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पंचायती जमीन पर कम्युनिटी सेंटर बनाने के विरोध में काटा बवाल
ब्यूरो/अमर उजाला/करनाल
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:28 AM IST
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गांव बुढ़ेड़ा खालसा में पंचायत जमीन पर कम्युनिटी सेंटर बनाने के विरोध में शुक्रवार को समस्त अंबेडकर सभा के सदस्यों ने बवाल काटा। भीड़ इतनी उग्र हो गई कि उन्होंने लघु सचिवालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर जाम लगा दिया और वहीं पर डेरा जमा लिया। सैकड़ों की संख्या में युवकों और महिलाओं ने तीन घंटे तक यहां पर नारेबाजी की और डीसी, एसडीएम समेत नीलोखेड़ी के बीडीपीओ व बुटाना थाना प्रभारी के खिलाफ भड़ास निकाली। इतना ही नहीं, दोपहर को लंच पर जा रहे एक जज, बीडीपीओ व अन्य अधिकारियों की गाड़ियों का घेराव कर लिया और आखिरकार उन्हें रोक लिया। इस दौरान कई बुजुर्ग और महिलाओं ने भी प्रदर्शनकारियों के हाथ जोड़े, लेकिन उन्होंने किसी को आगे नहीं जाने दिया। एक तरह से दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक पूरे लघु सचिवालय को लोगों ने बंधक बनाकर रखा। खास बात यह है कि पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रही।
शुक्रवार दोपहर को सभा के सैकड़ों की संख्या में सदस्य कर्ण पार्क में इकट्ठा हुए और उसके बाद शहर में जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। युवकों ने पहले सचिवालय में अंदर से बाहर आने वाली गाड़ियों को रोक दिया। इसके बाद परिसर के अंदर बैठकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ बवाल काटा। प्रदर्शनकारियों के बवाल काटने के लगभग डेढ़ घंटे बाद जिला राजस्व अधिकारी राजबीर धीमान उनके बीच पहुंचे और बातचीत की। प्रदर्शन में आई महिलाओं ने अधिकारी को प्रशासन के नाम चूड़ियां थमा दीं। प्रदर्शनकारी बार बार मांग करते रहे कि डीसी और एसडीएम बीच में आएं, लेकिन काफी देर बाद भी वे नहीं आए तो युवक आपा खो बैठे। इसके बाद वे लघु सचिवालय से बाहर निकल आए और मुख्य गेट पर बैठकर जाम लगा दिया। इस दौरान लंच पर जाने के लिए जैसे ही अधिकारियों की गाड़ी वहां पर पहुंची तो युवक सड़क पर लेट गए। इस दौरान एक जज, बीडीपीओ, आईएएस प्रीति सभ्रवाल व अन्य अधिकारियों की गाड़ियों का घेराव कर लिया। आखिरकार सभी को अपनी गाड़ियां पीछे करनी पड़ीं। करीब डेढ़ घंटे तक यही ड्रामा चलता रहा। जिसकी भी गाड़ी आती, उसे ही रोक लिया जाता। इतना ही नहीं स्कूटर व अन्य वाहनों पर आए बुजुर्ग और महिलाओं तक को युवकों ने न तो लघु सचिवालय से बाहर जाने दिया और न ही अंदर जाने दिया।
शाम चार बजे एसडीएम योगेश कुमार लोगों के बीच में पहुंचे तो उन्होंने आश्वासन दिया। इसके बाद समाज के कुछ सदस्यों के साथ एसडीएम ने बैठक कर समाधान का आश्वासन दिया तो युवकों ने जाम खोला। प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में युवा व महिलाएं शामिल रहे।
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बाक्स
ये कैसा सम्मान
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि एक तरफ तो प्रदेश सरकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती मना रही है। दूसरी तरफ दबंगों की ओर से अंबेडकर की मूर्तियों को खंडित किया जा रहा है। भवन बनाया जाए तो उसे रोका जाता है। कृष्ण कुटेल, सलिंद्र, रत्नलाल बनवाल, रविंद्र कुमार, विनोद कुमार, अमर सिंह का कहना है कि जातीय रंजिश के कारण हमारे समाज के ही लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। प्रशासन और सरकार दलितों पर अन्याय करा रहे हैं। इसके कतई सहन नहीं किया जाएगा। ओमप्रकाश, बलवान, वकील का कहना है कि अब वे अत्याचार सहन नहीं करेंगे।
