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Karnal News: पुलिस को मिलीं चार मोबाइल फॉरेंसिक वैन, तेज होगी जांच
Sat, 17 May 2025 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 17 May 2025 01:42 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल/मधुबन। अपराध होने पर अब साक्ष्य जुटाकर एफएसएल की टीम लैब तक नहीं आएगी, बल्कि फारेंसिक लैब अब घटनास्थल पर पहुंचेगी। मौके पर मिले साक्ष्यों पर तुरंत जांच होगी। प्रदेश में अब अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन चलाई जाएंगी। शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन स्थित एफएसएल परिसर से चार मोबाइल फॉरेंसिक वैन की शुरुआत की।
खास बात यह है कि इस वैन में डीएनए सैंपलिंग, फिंगरप्रिंट कैप्चरिंग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, कैमरा रिकॉर्डिंग और प्राथमिक विश्लेषण की सुविधा है। वैन घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र कर सकेंगी, जिससे परंपरागत देरी और संभावित साक्ष्य क्षरण की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
यह पहल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जहां पहले जांच अधिकारियों को विशेषज्ञों के पहुंचने की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए जा सकेंगे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
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डीजीपी ने फॉरेंसिक मोबाइल वैन का निरीक्षण किया और उपस्थित अधिकारियों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि एफएसएल द्वारा तैयार रिपोर्ट्स अब डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित होती हैं और उनकी वैधता पोर्टल पर रीयल-टाइम वेरिफिकेशन से सुनिश्चित की जाती है। इससे अदालतों में वैज्ञानिक साक्ष्यों को कानूनी रूप से और अधिक मजबूत तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
अपराधियों के दोषमुक्त होने में आएगी कमी
पुलिस अकादमी में डीजीपी ने एफएसएल द्वारा विकसित अत्याधुनिक टेंपर-प्रूफ पैकेजिंग और सीलिंग सामग्री की भी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह पैकेजिंग इस तरह डिजाइन की गई है कि एक बार सील होने के बाद यदि किसी ने उसके साथ छेड़छाड़ की तो वह स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकेगी। इससे अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों की वैधता को और अधिक मजबूती मिलेगी। टेंपर-प्रूफ पैकेजिंग न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता लाएगी। यह वैज्ञानिक प्रक्रिया अब यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी साक्ष्य रास्ते में बदला या नष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में अपराधियों के दोषमुक्त होने की संभावना में कमी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया पर आम जनता का विश्वास बढ़ेगा।
तकनीक से छानबीन हुई आसान : डीजीपी
करनाल/मधुबन। हरियाणा पुलिस ने ट्रैकिया फॉरेंसिक केस मैनेजमेंट सिस्टम की कार्यप्रणाली को डिजिटल रूप से अपग्रेड किया है। अब केस फाइलिंग, रिसीविंग, रिपोर्ट जनरेशन और फॉलोअप की पूरी प्रक्रिया पोर्टल पर ट्रैक की जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी न्यूनतम है।
डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने बताया कि इसके अलावा, प्राथमिकता वाले मामलों के लिए विशेष डिजिटल अनुरोध प्रणाली भी शुरू की गई है, जिससे संबंधित अधिकारी तुरंत पोर्टल के माध्यम से प्राथमिकता दर्ज कर सकते हैं और बिना किसी कागजी पत्राचार के केस को तेजी से निपटाया जा सकता है।
डीजीपी शुक्रवार को मुधबन स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी में चार अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन की शुरुआत करने पहुंचे थे। डीजीपी ने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से जांच प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। उपकरण क्षमता विस्तार में 166.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ी है। डीएनए, एनडीपीएस और मोबाइल फोरेंसिक वैन के विस्तार से मामले निपटान दर और रिपोर्ट गुणवत्ता में सुधार हुआ है। एफएसएल हरियाणा में क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे में सुधार से फोरेंसिक सेवाओं की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ी है।
257 नए पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया ः डीजीपी ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष में विभाग के पद स्वीकृत क्षमता में 70.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 257 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया सक्रिय रूप से चल रही है। संस्थान ने 149 इंटर्न्स के साथ प्रशिक्षण और इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस की एफएसएल ने पिछले डेढ़ वर्ष में न केवल अत्यधिक वैज्ञानिक उपकरणों की बड़ी संख्या में खरीद की है बल्कि एसएसओ, साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट सहित अन्य सहयोगी स्टाफ की भर्ती करते हुए कार्य व न्याय प्रणाली को गति प्रदान की हैै।
जटिल अपराध की जांच को त्वरित करने में सक्षम : सिंह
एफएसएल के निदेशक ओपी सिंह ने बताया कि अगस्त 2023 में डीजीपी के नेतृत्व में एफएसएल के सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी गई। वैज्ञानिकों की संख्या 46 से बढ़ाकर 80 की गई। एनडीपीएस, डीएनए, साइबर फॉरेंसिक, टॉक्सिकोलॉजी और बॉयोलॉजी डिविजनों को अत्याधुनिक उपकरण जैसे जीसी-एमएस यूनिट, हाई-प्रिसिजन माइक्रोस्कोप और नवीनतम डीएनए सीक्वेंसर स्थापित किए हैं। इन तकनीकी संसाधनों के माध्यम से अब एफएसएल किसी भी जटिल अपराध की जांच को त्वरित और प्रमाणिक रूप से अंजाम देने में सक्षम है।
