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इलाज नहीं मिलने पर मरीज ने तोड़ा दम
करनाल
Updated Sun, 08 Sep 2013 12:51 AM IST
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इलाज के अभाव में एक मरीज ने निजी अस्पताल के बाहर दम तोड़ दिया। बाद में परिजनों ने हंगामा किया तो पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल प्रबंधन से बात की लेकिन तब तक मरीज के प्राण पखेरू उड़ चुके थे।
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इस मामले में पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गांव नलीपार के रहने वाले 38 वर्षीय पप्पू को काला पीलिया के चलते परिजनों ने 27 अगस्त को सेक्टर सात स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया था।
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यहां 30 अगस्त को डॉक्टर ने यूरोप जाने के दौरान पप्पू को डिस्चार्ज कर दिया और एक सप्ताह बाद जांच के लिए बुलाया।
तीन सितंबर को पप्पू की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन पप्पू की बाईं बाजू पर सूजन होने के कारण अस्पताल के जूनियर डॉक्टर ने उसे रक्त चढ़ाने के लिए सात सितंबर को बुलाया।
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मृतक के भाई राजकुमार ने बताया कि शनिवार को सुबह वह पप्पू को लेकर अस्पताल आया था लेकिन डॉक्टर ने दोपहर को आने की बात कहकर वापस भेज दिया। करीब दो बजे दोपहर को अस्पताल के बाहर पहुंचे तो अस्पताल का दरवाजा भीतर से बंद था। उधर, पप्पू की हालत बिगड़ रही थी।
बार-बार चिल्लाने के बाद भी अस्पताल के कर्मचारियों ने अस्पताल का दरवाजा नहीं खोला। बाद में उन्होंने पप्पू की बेहोशी को देखते हुए करीब चार बजे कंट्रोल रूम में फोन कर पुलिस को सूचित किया गया।
इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल पहुंच कर दरवाजा खुलवाया। इसके बाद एक महिला रोग विशेषज्ञ ने पप्पू को चेक किया लेकिन तब तक पप्पू दम तोड़ चुका था।
परिजनाें का आरोप है कि पप्पू की मौत डॉक्टरों की लापरवाही के कारण हुई है। इस मामले में अस्पताल की डॉक्टर का कहना है कि दोहपर ढाई बजे तक वह अस्पताल में थी।
इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। परिजन करीब साढे़ तीन बजे उसे लेकर पहुंचे थे तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। लापरवाही जैसा मामला नहीं है। परिजनों के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उधर, पुलिस का कहना है कि परिजनों ने शिकायत दी है और वह मामले की जांच कर रहे हैं।