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कबूतरबाजी : कॅरिअर प्लान न हाथ में हुनर, डाॅलर के लालच में चुनते हैं डंकी मार्ग
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- शिक्षा, टूरिस्ट और वर्क वीजा की तुलना में डंकी मार्ग से जाने पर लगती है 10 गुना ज्यादा रकम, जान का जोखिम अलग
- मानक पूरे न कर पाने व एंबेसी के साक्षात्कार में असफलता पर चुनते हैं डंकी मार्ग, विशेषज्ञ बोले- ट्रैवल हिस्ट्री मजबूत हो तो आसानी से लगता है वीजा
गगन तलवार
करनाल। विदेश जाकर पढ़ाई के लिए न तो कोई कॅरिअर प्लान होता है न ही हाथ में कोई हुनर, जिसके बल पर युवा विदेश में कोई काम कर सकें। इसलिए ऐसे युवाओं को शिक्षा और वर्क वीजा नहीं मिल पाता तो वे विदेश जाने का अवैध रास्ता अपनाते हैं।
बड़ी बात यह है कि डंकी मार्ग से विदेश जाने पर एक तरफ तो वैध तरीके से जाने की तुलना में 10 गुना तक ज्यादा रकम लगती है, दूसरा जान का भी जोखिम होता है। इसके बावजूद डॉलर और पौंड कमाने का सपना उन्हें इस मार्ग पर चलने के लिए विवश कर देता है। साथ ही, एजेंट भी उन्हें अपने कमीशन के लिए अवैध रास्ते पर भी सारे इंतजाम और सुविधाओं का लालच देते हुए अपने जाल में फंसाते हैं।
जानकारों के अनुसार, अगर स्टडी, टूरिस्ट या वर्क परमिट से अमेरिका जाएं तो खर्च बहुत कम आता है। जबकि डंकी मार्ग से अमेरिका जाने पर 45 से 70 लाख रुपये तक खर्च होता है। सामान्य तरीके से प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित देश की एंबेसी की ओर से साक्षात्कार लिया जाता है, जिसमें संबंधित व्यक्ति से विदेश जाने का कारण और कॅरिअर प्लान पूछा जाता है। इसकी सही जानकारी न होने पर एंबेसी की ओर से वीजा जारी नहीं किया जाता। असफलता के बाद वे डंकी मार्ग चुनते हैं।
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इमीग्रेशन एडवोकेट प्रीतपाल सिंह पन्नू का कहना है कि अगर टूरिस्ट वीजा पर भी अमेरिका, कनाडा या किसी बड़े देश में जाना हो, तो इसके लिए व्यक्ति की ट्रैवल हिस्ट्री मजबूत होनी चाहिए। वह कई छोटे देशों में टूरिस्ट वीजा पर गया है और उसका रिकॉर्ड ठीक है तो टूरिस्ट वीजा आसानी से मिल जाता है।
एक्सपर्ट व्यू
स्टडी वीजा के साथ वर्क परमिट भी मिलता है : पन्नू
एडवोकेट प्रीतपाल सिंह पन्नू के अनुसार, सामान्य तौर पर स्टडी वीजा पर अमेरिका जाने पर कोर्स के हिसाब से करीब 13 लाख रुपये सालाना फीस है। दो साल का डिप्लोमा करना है तो यह राशि दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही विद्यार्थी को 20 घंटे काम का परमिट भी मिलता है। पढ़ाई के बाद स्टडी वीजा वर्क वीजा में तब्दील हो जाता है और पीआर के रास्ते भी खुलते हैं। इस तरीके से व्यक्ति जितनी बार चाहे वो घर भारत भी आ सकते हैं। जबकि डंकी मार्ग पर जाने वाले अपने देश से ही खतरा बताते हुए वहां पर खुद पर केस दर्ज कराते हैं। ऐसे केस में रिफ्यूजी हो जाने पर या सेलम पर जाने वाले व्यक्ति भारत लौटकर नहीं आ सकते। इसके बाद तो संबंधित देश ही उन्हें डिपोर्ट करता है।
