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हुड्डा का विरोध नहीं, सिस्टम के प्रति आक्रोश- विनोद शर्मा
करनाल
Updated Tue, 18 Feb 2014 11:49 PM IST
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पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अंबाला शहर के विधायक विनोद शर्मा ने कहा कि जनता में नेताओं के प्रति आक्रोश है। लोगों को लगता है कि उनके वोट पर चुनाव जीतकर राजनीतिक व्यक्ति जो ताकत हासिल करते हैं, उसका जनता के विकास की बजाय अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं।
यह राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है। शर्मा असंध के गांव अरड़ाना, सालवन, जुंडला और निसिंग का दौरा करने के बाद करनाल क्लब में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जनता की भावना निर्मूल नहीं है। लोगों की भावनाओं को समझकर नीतियां बनानी होंगी। बड़े स्तर पर नीतियों में बदलाव करने की जरूरत है। जनता एक समान मौका और एक समान व्यवहार चाहती है। राजनीतिक व्यक्तियों को भी अपने आप में बदलावा लाना होगा।
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शर्मा ने कहा कि उन्होंने चुनाव समन्वय समिति से सिर्फ इसलिए इस्तीफा दिया, क्योंकि वे चाहते हैं कि जनता खुद अपना उम्मीदवार चुने। कोई समिति या नेता नहीं। विनोद शर्मा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जनता में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की व्यक्तिगत खिलाफत नहीं है। पूरे सिस्टम के प्रति लोगों में आक्रोश है। शर्मा ने विकास में भेदभाव के आरोपों को सिरे से नहीं नकाराते हुए कहा कि विधायकों और सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्र में जिम्मेदार नहीं निभाई होगी, जिसके चलते इस तरह के आरोप लग रहे हैं। शर्मा ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की पैरवी की।
542 सीटों पर हो रायशुमारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपनी नीतियों में बदलाव करते लोकसभा चुनाव में 15 सीटों पर जनता से पूछकर उनकी सहमति से उम्मीदवार तय करने का निर्णय लिया है। राहुल गांधी ने इसकी घोषणा भी की है। शर्मा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि सिर्फ 15 सीटों का नहीं बल्कि 542 सीटों पर जनता की रायशुमारी से उम्मीदवार तय किए जाएं।
सैलजा के जाने से पार्टी हुई कमजोर
विनोद शर्मा का कहना है कि सैलजा के राज्यसभा में चले जाने से पार्टी कमजोर हुई है। लोकसभा क्षेत्र में लोगों का यही मानना है कि सैलजा के चुनाव नहीं लड़ने से कांग्रेस पार्टी को असर पड़ेगा। उन्होंने कुमारी शैलजा से अपने मतभेदों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके और सैलजा के बीच कोई मतभेद नहीं है।
करनाल या अंबाला से नहीं लड़ना चुनाव
शर्मा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वे करनाल और अंबाला लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। चंडीगढ़ से चुनाव लड़ने के सवाल को भी विनोद शर्मा ने हलके में लिया और कहा कि वे चंडीगढ़ से भी चुनाव नहीं लड़ेंगे।
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यह राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है। शर्मा असंध के गांव अरड़ाना, सालवन, जुंडला और निसिंग का दौरा करने के बाद करनाल क्लब में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि जनता की भावना निर्मूल नहीं है। लोगों की भावनाओं को समझकर नीतियां बनानी होंगी। बड़े स्तर पर नीतियों में बदलाव करने की जरूरत है। जनता एक समान मौका और एक समान व्यवहार चाहती है। राजनीतिक व्यक्तियों को भी अपने आप में बदलावा लाना होगा।
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शर्मा ने कहा कि उन्होंने चुनाव समन्वय समिति से सिर्फ इसलिए इस्तीफा दिया, क्योंकि वे चाहते हैं कि जनता खुद अपना उम्मीदवार चुने। कोई समिति या नेता नहीं। विनोद शर्मा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जनता में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की व्यक्तिगत खिलाफत नहीं है। पूरे सिस्टम के प्रति लोगों में आक्रोश है। शर्मा ने विकास में भेदभाव के आरोपों को सिरे से नहीं नकाराते हुए कहा कि विधायकों और सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्र में जिम्मेदार नहीं निभाई होगी, जिसके चलते इस तरह के आरोप लग रहे हैं। शर्मा ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की पैरवी की।
542 सीटों पर हो रायशुमारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपनी नीतियों में बदलाव करते लोकसभा चुनाव में 15 सीटों पर जनता से पूछकर उनकी सहमति से उम्मीदवार तय करने का निर्णय लिया है। राहुल गांधी ने इसकी घोषणा भी की है। शर्मा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि सिर्फ 15 सीटों का नहीं बल्कि 542 सीटों पर जनता की रायशुमारी से उम्मीदवार तय किए जाएं।
सैलजा के जाने से पार्टी हुई कमजोर
विनोद शर्मा का कहना है कि सैलजा के राज्यसभा में चले जाने से पार्टी कमजोर हुई है। लोकसभा क्षेत्र में लोगों का यही मानना है कि सैलजा के चुनाव नहीं लड़ने से कांग्रेस पार्टी को असर पड़ेगा। उन्होंने कुमारी शैलजा से अपने मतभेदों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके और सैलजा के बीच कोई मतभेद नहीं है।
करनाल या अंबाला से नहीं लड़ना चुनाव
शर्मा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वे करनाल और अंबाला लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। चंडीगढ़ से चुनाव लड़ने के सवाल को भी विनोद शर्मा ने हलके में लिया और कहा कि वे चंडीगढ़ से भी चुनाव नहीं लड़ेंगे।