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पीएचसी में स्टाफ की कमी पर जड़ा ताला
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Tue, 06 Dec 2016 12:18 AM IST
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पीएचसी में स्टाफ की कमी पर जड़ा ताला
- फोटो : Amar Ujala
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सग्गा बस स्टैंड पर स्थित पीएचसी में स्टाफ की कमी के कारण ग्रामीणों ने गेट पर ताला जड़ कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब ढाई घंटे तक लोगों ने तालाबंदी रखी। बाद में बीडीपीओ के आश्वासन पर ग्रामीण माने।
लंबे समय से यहां स्टाफ की कमी के चलते ग्रामीण परेशान हैं। सोमवार सुबह गांव के लोग साढ़े नौ बजे प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर जमा हो गए और आते ही कर्मचारियों को बाहर निकालकर पीएचसी के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। कर्मचारियों ने इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दी। गांव सग्गा के नीलोखेड़ी ब्लाक समिति के चेयरमैन हुक्म सिंह भी ग्रामीणों के साथ थे। उन्होंने बताया कि वे सरपंच के साथ सीएमओ के पास करनाल जाकर स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए कई बार कह चुके हैं। उनका कहना है कि यहां की पीएचसी में सग्गा के अलावा मौथिया, जलाला, बीड़ ढढारी, बीड़ नारायणा व अन्य कई डेरों के लोग इलाज के लिए आते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी है। एकमात्र महिला चिकित्सक हैं। यहां रात की ड्यूटी के लिए कोई सुविधा नहीं है। शाम छह बजे से पहले यहां ताला लग जाता है। पिछले डेढ़ दो सालों से वे स्टाफ की कमी का रोना रो रहे हैं। एमएलए तक अपनी समस्या रख चुके हैं।
मजबूरन ग्रामीणों को ताला जड़ना पड़ा। जब गांव के लोगों को इसकी सही उपयोगिता ही नहीं मिल रही है तो फिर इसके खुले रहने का भी उन्हें क्या फायदा है। बाद में 12 बजे दोपहर को तरावड़ी से पुलिस, नीलोखेड़ी के बीडीपीओ, विकास कुमार, तरावड़ी के मुख्य चिकित्सक ने पहुंच कर ग्रामीणों को समझाया तब जाकर पीएचसी का ताला खुल पाया।
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लंबे समय से यहां स्टाफ की कमी के चलते ग्रामीण परेशान हैं। सोमवार सुबह गांव के लोग साढ़े नौ बजे प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर जमा हो गए और आते ही कर्मचारियों को बाहर निकालकर पीएचसी के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। कर्मचारियों ने इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दी। गांव सग्गा के नीलोखेड़ी ब्लाक समिति के चेयरमैन हुक्म सिंह भी ग्रामीणों के साथ थे। उन्होंने बताया कि वे सरपंच के साथ सीएमओ के पास करनाल जाकर स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए कई बार कह चुके हैं। उनका कहना है कि यहां की पीएचसी में सग्गा के अलावा मौथिया, जलाला, बीड़ ढढारी, बीड़ नारायणा व अन्य कई डेरों के लोग इलाज के लिए आते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी है। एकमात्र महिला चिकित्सक हैं। यहां रात की ड्यूटी के लिए कोई सुविधा नहीं है। शाम छह बजे से पहले यहां ताला लग जाता है। पिछले डेढ़ दो सालों से वे स्टाफ की कमी का रोना रो रहे हैं। एमएलए तक अपनी समस्या रख चुके हैं।
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मजबूरन ग्रामीणों को ताला जड़ना पड़ा। जब गांव के लोगों को इसकी सही उपयोगिता ही नहीं मिल रही है तो फिर इसके खुले रहने का भी उन्हें क्या फायदा है। बाद में 12 बजे दोपहर को तरावड़ी से पुलिस, नीलोखेड़ी के बीडीपीओ, विकास कुमार, तरावड़ी के मुख्य चिकित्सक ने पहुंच कर ग्रामीणों को समझाया तब जाकर पीएचसी का ताला खुल पाया।
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