गलत एजेंट से फाइल लगने पर होती है रद्द
इमीग्रेशन सलाहकार डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, अमेरिका के लिए टूरिस्ट वीजा के लिए 50 हजार रुपये से भी कम खर्च है। हालांकि वैध एजेंट फाइल तैयार करने के लिए 25 हजार रुपये तक फीस ले लेता है। जबकि फर्जी एजेंट दस्तावेजों में खेल करते हैं। कुछ आईलेट्स सेंटर वाले पढ़ाई के अलावा वीजा भी लगवाते हैं। जबकि वे इस कार्य के लिए अधिकृत नहीं होते। ऐसे में विद्यार्थी को नहीं पता होता कि उनकी फाइल से कौन आवेदन कर रहा है। जब विद्यार्थी का रिजेक्शन आता है तो उसे ऐसे लोग फाइल भी नहीं देते। न ही कारण बता पाते हैं। ऐसे में विदेश जाने पर गलत रास्ता चुनना उनकी मजबूरी बन जाती है।
यह हैं वीजा के मुख्य प्रकार-
- टूरिस्ट वीजा : यह वीजा सिर्फ घूमने-फिरने के लिए मिलता है। इसे लेकर अगर किसी देश में जाते हैं तो बिजनेस गतिविधि से नहीं जुड़ सकते। कुछ देश टूरिस्ट वीजा जारी नहीं करते।
- शिक्षा वीजा : यह वीजा पांच साल के लिए या पाठ्यक्रम की अवधि तक के लिए होता है। इसके लिए आवेदक को एक मान्यता प्राप्त या प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान में प्रवेश और वित्तीय सहायता का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है।
- वर्क वीजा : यह काम के लिए विदेश जाने के लिए जारी होता है। यह अस्थायी होता है, लेकिन इसे वैध कारणों से ही रिन्यू किया जा सकता है। इसकी अवधि काम की अवधि पर निर्भर करती है। वर्क वीजा के लिए शैक्षिक प्रमाणपत्र, कार्य अनुभव पत्र, नौकरी प्रस्ताव या रोजगार अनुबंध आदि होना जरूरी है।
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- मानक पूरे न कर पाने व एंबेसी के साक्षात्कार में असफलता पर चुनते हैं डंकी मार्ग, विशेषज्ञ बोले- ट्रैवल हिस्ट्री मजबूत हो तो आसानी से लगता है वीजा
गगन तलवार
करनाल। विदेश जाकर पढ़ाई के लिए न तो कोई कॅरिअर प्लान होता है न ही हाथ में कोई हुनर, जिसके बल पर युवा विदेश में कोई काम कर सकें। इसलिए ऐसे युवाओं को शिक्षा और वर्क वीजा नहीं मिल पाता तो वे विदेश जाने का अवैध रास्ता अपनाते हैं।
बड़ी बात यह है कि डंकी मार्ग से विदेश जाने पर एक तरफ तो वैध तरीके से जाने की तुलना में 10 गुना तक ज्यादा रकम लगती है, दूसरा जान का भी जोखिम होता है। इसके बावजूद डॉलर और पौंड कमाने का सपना उन्हें इस मार्ग पर चलने के लिए विवश कर देता है। साथ ही, एजेंट भी उन्हें अपने कमीशन के लिए अवैध रास्ते पर भी सारे इंतजाम और सुविधाओं का लालच देते हुए अपने जाल में फंसाते हैं।
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जानकारों के अनुसार, अगर स्टडी, टूरिस्ट या वर्क परमिट से अमेरिका जाएं तो खर्च बहुत कम आता है। जबकि डंकी मार्ग से अमेरिका जाने पर 45 से 70 लाख रुपये तक खर्च होता है। सामान्य तरीके से प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित देश की एंबेसी की ओर से साक्षात्कार लिया जाता है, जिसमें संबंधित व्यक्ति से विदेश जाने का कारण और कॅरिअर प्लान पूछा जाता है। इसकी सही जानकारी न होने पर एंबेसी की ओर से वीजा जारी नहीं किया जाता। असफलता के बाद वे डंकी मार्ग चुनते हैं।
