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अनदेखी : कांवड़ियों की राह में कंकड़
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- घीड़, शेरगढ़ और टापू के रास्ते गंगोह जाने वाला मार्ग जर्जर जबकि यूपी सीमा के प्रवेशद्वार से गंगा घाट तक सड़क चकाचक
- 143 किलोमीटर की सुगम यात्रा में महज तीन किमी की पथरीली डगर शिवभक्तों के लिए बनी परेशानी
गगन तलवार
करनाल। सावन माह में हरिद्वार जाने वाले शिवभक्तों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बेहतर इंतजाम किए हैं, कई जगहों पर कांवड़ियों का फूलों से स्वागत हो रहा है। लेकिन हरि की धरा हरियाणा के अधिकारी कांवड़ियों की राह तक सुगम नहीं बना पाए। कर्ण नगरी को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले रास्ते पर कांवड़ियों को कंकड़ों से गुजरना पड़ रहा है।
करनाल से हरिद्वार की दूरी 143 किलोमीटर है। उत्तर प्रदेश में पड़ने वाले इस पूरे रास्ते में सड़क चकाचक है लेकिन करनाल जिले को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाला महज तीन किलोमीटर की डगर पथरीली है। घीड़, शेरगढ़ और टापू के रास्ते उत्तर प्रदेश के गंगोह की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह से उखड़ी है।
गंगा जल लाने के लिए करनाल से हरिद्वार तक यही सबसे छोटा रास्ता है और यही सड़क सबसे ज्यादा खराब है। इस रास्ते से हजारों की संख्या में करनाल व अन्य जिलों के कांवड़िये हरिद्वार जाते हैं। यह हालात भी तब हैं, जब उखड़ी सड़क के नव निर्माण के लिए पिछले दिनों इंद्री के विधायक शिलान्यास कर चुके हैं। इसके बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है।
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इधर, घीड़ क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई वर्षों से सड़क की हालत खराब है, प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि हरियाणा क्षेत्र में ही सड़क खराब है। जबकि उत्तर प्रदेश सीमा में प्रवेश करते ही सड़क नई बनी है। इसके अलावा हरिद्वार जाने के लिए इंद्री मार्ग से यमुनानगर के रास्ते भी जा सकते हैं, लेकिन ये रास्ता लंबा पड़ता है।
तीन किमी सड़क बनाने में लगेंगे नौ महीने
पिछले दिनों हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी इस सड़क के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इस पर एडीसी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से जवाब तलबी की तो उन्होंने कहा कि शीघ्र काम शुरू हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने दावा किया कि नए सिरे से सड़क बनाने में करीब नौ महीने तक का समय लगेगा। इधर, लोगों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि नौ माह के अंतराल में तो मार्च माह की महाशिवरात्रि भी पड़ती है, ऐसे में तब भी कांवड़िये दिक्कत झेलेंगे।
इस मार्ग पर पड़ते हैं 28 गांव
घीड़, शेरगढ़ टापू के रास्ते गंगोह को जोड़ने वाला मार्ग हरियाणा और उत्तर प्रदेश को करनाल से जोड़ता है, यह प्रमुख मार्ग है। करनाल, इंद्री और कुंजपुरा खंड के करीब 28 गांव इस मार्ग पर पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में एक ही पार्टी की सरकार है तो भी सड़क अभी तक नहीं बन पाई। जबकि इंद्री रोड और मेरठ राजमार्ग से यूपी को जोड़ने वाले रास्ते पर नई सड़क बनी है।
घीड़ गांव से शेरगढ़ टापू तक लगभग 1.20 करोड़ रुपये की लागत से सड़क बनाई जाएगी। इसका शिलान्यास हो चुका है। काम को तेजी से पूरा किया जाएगा। लोकसभा चुनाव के कारण पहले काम शुरू नहीं हो पाया, अब इसे तेजी से पूरा करेंगे। सड़क के साथ पुलिया का भी निर्माण होना है।
- संदीप सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी
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- 143 किलोमीटर की सुगम यात्रा में महज तीन किमी की पथरीली डगर शिवभक्तों के लिए बनी परेशानी
गगन तलवार
करनाल। सावन माह में हरिद्वार जाने वाले शिवभक्तों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बेहतर इंतजाम किए हैं, कई जगहों पर कांवड़ियों का फूलों से स्वागत हो रहा है। लेकिन हरि की धरा हरियाणा के अधिकारी कांवड़ियों की राह तक सुगम नहीं बना पाए। कर्ण नगरी को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले रास्ते पर कांवड़ियों को कंकड़ों से गुजरना पड़ रहा है।
करनाल से हरिद्वार की दूरी 143 किलोमीटर है। उत्तर प्रदेश में पड़ने वाले इस पूरे रास्ते में सड़क चकाचक है लेकिन करनाल जिले को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाला महज तीन किलोमीटर की डगर पथरीली है। घीड़, शेरगढ़ और टापू के रास्ते उत्तर प्रदेश के गंगोह की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह से उखड़ी है।
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गंगा जल लाने के लिए करनाल से हरिद्वार तक यही सबसे छोटा रास्ता है और यही सड़क सबसे ज्यादा खराब है। इस रास्ते से हजारों की संख्या में करनाल व अन्य जिलों के कांवड़िये हरिद्वार जाते हैं। यह हालात भी तब हैं, जब उखड़ी सड़क के नव निर्माण के लिए पिछले दिनों इंद्री के विधायक शिलान्यास कर चुके हैं। इसके बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है।
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इधर, घीड़ क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई वर्षों से सड़क की हालत खराब है, प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि हरियाणा क्षेत्र में ही सड़क खराब है। जबकि उत्तर प्रदेश सीमा में प्रवेश करते ही सड़क नई बनी है। इसके अलावा हरिद्वार जाने के लिए इंद्री मार्ग से यमुनानगर के रास्ते भी जा सकते हैं, लेकिन ये रास्ता लंबा पड़ता है।
तीन किमी सड़क बनाने में लगेंगे नौ महीने
पिछले दिनों हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी इस सड़क के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इस पर एडीसी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से जवाब तलबी की तो उन्होंने कहा कि शीघ्र काम शुरू हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने दावा किया कि नए सिरे से सड़क बनाने में करीब नौ महीने तक का समय लगेगा। इधर, लोगों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि नौ माह के अंतराल में तो मार्च माह की महाशिवरात्रि भी पड़ती है, ऐसे में तब भी कांवड़िये दिक्कत झेलेंगे।
इस मार्ग पर पड़ते हैं 28 गांव
घीड़, शेरगढ़ टापू के रास्ते गंगोह को जोड़ने वाला मार्ग हरियाणा और उत्तर प्रदेश को करनाल से जोड़ता है, यह प्रमुख मार्ग है। करनाल, इंद्री और कुंजपुरा खंड के करीब 28 गांव इस मार्ग पर पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में एक ही पार्टी की सरकार है तो भी सड़क अभी तक नहीं बन पाई। जबकि इंद्री रोड और मेरठ राजमार्ग से यूपी को जोड़ने वाले रास्ते पर नई सड़क बनी है।
घीड़ गांव से शेरगढ़ टापू तक लगभग 1.20 करोड़ रुपये की लागत से सड़क बनाई जाएगी। इसका शिलान्यास हो चुका है। काम को तेजी से पूरा किया जाएगा। लोकसभा चुनाव के कारण पहले काम शुरू नहीं हो पाया, अब इसे तेजी से पूरा करेंगे। सड़क के साथ पुलिया का भी निर्माण होना है।
- संदीप सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी