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पांच गांवों के ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक पर काटा बवाल, सैकड़ों हिरासत में

Tue, 05 Nov 2013 10:17 PM IST
करनाल
करनाल Updated Tue, 05 Nov 2013 10:17 PM IST
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Organically harvested by the villagers of five villages on railway tracks, hundreds detained
करनाल के घरौंडा क्षेत्र के पांच गांवों में पिछले कई माह से चल रहा गलत चकबंदी का विवाद मंगलवार को दोबारा तूल पकड़ गया। बार-बार प्रशासन के आश्वासनों से परेशान अराईपुरा, भरतपुरा, कालरम, अमृतपुर और कैरवाली के ग्रामीणों ने मंगलवार को महिलाओं व बच्चों समेत सैकड़ों की संख्या मेें करनाल रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से अमृतसर जाने वाला रेलवे ट्रैक जाम कर दिया।
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प्रदर्शनकारियों ने गोरक्षक संत गोपालदास की अगुवाई में ट्रैक पर ही बवाल काटा। मौके पर ही प्रदर्शनकारियों ने सोमवार की रात में पंचायती सांड को मारे जाने पर भी रोष जताया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और करनाल के प्रशासनिक अधिकारियों डीसी और एसपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।
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ग्रामीणों ने बार-बार आश्वासन देने वाले पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों का आग्रह सुनने से भी इंकार कर दिया लेकिन डीएसपी मुख्यालय ने कडे़ प्रयास कर किसी तरह संत गोपालदास और अन्य लोगों को मनाकर सवा घंटे बाद रेलवे ट्रैक खाली करवा दिया। इसके बाद पुलिस ने ट्रैक खाली करते ही संत गोपालदास, बाबा जगमंदर दास, इंडिया अगेंस्ट क्रप्शन के सदस्य एडवोकेट जेपी शेखपुरा समेत सैकड़ों बच्चों, महिलाआें और ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ लात घूंसों के साथ बल का प्रयोग किया।
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इसी दौरान कई मीडियाकर्मियों के साथ भी सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की। उन लोगों के काम में बाधा डाली। मंगलवार दो बजकर 47 मिनट पर संत गोपालदास के नेतृत्व में सैकड़ों महिला पुरुषों ने अपने हक की आवाज को बुलंद करते हुए ट्रैक जाम कर दिया। इन लोगों ने दिल्ली से अमृतसर को जाने वाले ट्रैक पर जाम लगाया। जाम के दौरान प्रदर्शनकारियों से 50 मीटर की दूरी पर शहीद एक्सप्रेस को रोक दिया गया।

शहीद एक्सप्रेस करीब सवा घंटा करनाल रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही। चार बजे रेलवे ट्रैक खुलने के बाद ही यह ट्रेन रवाना हुई। जाम के दौरान संत गोपालदास, उपलाना गोशाला के संरक्षक बाबा जगमंदर दास, जेपी शेखपुरा और ग्रामीणों को प्रमुखता के साथ पक्ष रखने वाले प्रदीप कुमार समेत तमाम प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक पर मुख्यमंत्री और करनाल के डीसी व एसपी के खिलाफ नारेबाजी की।

संत गोपालदास की अगुवाई में ग्रामीणों ने साफ कहा कि उन लोगों को पुलिस अधीक्षक समेत करनाल के किसी अधिकारी पर भरोसा नहीं है, जबकि डीएसपी मुख्यालय जोगेंद्र राठी ने संत गोपाल दास को अधिकारियों के उन लोगों के खिलाफ नहीं होने की सफाई दी। किसी तरह डीएसपी राठी प्रदर्शनकारियों को सवा घंटे के कडे़ प्रयास के बाद ट्रैक से उठाने में कामयाब रहे। शांतिपूर्वक ढंग से ट्रैक खाली कराने के बाद लोग प्लेटफार्म पर पहुंचे तो पहले से ही पुलिस छावनी में तब्दील हुए स्टेशन पर मौजूद पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को घेर लिया।

उन लोगों को रेलवे स्टेशन से बाहर लाया गया। उन लोगों को वहीं से हिरासत में लिया गया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रेलवे प्लेटफार्म पर ही चेतावनी दी थी कि 15 नवंबर तक उन लोगों की सुनवाई नहीं हुई तो वे लोग राष्ट्रपति भवन के सामने कड़ा विरोध करेंगे। इससे पूर्व वह लोग रेलवे ट्रैक पर भी राष्ट्रपति भवन के सामने जान देने की धमकी दे चुके थे।

सांड़ की हत्या का आरोप
मामला पूरी तरह गंभीर हो गया था। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान डीसी विकास यादव और पुलिस अधीक्षक शशांक आनंद भी मौके पर पहुंच गए थे। उनसे पूर्व मौके पर एसडीएम मुकुल कुमार, तहसीदार हरीओम अत्री, इंद्री की नायब तहसीलदार समेत भारी पुलिस बल मौजूद था। ग्रामीणोें ने कहा कि चकबंदी का मामला पूरा चल रहा है।

सरकार और प्रशासन के नोटिस में है। आरोप है कि पुलिस प्रशासन दूसरे पक्ष के साथ मिलकर उन लोगों पर ज्यादती कर रहा है। दो दिन पहले पांच गांवों के लोगों ने यज्ञ करने के बाद एक सांड को छोड़ा था। संत गोपालदास ने आरोप लगाया कि मंगलवार की रात में सांड पर दूसरे लोगों ने मशीन चढ़ाकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी अपना ट्रैक्टर और बाइक मौके पर छोड़कर भागे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन लोगों पर रात में ही लाठीचार्ज किया। डीएसपी राठी को ग्रामीणों ने लोगों पर हुए लाठीचार्ज के दौरान लगी चोट के निशान भी दिखाए। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने एक पुलिसकर्मी की टोपी भी उनके कब्जे में डीएसपी को दिखाई। समाचार लिखे जाने तक यह जानकारी नहीं मिल सकी कि कितने लोगों को हिरासत में लिया गया लेकिन इतना जरूर है कि मामला मुख्यमंत्री के नोटिस में भी लाया गया है। संत गोपालदास ने भी सीएम से बात करने का प्रयास किया लेकिन उनकी बात नहीं हो सकी।

नहीं दिया कोई आश्वासन-प्रशासन
रेलवे स्टेशन पर पहुंचे डीसी विकास यादव और पुलिस अधीक्षक शशांक  आनंद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को किसी प्रकार का आश्वासन नहीं दिया गया है। पूरा मामला दोनों पक्षों में है। मामला पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है। अब भी मामला हाईकोर्ट में है।

इस मामले में इन लोगों ने रेलवे ट्रैक को रोका। प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मीडिया के लोगों से हुई मारपीट के मामले में दोनों अधिकारियों ने कहा कि ज्यादती करने वाले पुलिसकर्मियों को नहीं बख्शा जाएगा। शिकायत और सीडी उन्हें सौंपी जाए। मामले की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। एसपी ने कहा कि पुलिसकर्मी ने अगर कुछ गलत किया है तो सस्पेंड किया जाएगा।


डीसी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपने मामले में लघु सचिवालय पहुंचना था लेकिन वे लोग रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। रेलवे अधीक्षक रमेश माथुर के अनुसार 2 बजकर 47 मिनट पर प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक जाम कर दिया था। चार बजे दोबारा ट्रैक चालू हुआ। इस दौरान शहीद एक्सप्रेस और सुपरफास्ट 12459 प्रभावित हुई है। 
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