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Karnal News: गलत प्रोपर्टी आइडी बनाने में सहायक को नोटिस देने में निकाला एक महीना
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पानीपत। नगर निगम सदन की बैठक में पार्षदों के हंगामे पर कार्रवाई करने में ही निगम आयुक्त राहुल पुनिया ने एक महीना निकाल दिया। सात अगस्त को हुई सदन की बैठक में वार्ड तीन पार्षद अंजली शर्मा ने गलत तरीके से बनी जो प्रॉपर्टी आइडी पेश की थी, उस पर शुक्रवार को जांच के आदेश जारी किए गए।
निगम आयुक्त ने सहायक सोनू को मंगलवार को रिपोर्ट सहित कार्यालय में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। अगर तसल्ली से मामले की जांच की जाए तो निगम में लाखों करोड़ों रुपये टैक्स की हेराफेरी का भंडाफोड़ होगा। पार्षदों का दावा है कि सहायक सोनू फर्जीवाड़े में शामिल दलालों से लेकर अधिकारियों तक के गिरोह तक पहुंचने के लिए अहम कड़ी बन सकता है।
नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए जहां आम आदमी को कई हफ्तों तक चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं दलाल सरकारी फीस से पांच से आठ गुणा तक ज्यादा रकम लेकर कुछ घंटे में ही प्रॉपर्टी आईडी दे देते हैं। लोगों के कागजातों में छोटी से छोटी कमी पकड़ने वाले सीटों पर बैठे सरकारी कर्मचारी दलालों के हाथों मिली फाइल को कुछ देर में ही पास कर देते हैं। दलालों पर भरोसा इतना होता है कि फाइल चेक करना तक जरूरी नहीं समझते। शायद यही कारण था कि सदन की बैठक में पार्षद अंजली शर्मा इस फर्जीवाड़े का खुलासा कर पाई। अब सहायक सोनू को फाइल संबंधी दस्तावेज लेकर निगम आयुक्त कार्यालय तो बुलाया गया है, लेकिन अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई की बजाए सिर्फ चेतावनी दी गई है। अब देखना ये होगा कि सबूत पेश करने के बावजूद भी निगम आयुक्त भ्रष्टाचार के इस गिरोह का कब तक खुलासा कर पाते हैं।
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निगम आयुक्त ने सहायक सोनू को मंगलवार को रिपोर्ट सहित कार्यालय में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। अगर तसल्ली से मामले की जांच की जाए तो निगम में लाखों करोड़ों रुपये टैक्स की हेराफेरी का भंडाफोड़ होगा। पार्षदों का दावा है कि सहायक सोनू फर्जीवाड़े में शामिल दलालों से लेकर अधिकारियों तक के गिरोह तक पहुंचने के लिए अहम कड़ी बन सकता है।
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नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए जहां आम आदमी को कई हफ्तों तक चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं दलाल सरकारी फीस से पांच से आठ गुणा तक ज्यादा रकम लेकर कुछ घंटे में ही प्रॉपर्टी आईडी दे देते हैं। लोगों के कागजातों में छोटी से छोटी कमी पकड़ने वाले सीटों पर बैठे सरकारी कर्मचारी दलालों के हाथों मिली फाइल को कुछ देर में ही पास कर देते हैं। दलालों पर भरोसा इतना होता है कि फाइल चेक करना तक जरूरी नहीं समझते। शायद यही कारण था कि सदन की बैठक में पार्षद अंजली शर्मा इस फर्जीवाड़े का खुलासा कर पाई। अब सहायक सोनू को फाइल संबंधी दस्तावेज लेकर निगम आयुक्त कार्यालय तो बुलाया गया है, लेकिन अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई की बजाए सिर्फ चेतावनी दी गई है। अब देखना ये होगा कि सबूत पेश करने के बावजूद भी निगम आयुक्त भ्रष्टाचार के इस गिरोह का कब तक खुलासा कर पाते हैं।
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