ही निगम अधिकारियों को भी अस्थायी संपत्ति आईडी की जांच के निर्देश दिए हैं।
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रजिस्ट्री खंगालने में जुटा राजस्व महकमा
-पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नो ड्यूज सर्टिफिकेट पोर्टल हैक कर फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने के गोरखधंधे की जांच शुरू कर दी है। तहसील कार्यालय से भी रजिस्ट्री संबंधी जानकारी मांगी है। तहसीलदार राजबख्श ने बताया कि निगम द्वारा जो आईडी दी गई हैं, उन पर रजिस्ट्री खंगाली जा रही हैं। शीघ्र इसकी जानकारी निगम व पुलिस को उपलब्ध करा दी जाएगी।
भवन तो तोड़े जाते हैं, नहीं होती कालोनाइजर्स पर कार्रवाई
अवैध कालोनियों में जो लोग प्लाट खरीदकर मकान बनवाते हैं, उनके भवन तो तोड़ दिए जाते हैं। लेकिन उन कालोनाइजर्स पर कार्रवाई नहीं हो पाती जो इन अनाधिकृत कालोनियों में लोगों को सस्ते और सुलभ बताकर प्लाट बेचते हैं। जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विक्रम कुमार के अनुसार पिछले एक साल में 14 कालोनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर की जा चुकी है। सवाल है कि इन कालोनियों में भवनों को तत्काल तोड़कर भवन स्वामियों को तो नुकसान पहुंचा दिया लेकिन कालोनियों को बसाकर मोटा मुनाफा कमाने वाले किसी भी कालोनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस इन रसूखदार धनाड्यों पर हाथ डालने से बच रही है।