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Karnal News: बिकी चुके वाहन को ट्रांसफर करवाने या एनओसी के लिए पहुंच रहे लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Nov 2025 02:32 AM IST
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People are reaching out for transfer of sold vehicle or for NOC
गगन तलवार
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करनाल। दिल्ली में हुए कार धमाके के बाद से जिन लोगों ने अपने पुराने वाहन एफिडेविट पर बेचे थे या परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड में खरीदार के नाम से ऑनरशिप ट्रांसफर नहीं कराई है, वे एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) लेने या दूसरी पार्टी के नाम पर वाहन कराने के लिए कार्यालयों में चक्कर लगाने लगे हैं। पिछले पांच दिनों में सभी उपमंडलों के सरल केंद्र और आरटीए कार्यालय में पुरानी गाड़ियों की एनओसी कटवाने के लिए 20 से ज्यादा और 37 वाहनों की ऑनरशिप ट्रांसफर कराने के लिए आवेदन आए हैं।

अब तक कई मामलों में ऐसा सामने आया है कि वाहनों के सेकंड ऑनर अपने वाहन को आगे बेचते थे तो तीसरा खरीदार उसे अपने नाम पर नहीं कराते हैं। वे इसके बदले में एफिडेविट वाहन मालिक को देते हैं। जिसमें वे उस निर्धारित तिथि से अपनी जिम्मेदारी लेते हैं। ताकि यदि उन्हें वाहन को आगे बेचना पड़े तो थर्ड ऑनरशिप आने से उस वाहन की कीमत न प्रभावित हो। लेकिन इससे परिवहन विभाग के रिकार्ड में वही व्यक्ति वाहन का मालिक रहता है, जिसके नाम पर वाहन पंजीकृत होता है। ऐसे में हादसा होने या किसी भी वारदात होने पर उसकी की जिम्मेदारी निकलती है।
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35 प्रतिशत से ज्यादा पुराने मालिक के नाम पर
आठ से 10 साल पुराने वाहन ही बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। करनाल शहर में मुगल कैनाल, स्कूटर मार्केट के अलावा, हाईवे, सेक्टर-12 और अन्य बाजारों में पुराने वाहनों की खरीद फरोख्त होती है। स्थिति देखें तो जिले की सड़कों पर करीब 35 प्रतिशत पुराने वाहन अभी भी पुराने मालिक के नाम पर फर्राटा भर रहे हैं। वाहन एजेंट पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त करते समय मौके पर केवल 10-20 रुपये का स्टाम्प भरते हैं और वाहन का नाम नए मालिक के स्थान पर टाइप कर देते हैं। हालांकि, आरसी तब तक ट्रांसफर नहीं होती जब तक परिवहन विभाग (आरटीए) के रिकॉर्ड में बदलाव न हो। स्टीयरिंग पर नए शख्स होने का परिणाम यह है कि यदि वाहन का गलत इस्तेमाल होता है तो जवाबदेही पुराने मालिक के नाम पर बनती है।
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विक्रेता कटवा सकता है एनओसी

परिवहन विभाग से किसी भी वाहन की एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) विक्रेता ही ले सकता है। इसके लिए उसे परिवहन विभाग से संबंधित अथॉरिटी (एसडीएम या आरटीए कार्यालय) में आकर आवेदन करना होता है। वहां उसकी फोटो होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है। किसी भी वाहन की एनओसी लेने के लिए क्रेता और विक्रेता के दो आईडी प्रूफ, गाड़ी का बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, विक्रेता की फोटो, गाड़ी के चेसिस नंबर की ट्रेसिंग आदि दस्तावेज अनिवार्य हैं। जिसकी फाइल तैयार कर सरल केंद्र में जमा करवानी होती है।



इन फार्मों की होती है जरूरत

- फार्म 28 : इस फार्म का उपयोग तब किया जाता है जब आप अपने वाहन को एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करना चाहते हैं। यह आरटीओ से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक आवेदन है, जिसमें यह पुष्टि की जाती है कि वाहन पर कोई कर या कानूनी बकाया नहीं है।

- फार्म 29 : यह फार्म वाहन के विक्रेता द्वारा भरा जाता है ताकि वह आरटीओ को सूचित कर सके कि उसने अपना वाहन किसी तीसरे पक्ष (खरीदार) को बेच दिया है। वाहन बेचने के 14 दिनों के भीतर यह फार्म जमा करना आवश्यक है।

- फार्म 30 : यह फार्म खरीदार और विक्रेता दोनों की ओर से हस्ताक्षरित होता है और यह वाहन के स्वामित्व को वर्तमान मालिक से नए खरीदार को कानूनी रूप से स्थानांतरित करने के लिए एक आवेदन है। यह फार्म 29 के साथ स्वामित्व परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरा करता है।

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पुराने वाहन को बेचने के तुरंत बाद वाहन मालिक को अपने वाहन का मालिकाना हक परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड में अपडेट करनी जरूरी है। इसके बिना ऑनरशिप नहीं बदली जा सकती। पुराने वाहनों के बिकने के बाद नाम ट्रांसफर के लिए आवेदन आ रहे हैं। जिन्होंने दूसरे राज्य में वाहन को बेचा है या एनसीआर से बाहर बेचा है, वे वाहन की एनओसी कटवाते हैं और संबंधित अथॉरिटी में उन्हें जमा करानी होती है। - अनुभव मेहता, एसडीएम करनाल
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