ये है पूरा मामला
नीलोखेड़ी के गांव बुढेड़ा खालसा में पंचायती जमीन पर पंचायत की ओर से कम्यूनिटी सेंटर बनाया जा रहा है। अंबेडकर सभा के लोगों ने आरोप लगाया कि वह जमीन गांव के पूर्व सरपंच ने उनको अंबेडकर भवन बनवाने के लिए दी थी। इसके लिए पंचायत ने रेजूलेशन भी पास किया था, लेकिन मौजूदा सरपंच और प्रशासन के अधिकारियों ने मिलीभगत करके वहां कम्यूनिटी सेंटर का काम शुरू कर दिया। सभा के लोगों का आरोप है कि उस जमीन पर सभा के लोगों ने तिरंगा लगाया था। प्रशासन के अधिकारियों और पंचायत ने झंडे को वहां से उखाड़कर देश का अपमान किया। प्रशासन के अधिकारियों ने उनके खिलाफ ही झूठा केस दर्ज कर उन्हें फंसा दिया। इससे उनके समाज के लोगों में रोष है।
गांव में है तनाव का माहौल, पुलिस तैनात
4 अक्तूबर को गांव में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच झड़प होने के बाद से ही गांव में तनाव का माहौल है। उसी दिन से भारी पुलिस बल तैनात है। सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में 23 लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया गया है। उसी दिन से कम्यूनिटी सेंटर का काम रोक दिया गया है। गांव में भारी तनाव के चलते उसी दिन से पुलिस बल तैनात है।
गांव में जिस जमीन पर कम्यूनिटी सेंटर बनाया जा रहा है, पूर्व सरपंच ने उसके लिए कोई रेजूलेशन पास नहीं किया था और न ही किसी को दी थी। 27 सितंबर को गांव में कम्यूनिटी सेंटर बनाने काम शुरू किया गया था। गांव के कुछ लोगों ने 4 अक्तूबर सुबह लगभग ढाई बजे तिरंगा लगा दिया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने वह ध्वज वहां से खुद हटाया था। लोगों ने प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस पर पथराव कर दिया था। इससे प्रशासन की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है। चार दिन पूर्व भी लोगों ने उस जमीन पर झंडा लगा दिया है।
-राजवंती, सरपंच, गांव बुढेड़ा खालसा, करनाल
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शुक्रवार दोपहर को सभा के सैकड़ों की संख्या में सदस्य कर्ण पार्क में इकट्ठा हुए और उसके बाद शहर में जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। युवकों ने पहले सचिवालय में अंदर से बाहर आने वाली गाड़ियों को रोक दिया। इसके बाद परिसर के अंदर बैठकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ बवाल काटा। प्रदर्शनकारियों के बवाल काटने के लगभग डेढ़ घंटे बाद जिला राजस्व अधिकारी राजबीर धीमान उनके बीच पहुंचे और बातचीत की। प्रदर्शन में आई महिलाओं ने अधिकारी को प्रशासन के नाम चूड़ियां थमा दीं। प्रदर्शनकारी बार बार मांग करते रहे कि डीसी और एसडीएम बीच में आएं, लेकिन काफी देर बाद भी वे नहीं आए तो युवक आपा खो बैठे। इसके बाद वे लघु सचिवालय से बाहर निकल आए और मुख्य गेट पर बैठकर जाम लगा दिया। इस दौरान लंच पर जाने के लिए जैसे ही अधिकारियों की गाड़ी वहां पर पहुंची तो युवक सड़क पर लेट गए। इस दौरान एक जज, बीडीपीओ, आईएएस प्रीति सभ्रवाल व अन्य अधिकारियों की गाड़ियों का घेराव कर लिया। आखिरकार सभी को अपनी गाड़ियां पीछे करनी पड़ीं। करीब डेढ़ घंटे तक यही ड्रामा चलता रहा। जिसकी भी गाड़ी आती, उसे ही रोक लिया जाता। इतना ही नहीं स्कूटर व अन्य वाहनों पर आए बुजुर्ग और महिलाओं तक को युवकों ने न तो लघु सचिवालय से बाहर जाने दिया और न ही अंदर जाने दिया।
