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Karnal News: नाभिकीय प्रजनक बीज की शुद्धता बेहतर पैदावार के लिए अहम
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- आईएआरआई क्षेत्रीय स्टेशन में शुरू हुई भारत-जापान द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय स्टेशन करनाल में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। ये कार्यशाला भारत-जर्मनी के द्विपक्षीय सहयोग पर चल रही परियोजना पर आधारित है। जिसमें उत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों, कृभको और प्राइवेट सेक्टर के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों को नाभिकीय एवं प्रजनक बीज की पैदावार को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें खासतौर पर गेहूं, जौ और सरसों के शुद्ध बीज की पैदावार पर फोकस रहेगा। इसमें जर्मनी के वैज्ञानिक भी अपनी तकनीक को साझा करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के निदेशक डॉ. आरके यादव ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि ने लवणीय और क्षारीय मिट्टी वाले क्षेत्र में बेहतर बीज उत्पादन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत में लवण एवं क्षारीयता प्रभावित जल का मानचित्र तैयार कर लिया है, शीघ्र ही खराब मिट्टी का भी मानचित्र जारी किया जाएगा।
मुख्य अतिथि का स्वागत करने के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय स्टेशन करनाल के अध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. शिव कुमार यादव ने कहा कि भारतीय कृषि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारतीय राज्यों में नाभिकीय एवं प्रजनक बीज यानी पहले बीज की शुद्ध पैदावार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस कार्यशाला में उत्तर भारतीय राज्यों में गेहूं, जौ व सरसों में नाभिकीय एवं प्रजनक बीज की पैदावार की शुद्धता पर चर्चा होगी। बीज की पैदावार के तरीके, तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। भौतिक शुद्धता के लिए बीज प्रसंस्करण को वैज्ञानिक तरीके से करने, बीज फसलों के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत हानिकारक और रोग प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यशाला एवं प्रशिक्षण 15 मार्च तक चलेगा।
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इसमें समन्वयक डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. संदीप सिहाग, डॉ. ज्ञान मिश्रा, राष्ट्रीय परियोजना समन्वयक (इंडो जर्मन कोऑपरेशन) डॉ.राघवेंद्र काबली, सह समन्वयक डॉ.संदीप लाल, डॉ. सुरेशचंद्र राणा, डॉ. राम निवास यादव, डॉ. मनोज कुमार यादव, डॉ. मुकेश सिंह आदि कई वैज्ञानिक शामिल रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय स्टेशन करनाल में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। ये कार्यशाला भारत-जर्मनी के द्विपक्षीय सहयोग पर चल रही परियोजना पर आधारित है। जिसमें उत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों, कृभको और प्राइवेट सेक्टर के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों को नाभिकीय एवं प्रजनक बीज की पैदावार को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें खासतौर पर गेहूं, जौ और सरसों के शुद्ध बीज की पैदावार पर फोकस रहेगा। इसमें जर्मनी के वैज्ञानिक भी अपनी तकनीक को साझा करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के निदेशक डॉ. आरके यादव ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि ने लवणीय और क्षारीय मिट्टी वाले क्षेत्र में बेहतर बीज उत्पादन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत में लवण एवं क्षारीयता प्रभावित जल का मानचित्र तैयार कर लिया है, शीघ्र ही खराब मिट्टी का भी मानचित्र जारी किया जाएगा।
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मुख्य अतिथि का स्वागत करने के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय स्टेशन करनाल के अध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. शिव कुमार यादव ने कहा कि भारतीय कृषि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारतीय राज्यों में नाभिकीय एवं प्रजनक बीज यानी पहले बीज की शुद्ध पैदावार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस कार्यशाला में उत्तर भारतीय राज्यों में गेहूं, जौ व सरसों में नाभिकीय एवं प्रजनक बीज की पैदावार की शुद्धता पर चर्चा होगी। बीज की पैदावार के तरीके, तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। भौतिक शुद्धता के लिए बीज प्रसंस्करण को वैज्ञानिक तरीके से करने, बीज फसलों के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत हानिकारक और रोग प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यशाला एवं प्रशिक्षण 15 मार्च तक चलेगा।
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इसमें समन्वयक डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. संदीप सिहाग, डॉ. ज्ञान मिश्रा, राष्ट्रीय परियोजना समन्वयक (इंडो जर्मन कोऑपरेशन) डॉ.राघवेंद्र काबली, सह समन्वयक डॉ.संदीप लाल, डॉ. सुरेशचंद्र राणा, डॉ. राम निवास यादव, डॉ. मनोज कुमार यादव, डॉ. मुकेश सिंह आदि कई वैज्ञानिक शामिल रहे।