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Karnal News: इटली और अमेरिका में विराजे रामगली के राधा-कन्हा
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कुशाग्र मिश्रा
करनाल। शहर की रामगली के कान्हा सात समुंदर पार भी पहुंच गए हैं। अपनी मनमोहक आंखों, सुंदर शृंगार और बाल रूप के भोलेपन की वजह से रामगली के कान्हा विदेशों में प्रसिद्धि पा रहे हैं। इटली और अमेरिका में रहने वाले भारतीय यहां के कान्हा के लिए अपने घर में विशेष मंदिर बनवा रहे हैं, जहां विधि विधान के साथ उनकी मूर्ति को स्थापित कर रहे हैं। विदेशों में ही नहीं देश में भी रामगली के कान्हा की मांग बढ़ती जा रही है।
रामगली स्थित कान्हा के पार्लर में भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पीतल की मूर्तियों का शृंगार किया जाता है। पार्लर के संचालक एवं कृष्ण भक्त संजीव सोनी वर्मा बताते हैं कि यह सब कुछ वक्त पहले शुरू हुआ, जब अमेरिका में रहने वाला भारतीय परिवार उनके सोशल मीडिया पर कान्हा की मूर्तियों का शृंगार देखने के बाद करनाल आया और उनके यहां से लड्डू गोपाल की 21 इंच ऊंची पीतल की मूर्ति साथ ले गया। जिसके बाद इनकी मांग बढ़ती गई। फिर अमेरिका में कई लड्डू गोपाल की मूर्तियां गईं। हाल ही में मूलरूप से अंबाला का रहने वाला परिवार, जो अब इटली में रहता है, कन्हा की दो मूर्तियों का शृंगार कराकर लेकर गया है।
गुजरात, राजस्थान और दिल्ली आदि राज्यों में मांग
देश में भी रामगली के कान्हा की मांग बढ़ रही है। गुजरात, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान और दिल्ली के परिवार भी करनाल आते हैं। खोजते हुए रामगली पहुंचते हैं और भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की मूर्ति लेकर जाते हैं। इन पीतल की मूर्तियों की खासियत इनका शृंगार है, जो कृष्ण भक्तों काे लुभा रहा है। अन्य राज्यों के ज्यादातर लोग सोशल मीडिया के जरिए करनाल पहुंचते हैं और मूर्ति लेकर जाते हैं।
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जन्माष्टमी के लिए ऑर्डर आने शुरू, चल रही वेटिंग
रामगली के कन्हा को लेने के लिए इस वक्त वेटिंग चल रही है, क्योंकि जन्माष्टमी में कुछ ही महीने शेष हैं। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की मूर्तियों के ऑर्डर आने लगे हैं। एक मूर्ति के लिए 10 से 12 दिन की वेटिंग चल रही है।
रोज लगाते हैं भोग
कृष्ण भक्त संजीव सोनी वर्मा बताते हैं कि कान्हा का शृंगार पूरा होने के बाद अगर उन्हें लेने के लिए आने वाले देरी करते हैं तो उन्हें रोज भोग लगाने की जिम्मेदारी उनकी होती है। जितने दिन कान्हा उनके पास रहेंगे, भोग लगाया जाएगा।
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करनाल। शहर की रामगली के कान्हा सात समुंदर पार भी पहुंच गए हैं। अपनी मनमोहक आंखों, सुंदर शृंगार और बाल रूप के भोलेपन की वजह से रामगली के कान्हा विदेशों में प्रसिद्धि पा रहे हैं। इटली और अमेरिका में रहने वाले भारतीय यहां के कान्हा के लिए अपने घर में विशेष मंदिर बनवा रहे हैं, जहां विधि विधान के साथ उनकी मूर्ति को स्थापित कर रहे हैं। विदेशों में ही नहीं देश में भी रामगली के कान्हा की मांग बढ़ती जा रही है।
रामगली स्थित कान्हा के पार्लर में भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पीतल की मूर्तियों का शृंगार किया जाता है। पार्लर के संचालक एवं कृष्ण भक्त संजीव सोनी वर्मा बताते हैं कि यह सब कुछ वक्त पहले शुरू हुआ, जब अमेरिका में रहने वाला भारतीय परिवार उनके सोशल मीडिया पर कान्हा की मूर्तियों का शृंगार देखने के बाद करनाल आया और उनके यहां से लड्डू गोपाल की 21 इंच ऊंची पीतल की मूर्ति साथ ले गया। जिसके बाद इनकी मांग बढ़ती गई। फिर अमेरिका में कई लड्डू गोपाल की मूर्तियां गईं। हाल ही में मूलरूप से अंबाला का रहने वाला परिवार, जो अब इटली में रहता है, कन्हा की दो मूर्तियों का शृंगार कराकर लेकर गया है।
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गुजरात, राजस्थान और दिल्ली आदि राज्यों में मांग
देश में भी रामगली के कान्हा की मांग बढ़ रही है। गुजरात, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान और दिल्ली के परिवार भी करनाल आते हैं। खोजते हुए रामगली पहुंचते हैं और भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की मूर्ति लेकर जाते हैं। इन पीतल की मूर्तियों की खासियत इनका शृंगार है, जो कृष्ण भक्तों काे लुभा रहा है। अन्य राज्यों के ज्यादातर लोग सोशल मीडिया के जरिए करनाल पहुंचते हैं और मूर्ति लेकर जाते हैं।
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जन्माष्टमी के लिए ऑर्डर आने शुरू, चल रही वेटिंग
रामगली के कन्हा को लेने के लिए इस वक्त वेटिंग चल रही है, क्योंकि जन्माष्टमी में कुछ ही महीने शेष हैं। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की मूर्तियों के ऑर्डर आने लगे हैं। एक मूर्ति के लिए 10 से 12 दिन की वेटिंग चल रही है।
रोज लगाते हैं भोग
कृष्ण भक्त संजीव सोनी वर्मा बताते हैं कि कान्हा का शृंगार पूरा होने के बाद अगर उन्हें लेने के लिए आने वाले देरी करते हैं तो उन्हें रोज भोग लगाने की जिम्मेदारी उनकी होती है। जितने दिन कान्हा उनके पास रहेंगे, भोग लगाया जाएगा।