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शाम चार बजे एसडीएम योगेश कुमार लोगों के बीच में पहुंचे तो उन्होंने आश्वासन दिया। इसके बाद समाज के कुछ सदस्यों के साथ एसडीएम ने बैठक कर समाधान का आश्वासन दिया तो युवकों ने जाम खोला। प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में युवा व महिलाएं शामिल रहे।
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प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि एक तरफ तो प्रदेश सरकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती मना रही है। दूसरी तरफ दबंगों की ओर से अंबेडकर की मूर्तियों को खंडित किया जा रहा है। भवन बनाया जाए तो उसे रोका जाता है। कृष्ण कुटेल, सलिंद्र, रत्नलाल बनवाल, रविंद्र कुमार, विनोद कुमार, अमर सिंह का कहना है कि जातीय रंजिश के कारण हमारे समाज के ही लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। प्रशासन और सरकार दलितों पर अन्याय करा रहे हैं। इसके कतई सहन नहीं किया जाएगा। ओमप्रकाश, बलवान, वकील का कहना है कि अब वे अत्याचार सहन नहीं करेंगे।
ये है पूरा मामला
नीलोखेड़ी के गांव बुढेड़ा खालसा में पंचायती जमीन पर पंचायत की ओर से कम्यूनिटी सेंटर बनाया जा रहा है। अंबेडकर सभा के लोगों ने आरोप लगाया कि वह जमीन गांव के पूर्व सरपंच ने उनको अंबेडकर भवन बनवाने के लिए दी थी। इसके लिए पंचायत ने रेजूलेशन भी पास किया था, लेकिन मौजूदा सरपंच और प्रशासन के अधिकारियों ने मिलीभगत करके वहां कम्यूनिटी सेंटर का काम शुरू कर दिया। सभा के लोगों का आरोप है कि उस जमीन पर सभा के लोगों ने तिरंगा लगाया था। प्रशासन के अधिकारियों और पंचायत ने झंडे को वहां से उखाड़कर देश का अपमान किया। प्रशासन के अधिकारियों ने उनके खिलाफ ही झूठा केस दर्ज कर उन्हें फंसा दिया। इससे उनके समाज के लोगों में रोष है।
गांव में है तनाव का माहौल, पुलिस तैनात
4 अक्तूबर को गांव में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच झड़प होने के बाद से ही गांव में तनाव का माहौल है। उसी दिन से भारी पुलिस बल तैनात है। सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में 23 लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया गया है। उसी दिन से कम्यूनिटी सेंटर का काम रोक दिया गया है। गांव में भारी तनाव के चलते उसी दिन से पुलिस बल तैनात है।
गांव में जिस जमीन पर कम्यूनिटी सेंटर बनाया जा रहा है, पूर्व सरपंच ने उसके लिए कोई रेजूलेशन पास नहीं किया था और न ही किसी को दी थी। 27 सितंबर को गांव में कम्यूनिटी सेंटर बनाने काम शुरू किया गया था। गांव के कुछ लोगों ने 4 अक्तूबर सुबह लगभग ढाई बजे तिरंगा लगा दिया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने वह ध्वज वहां से खुद हटाया था। लोगों ने प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस पर पथराव कर दिया था। इससे प्रशासन की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है। चार दिन पूर्व भी लोगों ने उस जमीन पर झंडा लगा दिया है।
-राजवंती, सरपंच, गांव बुढेड़ा खालसा, करनाल