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आलू के सही जमाव के लिए प्रक्रियाओं पर रखनी होगी नजर
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202: डा पीके मेहता।
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करनाल। आलू की अगेती किस्मों की बिजाई का समय नजदीक है। सितंबर के अंत में इन किस्मों की बिजाई होनी है जबकि समय से बिजाई वाली किस्में अक्तूबर के पहले सप्ताह में लगाई जा सकेंगी। कोल्ड स्टोर से बीज निकालने के बाद उसे हवादार कमरे में रखें जहां सूर्य का प्रकाश सीधे की बजाय छंटकर आ रहा हो। इस प्रक्रिया के अपनाने से आलू जमाव जल्द होगा।
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के सलाहकार डा. पीके मेहता ने कहा कि बिजाई के एक सप्ताह बाद जमाव से पूर्व खेत में खरपतवार नाशक दवा का स्प्रे कर दें। डीएपी खाद सिफारिश अनुसार मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डालें। अधिक डीएपी डालने पर अतिरिक्त खर्च के साथ आलू की गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है। उनका कहना है कि कोल्ड स्टोर से बीज को एक सप्ताह या 15 दिन पूर्व निकाल लें ताकि उसमें अंकुरण शुरू हो सके। खराब बीज की छंटाई कर देें। तापमान का विशेष ध्यान रखना है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहना चाहिए। इससे खेत में पूरी मात्रा में पौधे उगेंगे और पैदावार में कमी नहीं रहेगी।
करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, सोनीपत, यमुनानगर, हिसार, पंचकूला व अंबाला क्षेत्र में सितंबर के अंत में अगेती आलू बिजाई करने पर उन खेतों में बाद में गेहूं की पछेती फसल ली जा सकेगी। अगेती बिजाई में इस्तेमाल पुखराज, लीमा व सूर्या किस्मों को 60 दिन में उखाड़कर ताजा नया आलू बेचकर किसान अच्छा मुनाफा ले सकते हैं। इस अवधि में प्रति एकड़ पैदावार 70 से 80 क्विंटल तक मिलती है। परिपक्व होने पर पैदावार में 20 क्विंटल तक वृद्धि हो जाती है। यह किस्में उच्च तापमान सहन कर सकती हैं। अक्तूबर में मुख्य बिजाई के समय कुफरी ख्याति, कुफरी चिप्सोना-1, 2 व 3 किस्में लगा सकते हैं। इनकी परिपक्वता अवधि 120 दिन तक है और पैदावार 150 से 173 क्विंटल तक प्रति एकड़ रहती है। यह प्रजातियां प्रसंस्करण के काम आती हैं।
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महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के सलाहकार डा. पीके मेहता ने कहा कि बिजाई के एक सप्ताह बाद जमाव से पूर्व खेत में खरपतवार नाशक दवा का स्प्रे कर दें। डीएपी खाद सिफारिश अनुसार मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डालें। अधिक डीएपी डालने पर अतिरिक्त खर्च के साथ आलू की गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है। उनका कहना है कि कोल्ड स्टोर से बीज को एक सप्ताह या 15 दिन पूर्व निकाल लें ताकि उसमें अंकुरण शुरू हो सके। खराब बीज की छंटाई कर देें। तापमान का विशेष ध्यान रखना है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहना चाहिए। इससे खेत में पूरी मात्रा में पौधे उगेंगे और पैदावार में कमी नहीं रहेगी।
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करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, सोनीपत, यमुनानगर, हिसार, पंचकूला व अंबाला क्षेत्र में सितंबर के अंत में अगेती आलू बिजाई करने पर उन खेतों में बाद में गेहूं की पछेती फसल ली जा सकेगी। अगेती बिजाई में इस्तेमाल पुखराज, लीमा व सूर्या किस्मों को 60 दिन में उखाड़कर ताजा नया आलू बेचकर किसान अच्छा मुनाफा ले सकते हैं। इस अवधि में प्रति एकड़ पैदावार 70 से 80 क्विंटल तक मिलती है। परिपक्व होने पर पैदावार में 20 क्विंटल तक वृद्धि हो जाती है। यह किस्में उच्च तापमान सहन कर सकती हैं। अक्तूबर में मुख्य बिजाई के समय कुफरी ख्याति, कुफरी चिप्सोना-1, 2 व 3 किस्में लगा सकते हैं। इनकी परिपक्वता अवधि 120 दिन तक है और पैदावार 150 से 173 क्विंटल तक प्रति एकड़ रहती है। यह प्रजातियां प्रसंस्करण के काम आती हैं।
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