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करनाल/मधुबन। अपराध होने पर अब साक्ष्य जुटाकर एफएसएल की टीम लैब तक नहीं आएगी, बल्कि फारेंसिक लैब अब घटनास्थल पर पहुंचेगी। मौके पर मिले साक्ष्यों पर तुरंत जांच होगी। प्रदेश में अब अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन चलाई जाएंगी। शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन स्थित एफएसएल परिसर से चार मोबाइल फॉरेंसिक वैन की शुरुआत की।
खास बात यह है कि इस वैन में डीएनए सैंपलिंग, फिंगरप्रिंट कैप्चरिंग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, कैमरा रिकॉर्डिंग और प्राथमिक विश्लेषण की सुविधा है। वैन घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र कर सकेंगी, जिससे परंपरागत देरी और संभावित साक्ष्य क्षरण की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
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यह पहल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जहां पहले जांच अधिकारियों को विशेषज्ञों के पहुंचने की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए जा सकेंगे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
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डीजीपी ने फॉरेंसिक मोबाइल वैन का निरीक्षण किया और उपस्थित अधिकारियों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि एफएसएल द्वारा तैयार रिपोर्ट्स अब डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित होती हैं और उनकी वैधता पोर्टल पर रीयल-टाइम वेरिफिकेशन से सुनिश्चित की जाती है। इससे अदालतों में वैज्ञानिक साक्ष्यों को कानूनी रूप से और अधिक मजबूत तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
अपराधियों के दोषमुक्त होने में आएगी कमी
पुलिस अकादमी में डीजीपी ने एफएसएल द्वारा विकसित अत्याधुनिक टेंपर-प्रूफ पैकेजिंग और सीलिंग सामग्री की भी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह पैकेजिंग इस तरह डिजाइन की गई है कि एक बार सील होने के बाद यदि किसी ने उसके साथ छेड़छाड़ की तो वह स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकेगी। इससे अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों की वैधता को और अधिक मजबूती मिलेगी। टेंपर-प्रूफ पैकेजिंग न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता लाएगी। यह वैज्ञानिक प्रक्रिया अब यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी साक्ष्य रास्ते में बदला या नष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में अपराधियों के दोषमुक्त होने की संभावना में कमी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया पर आम जनता का विश्वास बढ़ेगा।
तकनीक से छानबीन हुई आसान : डीजीपी
करनाल/मधुबन। हरियाणा पुलिस ने ट्रैकिया फॉरेंसिक केस मैनेजमेंट सिस्टम की कार्यप्रणाली को डिजिटल रूप से अपग्रेड किया है। अब केस फाइलिंग, रिसीविंग, रिपोर्ट जनरेशन और फॉलोअप की पूरी प्रक्रिया पोर्टल पर ट्रैक की जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी न्यूनतम है।
डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने बताया कि इसके अलावा, प्राथमिकता वाले मामलों के लिए विशेष डिजिटल अनुरोध प्रणाली भी शुरू की गई है, जिससे संबंधित अधिकारी तुरंत पोर्टल के माध्यम से प्राथमिकता दर्ज कर सकते हैं और बिना किसी कागजी पत्राचार के केस को तेजी से निपटाया जा सकता है।
डीजीपी शुक्रवार को मुधबन स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी में चार अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन की शुरुआत करने पहुंचे थे। डीजीपी ने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से जांच प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। उपकरण क्षमता विस्तार में 166.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ी है। डीएनए, एनडीपीएस और मोबाइल फोरेंसिक वैन के विस्तार से मामले निपटान दर और रिपोर्ट गुणवत्ता में सुधार हुआ है। एफएसएल हरियाणा में क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे में सुधार से फोरेंसिक सेवाओं की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ी है।
257 नए पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया ः डीजीपी ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष में विभाग के पद स्वीकृत क्षमता में 70.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 257 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया सक्रिय रूप से चल रही है। संस्थान ने 149 इंटर्न्स के साथ प्रशिक्षण और इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस की एफएसएल ने पिछले डेढ़ वर्ष में न केवल अत्यधिक वैज्ञानिक उपकरणों की बड़ी संख्या में खरीद की है बल्कि एसएसओ, साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट सहित अन्य सहयोगी स्टाफ की भर्ती करते हुए कार्य व न्याय प्रणाली को गति प्रदान की हैै।
जटिल अपराध की जांच को त्वरित करने में सक्षम : सिंह
एफएसएल के निदेशक ओपी सिंह ने बताया कि अगस्त 2023 में डीजीपी के नेतृत्व में एफएसएल के सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी गई। वैज्ञानिकों की संख्या 46 से बढ़ाकर 80 की गई। एनडीपीएस, डीएनए, साइबर फॉरेंसिक, टॉक्सिकोलॉजी और बॉयोलॉजी डिविजनों को अत्याधुनिक उपकरण जैसे जीसी-एमएस यूनिट, हाई-प्रिसिजन माइक्रोस्कोप और नवीनतम डीएनए सीक्वेंसर स्थापित किए हैं। इन तकनीकी संसाधनों के माध्यम से अब एफएसएल किसी भी जटिल अपराध की जांच को त्वरित और प्रमाणिक रूप से अंजाम देने में सक्षम है।