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पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने भी तिरंगा लेकर किया बॉर्डर पार
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पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने भी तिरंगा लेकर किया बॉर्डर पार
- यूक्रेन से लौटे तरावड़ी के हार्दिक और हर्षित ने बताई आपबीती
- बोले, तनाव में बीते दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। मॉडल टाउन निवासी हार्दिक और हर्षित भी यूक्रेन से घर लौटे हैं। घर पहुंचने पर परिवार भी खुश है। वहां के हालात के बारे में बताते हुए दोनों ने कहा कि पाकिस्तानी विद्यार्थी भी हाथ में तिरंगा झंडा लेकर आगे बढ़े तभी वे भी बॉर्डर पार कर पाए। घर पहुंचने पर परिवार ने दोनों बच्चों की आरती उतारी और गले लगाकर स्वागत किया। विद्यार्थियों ने बताया कि वे कोडेसा मेडिकल नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे थे। उनकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था। दोनों ने बताया कि युद्ध के कारण कई दिन से भारतीय छात्रों को वहां से निकलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। चारों तरफ गोलाबारी की आवाजें सुनाई दे रही है। लोग सहमे हैं। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को यूक्रेन से निकले थे। वहां से ट्रेन से हंगरी पहुंचे और वहां भारतीय एंबेसी ने उनके खाने और रहने का इंतजाम किया। इसके बाद वे एक रात हंगरी में ठहरे। बुधवार सुबह पांच बजे उनकी फ्लाइट थी और साढ़े आठ घंटे के सफर के बाद सुबह तीन बजे दिल्ली पहुंचे।
भारतीय ध्वज देखकर यूक्रेन की सेना ने नहीं रोका
हार्दिक और हर्षित ने बताया कि हमारे देश के झंडे को देखकर यूक्रेन की सेना किसी भी बस को रोका नहीं। वहीं रूस के सैनिक भी भारतीय विद्यार्थियों को जाने दे रहे थे। इसी बात का फायदा उठाकर पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने भी हाथों में तिरंगा ले लिया। इसकी आड़ में वहां से निकल रहे हैं। बच्चों ने बताया कि उनके साथ अन्य कई देशों के विद्यार्थी भी बॉर्डर तक पहुंचे।
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पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने भी तिरंगा लेकर किया बॉर्डर पार
- यूक्रेन से लौटे तरावड़ी के हार्दिक और हर्षित ने बताई आपबीती
- बोले, तनाव में बीते दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। मॉडल टाउन निवासी हार्दिक और हर्षित भी यूक्रेन से घर लौटे हैं। घर पहुंचने पर परिवार भी खुश है। वहां के हालात के बारे में बताते हुए दोनों ने कहा कि पाकिस्तानी विद्यार्थी भी हाथ में तिरंगा झंडा लेकर आगे बढ़े तभी वे भी बॉर्डर पार कर पाए। घर पहुंचने पर परिवार ने दोनों बच्चों की आरती उतारी और गले लगाकर स्वागत किया। विद्यार्थियों ने बताया कि वे कोडेसा मेडिकल नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे थे। उनकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था। दोनों ने बताया कि युद्ध के कारण कई दिन से भारतीय छात्रों को वहां से निकलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। चारों तरफ गोलाबारी की आवाजें सुनाई दे रही है। लोग सहमे हैं। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को यूक्रेन से निकले थे। वहां से ट्रेन से हंगरी पहुंचे और वहां भारतीय एंबेसी ने उनके खाने और रहने का इंतजाम किया। इसके बाद वे एक रात हंगरी में ठहरे। बुधवार सुबह पांच बजे उनकी फ्लाइट थी और साढ़े आठ घंटे के सफर के बाद सुबह तीन बजे दिल्ली पहुंचे।
भारतीय ध्वज देखकर यूक्रेन की सेना ने नहीं रोका
हार्दिक और हर्षित ने बताया कि हमारे देश के झंडे को देखकर यूक्रेन की सेना किसी भी बस को रोका नहीं। वहीं रूस के सैनिक भी भारतीय विद्यार्थियों को जाने दे रहे थे। इसी बात का फायदा उठाकर पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने भी हाथों में तिरंगा ले लिया। इसकी आड़ में वहां से निकल रहे हैं। बच्चों ने बताया कि उनके साथ अन्य कई देशों के विद्यार्थी भी बॉर्डर तक पहुंचे।
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