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पंजाबी बने हरियाणा की पहले दर्जे की भाषा : लाडी
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श्री गुरुद्वारा साहिब गुढा में समाज सुधार लहर और गुरसिख संगत के सदस्यों की बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। श्री गुरुद्वारा साहिब गुढा में आयोजित बैठक में समाज सुधार लहर और गुरसिख संगत के सदस्यों ने श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संदर्भ में विचार-विमर्श किया। सरपंच यूनियन नीलोखेड़ी के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह लाडी ने कहा कि सर्वसम्मति से हरियाणा में पंजाबी भाषा को पहले दर्जे की भाषा का दर्जा दिलाने के लिए सरकार से औपचारिक रूप से अपील करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह मांग भी रखी गई कि राज्य के स्कूलों में पंजाबी भाषा के अध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाओं के स्थान पर गुरमुखी भाषा को महत्व दिया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि आगामी जनगणना में पंजाबी समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा ‘पंजाबी’ को ही दर्ज करवाएं, जिससे राज्य में पंजाबी भाषा की स्थिति को मजबूती मिले और भविष्य में इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। मौके पर एमसी इंद्री बलजिंद्र सिंह, अमरदीप गुड़ा, बजिंद्र सिंह, रघुवीर सिंह बंटी, साहब सिंह चोगामा, गुरमुख सिंह गौरगढ़, जसबीर सिंह खानपुर, गुरबाज सिंह, गुरवंत सिंह, निरवैर सिंह सरपंच, वरिंदर सरपंच, लखविंदर सरपंच, रेशम सिंह, गुरप्रताप सिंह, सरबजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। श्री गुरुद्वारा साहिब गुढा में आयोजित बैठक में समाज सुधार लहर और गुरसिख संगत के सदस्यों ने श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संदर्भ में विचार-विमर्श किया। सरपंच यूनियन नीलोखेड़ी के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह लाडी ने कहा कि सर्वसम्मति से हरियाणा में पंजाबी भाषा को पहले दर्जे की भाषा का दर्जा दिलाने के लिए सरकार से औपचारिक रूप से अपील करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह मांग भी रखी गई कि राज्य के स्कूलों में पंजाबी भाषा के अध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाओं के स्थान पर गुरमुखी भाषा को महत्व दिया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।
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बैठक में यह भी जोर दिया गया कि आगामी जनगणना में पंजाबी समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा ‘पंजाबी’ को ही दर्ज करवाएं, जिससे राज्य में पंजाबी भाषा की स्थिति को मजबूती मिले और भविष्य में इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। मौके पर एमसी इंद्री बलजिंद्र सिंह, अमरदीप गुड़ा, बजिंद्र सिंह, रघुवीर सिंह बंटी, साहब सिंह चोगामा, गुरमुख सिंह गौरगढ़, जसबीर सिंह खानपुर, गुरबाज सिंह, गुरवंत सिंह, निरवैर सिंह सरपंच, वरिंदर सरपंच, लखविंदर सरपंच, रेशम सिंह, गुरप्रताप सिंह, सरबजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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