{"_id":"637155e8edf60372a263cdaa","slug":"pregnant-women-in-jd-of-malnutrition-due-to-changing-diet-karnal-news-knl127387117","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदलते खानपान से कुपोषण की जद में गर्भवती महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदलते खानपान से कुपोषण की जद में गर्भवती महिलाएं
विज्ञापन
अनुज शर्मा
करनाल। बदलती जीवनशैली और बदलते खानपान से गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में नार्मल डिलीवरी के साथ सिजेरियन डिलीवरी के केस बढ़ते जा रहे हैं। नवजात भी कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के प्रसूति विभाग में हुई डिलीवरी पर नजर डालें तो जनवरी से अक्तूबर 2022 तक 10 माह में कुल 6232 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हुई। इनमें से 2720 गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार मिलीं। जिनके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की भारी कमी थी। ऐसे में इन गर्भवती महिलाओं में खून चढ़ाकर सुरक्षित डिलीवरी करवानी पड़ी।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचा ने बताया कि आजकल लड़कियां पौष्टिक आहार को छोड़कर फास्ट फूड व तली हुई चीजें अधिक खा रही हैं। जिससे शादी के बाद उन्हें गर्भ धारण करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जो महिलाएं गर्भधारण कर लेती हैं उनकी ऐसे खान-पान से शरीर में खून की कमी होने लगती है। रिपोर्ट के अनुसार 100 में से 70 महिलाओं में प्रसव के दौरान खून की कमी मिलती है और इन 70 में से 40 महिलाओं में खून की भारी कमी मिलती है। ऐसे में या तो इन महिलाओं को आयरन के इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं या फिर खून चढ़ाना पड़ता है। जिसके बाद ही सुरक्षित डिलीवरी हो पाती है। इस खान-पान के कारण महिलाएं अपने पेट में पल रहे बच्चे को भी नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं। संवाद
विज्ञापन
लौह तत्वों की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ खाएं
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचा ने बताया कि विशेषकर गर्भवती महिलाएं एनीमिया को रोकने के लिए लौह तत्व की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ विशेष तौर पर अपने आहार में शामिल करें। इनमें साबुत अनाज, बाजरा, अंकुरित दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मूली, शलगम आदि के पत्ते, मूंगफली, तिल, खजूर, गुड़ व दूध। इसके अलावा फलों एवं सब्जियों में मौजूद विटामिन सी संतरा, मौसमी, नींबू, अमरूद, पपीता, चीकू, अंगूर व आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है।
कब कितनी हुई नार्मल और सिजेरियन डिलीवरी
माह नार्मल सिजेरियन कुल
जनवरी 397 248 645
फरवरी 380 219 599
मार्च 387 203 590
अप्रैल 299 183 482
मई 340 217 557
जून 372 193 565
जुलाई 401 224 625
अगस्त 466 261 727
सितंबर 475 250 725
अक्तूबर 296 421 717
कुल 3813 2419 6232
जनवरी 2022 से अक्तूबर तक 6232 डिलीवरी हुई हैं। इनमें 3813 सामान्य और 2419 सिजेरियन हैं। बदलती जीवन शैली और बदलते खान-पान के कारण गर्भवती महिलाओं को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि 10 माह में 2720 महिलाओं में खून की कमी मिली है। ऐसे में डिलीवरी के दौरान इन महिलाओं को खून चढ़ाना पड़ा। जिसके बाद ही ये नवजात को जन्म दे सकीं।
- डॉ. हिमांशु मदान, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, केसीजीएससी, करनाल
विज्ञापन
करनाल। बदलती जीवनशैली और बदलते खानपान से गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में नार्मल डिलीवरी के साथ सिजेरियन डिलीवरी के केस बढ़ते जा रहे हैं। नवजात भी कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के प्रसूति विभाग में हुई डिलीवरी पर नजर डालें तो जनवरी से अक्तूबर 2022 तक 10 माह में कुल 6232 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हुई। इनमें से 2720 गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार मिलीं। जिनके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की भारी कमी थी। ऐसे में इन गर्भवती महिलाओं में खून चढ़ाकर सुरक्षित डिलीवरी करवानी पड़ी।
विज्ञापन
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचा ने बताया कि आजकल लड़कियां पौष्टिक आहार को छोड़कर फास्ट फूड व तली हुई चीजें अधिक खा रही हैं। जिससे शादी के बाद उन्हें गर्भ धारण करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जो महिलाएं गर्भधारण कर लेती हैं उनकी ऐसे खान-पान से शरीर में खून की कमी होने लगती है। रिपोर्ट के अनुसार 100 में से 70 महिलाओं में प्रसव के दौरान खून की कमी मिलती है और इन 70 में से 40 महिलाओं में खून की भारी कमी मिलती है। ऐसे में या तो इन महिलाओं को आयरन के इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं या फिर खून चढ़ाना पड़ता है। जिसके बाद ही सुरक्षित डिलीवरी हो पाती है। इस खान-पान के कारण महिलाएं अपने पेट में पल रहे बच्चे को भी नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं। संवाद
विज्ञापन
लौह तत्वों की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ खाएं
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचा ने बताया कि विशेषकर गर्भवती महिलाएं एनीमिया को रोकने के लिए लौह तत्व की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ विशेष तौर पर अपने आहार में शामिल करें। इनमें साबुत अनाज, बाजरा, अंकुरित दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मूली, शलगम आदि के पत्ते, मूंगफली, तिल, खजूर, गुड़ व दूध। इसके अलावा फलों एवं सब्जियों में मौजूद विटामिन सी संतरा, मौसमी, नींबू, अमरूद, पपीता, चीकू, अंगूर व आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है।
कब कितनी हुई नार्मल और सिजेरियन डिलीवरी
माह नार्मल सिजेरियन कुल
जनवरी 397 248 645
फरवरी 380 219 599
मार्च 387 203 590
अप्रैल 299 183 482
मई 340 217 557
जून 372 193 565
जुलाई 401 224 625
अगस्त 466 261 727
सितंबर 475 250 725
अक्तूबर 296 421 717
कुल 3813 2419 6232
जनवरी 2022 से अक्तूबर तक 6232 डिलीवरी हुई हैं। इनमें 3813 सामान्य और 2419 सिजेरियन हैं। बदलती जीवन शैली और बदलते खान-पान के कारण गर्भवती महिलाओं को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि 10 माह में 2720 महिलाओं में खून की कमी मिली है। ऐसे में डिलीवरी के दौरान इन महिलाओं को खून चढ़ाना पड़ा। जिसके बाद ही ये नवजात को जन्म दे सकीं।
- डॉ. हिमांशु मदान, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, केसीजीएससी, करनाल