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इमीग्रेशन एडवोकेट प्रीतपाल सिंह पन्नू का कहना है कि अगर टूरिस्ट वीजा पर भी अमेरिका, कनाडा या किसी बड़े देश में जाना हो, तो इसके लिए व्यक्ति की ट्रैवल हिस्ट्री मजबूत होनी चाहिए। वह कई छोटे देशों में टूरिस्ट वीजा पर गया है और उसका रिकॉर्ड ठीक है तो टूरिस्ट वीजा आसानी से मिल जाता है।
एक्सपर्ट व्यू
स्टडी वीजा के साथ वर्क परमिट भी मिलता है : पन्नू
एडवोकेट प्रीतपाल सिंह पन्नू के अनुसार, सामान्य तौर पर स्टडी वीजा पर अमेरिका जाने पर कोर्स के हिसाब से करीब 13 लाख रुपये सालाना फीस है। दो साल का डिप्लोमा करना है तो यह राशि दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही विद्यार्थी को 20 घंटे काम का परमिट भी मिलता है। पढ़ाई के बाद स्टडी वीजा वर्क वीजा में तब्दील हो जाता है और पीआर के रास्ते भी खुलते हैं। इस तरीके से व्यक्ति जितनी बार चाहे वो घर भारत भी आ सकते हैं। जबकि डंकी मार्ग पर जाने वाले अपने देश से ही खतरा बताते हुए वहां पर खुद पर केस दर्ज कराते हैं। ऐसे केस में रिफ्यूजी हो जाने पर या सेलम पर जाने वाले व्यक्ति भारत लौटकर नहीं आ सकते। इसके बाद तो संबंधित देश ही उन्हें डिपोर्ट करता है।
गलत एजेंट से फाइल लगने पर होती है रद्द
इमीग्रेशन सलाहकार डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, अमेरिका के लिए टूरिस्ट वीजा के लिए 50 हजार रुपये से भी कम खर्च है। हालांकि वैध एजेंट फाइल तैयार करने के लिए 25 हजार रुपये तक फीस ले लेता है। जबकि फर्जी एजेंट दस्तावेजों में खेल करते हैं। कुछ आईलेट्स सेंटर वाले पढ़ाई के अलावा वीजा भी लगवाते हैं। जबकि वे इस कार्य के लिए अधिकृत नहीं होते। ऐसे में विद्यार्थी को नहीं पता होता कि उनकी फाइल से कौन आवेदन कर रहा है। जब विद्यार्थी का रिजेक्शन आता है तो उसे ऐसे लोग फाइल भी नहीं देते। न ही कारण बता पाते हैं। ऐसे में विदेश जाने पर गलत रास्ता चुनना उनकी मजबूरी बन जाती है।
यह हैं वीजा के मुख्य प्रकार-
- टूरिस्ट वीजा : यह वीजा सिर्फ घूमने-फिरने के लिए मिलता है। इसे लेकर अगर किसी देश में जाते हैं तो बिजनेस गतिविधि से नहीं जुड़ सकते। कुछ देश टूरिस्ट वीजा जारी नहीं करते।
- शिक्षा वीजा : यह वीजा पांच साल के लिए या पाठ्यक्रम की अवधि तक के लिए होता है। इसके लिए आवेदक को एक मान्यता प्राप्त या प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान में प्रवेश और वित्तीय सहायता का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है।
- वर्क वीजा : यह काम के लिए विदेश जाने के लिए जारी होता है। यह अस्थायी होता है, लेकिन इसे वैध कारणों से ही रिन्यू किया जा सकता है। इसकी अवधि काम की अवधि पर निर्भर करती है। वर्क वीजा के लिए शैक्षिक प्रमाणपत्र, कार्य अनुभव पत्र, नौकरी प्रस्ताव या रोजगार अनुबंध आदि होना जरूरी है।