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Karnal News: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर खोला निर्जला व्रत
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। श्रद्धा और आस्था का त्योहार छठ पर्व शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। लोगों ने श्रद्धा और आस्था की डुबकी लगाकर परिवार, समाज और देश की सुख समृद्धि की कामना की। जिले भर में त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
कर्ण नगरी में पश्चिमी यमुना नहर के घाटों पर अल सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना आरंभ हो गया था। सूर्य देव के दर्शन होने तक श्रद्धालुओं ने पानी में खड़े होकर सूर्य की पहली किरण (ऊषा) का इंतजार किया। ठंड के बावजूद भी श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। सुबह 6:39 पर सूर्यदेव की दर्शन होने के साथ ही श्रद्धालुओं ने अर्घ्य दिया। इसके बाद महिला और पुरुषों ने सूर्य मंदिर में माथा टेक प्रसाद ग्रहण करते हुए 36 घंटे का व्रत पूरा किया।
छठ पर्व सेवा समिति मंडल की ओर से पश्चिमी यमुना नहर के किनारे स्थित सूर्य मंदिर में महा छठ पर्व महोत्सव मनाया गया। वीरवार को ज्यादातर श्रद्धालुओं ने संध्या अर्घ्य देने के बाद घाट पर ही रात बिताई। श्रद्धालुओं ने रात भर सूर्य देव और छठ माता की महिमा का गुणगान किया। छठ मईया के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। वहीं कई श्रद्धालु उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सुबह करीब तीन बजे के बाद घाट पर पहुंचे।
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छठ माता के गीतों पर नाचते गाते हुए भक्तों की टोलियां नहर पर पहुंचीं। मान्यता अनुसार सूर्य के साथ उनकी दोनों शक्तियों की छठ पर्व पर आराधना की जाती है। वीरवार को श्रद्धालुओं ने सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर नमन किया। जबकि शुक्रवार को सूर्य की पहली किरण (ऊषा) को अर्घ्य देकर भगवान की आराधना की गई।
इस अर्घ्य के बाद ही उनका व्रत संपन्न हुआ। अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालुओं ने सूर्य मंदिर में जाकर अपना व्रत खोला। मंदिर में माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। सूर्य देव और छठ मईया के जयकारे गूंजे। इसके बाद छठ गीत गाते हुए अपने-अपने घर को विदा हुए।
दूधिया रोशनी में नहाये घाट
पर्व के चलते पश्चिमी यमुना नदी पर विशेष घाट बनाए गए थे। काछवा पुल से लेकर कैथल पुल तक करीब ढाई किलोमीटर के एरिया में बने घाटों को विभिन्न लाइटों से विशेष रूप से सजाया गया। सुबह सूर्योदय से पहले घाट लाइटों की दूधिया रोशनी में नहाये दिखे। वहीं जाम की स्थिति भी बनी रही। इस दौरान वाहनों की भी कतार लगी रही। हालांकि मंदिर में पूजा के बाद भीड़ छंटनी शुरू हो गई।
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करनाल। श्रद्धा और आस्था का त्योहार छठ पर्व शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। लोगों ने श्रद्धा और आस्था की डुबकी लगाकर परिवार, समाज और देश की सुख समृद्धि की कामना की। जिले भर में त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
कर्ण नगरी में पश्चिमी यमुना नहर के घाटों पर अल सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना आरंभ हो गया था। सूर्य देव के दर्शन होने तक श्रद्धालुओं ने पानी में खड़े होकर सूर्य की पहली किरण (ऊषा) का इंतजार किया। ठंड के बावजूद भी श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। सुबह 6:39 पर सूर्यदेव की दर्शन होने के साथ ही श्रद्धालुओं ने अर्घ्य दिया। इसके बाद महिला और पुरुषों ने सूर्य मंदिर में माथा टेक प्रसाद ग्रहण करते हुए 36 घंटे का व्रत पूरा किया।
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छठ पर्व सेवा समिति मंडल की ओर से पश्चिमी यमुना नहर के किनारे स्थित सूर्य मंदिर में महा छठ पर्व महोत्सव मनाया गया। वीरवार को ज्यादातर श्रद्धालुओं ने संध्या अर्घ्य देने के बाद घाट पर ही रात बिताई। श्रद्धालुओं ने रात भर सूर्य देव और छठ माता की महिमा का गुणगान किया। छठ मईया के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। वहीं कई श्रद्धालु उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सुबह करीब तीन बजे के बाद घाट पर पहुंचे।
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छठ माता के गीतों पर नाचते गाते हुए भक्तों की टोलियां नहर पर पहुंचीं। मान्यता अनुसार सूर्य के साथ उनकी दोनों शक्तियों की छठ पर्व पर आराधना की जाती है। वीरवार को श्रद्धालुओं ने सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर नमन किया। जबकि शुक्रवार को सूर्य की पहली किरण (ऊषा) को अर्घ्य देकर भगवान की आराधना की गई।
इस अर्घ्य के बाद ही उनका व्रत संपन्न हुआ। अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालुओं ने सूर्य मंदिर में जाकर अपना व्रत खोला। मंदिर में माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। सूर्य देव और छठ मईया के जयकारे गूंजे। इसके बाद छठ गीत गाते हुए अपने-अपने घर को विदा हुए।
दूधिया रोशनी में नहाये घाट
पर्व के चलते पश्चिमी यमुना नदी पर विशेष घाट बनाए गए थे। काछवा पुल से लेकर कैथल पुल तक करीब ढाई किलोमीटर के एरिया में बने घाटों को विभिन्न लाइटों से विशेष रूप से सजाया गया। सुबह सूर्योदय से पहले घाट लाइटों की दूधिया रोशनी में नहाये दिखे। वहीं जाम की स्थिति भी बनी रही। इस दौरान वाहनों की भी कतार लगी रही। हालांकि मंदिर में पूजा के बाद भीड़ छंटनी शुरू हो गई।