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Karnal News: आडवाणी की इच्छा पर हरि की भूमि से होकर गुजरी थी श्रीराम रथ यात्रा
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आडवाणी की इच्छा पर हरि की भूमि से होकर गुजरी थी श्रीराम रथ यात्रा
- यात्रा के रूट में हरियाणा से केवल रोहतक जिले को किया गया था शामिल
- पूर्व उप प्रधानमंत्री को भारत रत्न के एलान से सूबे के भाजपाइयों में उत्साह
- सूबे की सियासी गतिविधियों पर रखते थे पैनी नजर, वर्ष 2009 के चुनावी शंखनाद में किया था कायाकल्प का वादा
मोहित धुपड़
करनाल। पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के एलान के बाद हरियाणा के भाजपाइयों में भी उत्साह है। आडवाणी का हरियाणा से विशेष लगाव रहा है। श्रीराम जन्म भूमि की लड़ाई के लिए वर्ष 1990 में आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक श्रीराम रथयात्रा हो या फिर 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में शंखनाद, दोनों अवसरों पर आडवाणी का विशेष प्रेम सूबे को मिला। आडवाणी नियमित हरियाणा के भाजपाइयों से संपर्क में रहते हुए यहां की सियासी गतिविधियों पर पैनी नजर रखते थे और इसी सिलसिले में उनका प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई बार आना-जाना रहा।
उधर, श्रीराम रथ यात्रा की शुरुआत 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से की गई थी। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी इसका नेतृत्व कर रहे थे। इस यात्रा के रूट में गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश , मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के साथ-साथ विशेष रूप से हरियाणा को शामिल किया गया था। भले ही ये रूट बहुत छोटा था मगर बताया जाता है कि आडवाणी चाहते थे कि श्रीराम रथ यात्रा हरि की भूमि यानी हरियाणा से होकर ही दिल्ली में प्रवेश करे। इसलिए इस यात्रा के रूट में हरियाणा को शामिल किया गया।
13 अक्तूबर 1990 को यह रथ यात्रा राजस्थान के खेतड़ी शहर से होती हुई रोहतक पहुंची। उस वक्त इस यात्रा का स्वागत करने के लिए मौजूदा गृहमंत्री व तत्कालीन विधायक अनिल विज समेत हरियाणा भाजपा, आरएसएस व विहिप के कई दिग्गज मौजूद रहे। रोहतक में यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। यहां आडवाणी ने लोगों को श्री रामजन्म भूमि के संघर्ष में शामिल होने के लिए गर्मजोशी से प्रेरित किया। इसके बाद यह रथयात्रा 14 अक्तूबर को दिल्ली पहुंची।
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अंबाला से किया था चुनावी शंखनाद
वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने अंबाला से चुनावी शंखनाद किया था। मुद्दा था हिंदुत्व और प्रदेश के विकास का। अंबाला कैंट के निकल्सन रोड स्थित सदर बाजार चौक पर आडवाणी की पहली चुनावी रैली थी। इस दौरान आडवाणी का अधिकतर भाषण हिंदुत्व के इर्द- गिर्द ही रहा। उन्होंने केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद विकास के मामले में हरियाणा की भी कायाकल्प करने का वादा किया था।
आडवाणी की यह चुनावी रैली इसलिए भी अहम थी क्योंकि वर्ष 1996 में भाजपा से अलग हुए मंत्री अनिल विज की वापसी भी इसी दौरान हुई थी। किसी बात पर नाराज होकर विज ने भाजपा का दामन छोड़ विकास परिषद नाम से राजनीतिक पार्टी बना ली थी, मगर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले करीब 14 साल बाद विज की दोबारा भाजपा में एंट्री कराई गई। बताया जाता है कि विज की वापसी में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की अहम भूमिका थी, क्योंकि विज भी आडवाणी के विश्वास पात्रों में से एक थे।
पूर्व मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफा देकर राज्यसभा में जाने के बाद वर्ष 1990 के उपचुनाव में भी पहली बार अनिल विज ने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज कर अटल और आडवाणी की तारीफ बटोरी थी। इस जीत के बाद बाकायदा विज को दिल्ली बुलाकर आडवाणी ने उनकी पीठ थपथपाई थी। उस वक्त वहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उमा भारती, प्रमोद महाजन समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता शामिल थे। इसके अलावा भी लालकृष्ण आडवाणी का कई बार हरियाणा के विभिन्न जिलों में आना हुआ।
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- यात्रा के रूट में हरियाणा से केवल रोहतक जिले को किया गया था शामिल
- पूर्व उप प्रधानमंत्री को भारत रत्न के एलान से सूबे के भाजपाइयों में उत्साह
- सूबे की सियासी गतिविधियों पर रखते थे पैनी नजर, वर्ष 2009 के चुनावी शंखनाद में किया था कायाकल्प का वादा
मोहित धुपड़
करनाल। पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के एलान के बाद हरियाणा के भाजपाइयों में भी उत्साह है। आडवाणी का हरियाणा से विशेष लगाव रहा है। श्रीराम जन्म भूमि की लड़ाई के लिए वर्ष 1990 में आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक श्रीराम रथयात्रा हो या फिर 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में शंखनाद, दोनों अवसरों पर आडवाणी का विशेष प्रेम सूबे को मिला। आडवाणी नियमित हरियाणा के भाजपाइयों से संपर्क में रहते हुए यहां की सियासी गतिविधियों पर पैनी नजर रखते थे और इसी सिलसिले में उनका प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई बार आना-जाना रहा।
उधर, श्रीराम रथ यात्रा की शुरुआत 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से की गई थी। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी इसका नेतृत्व कर रहे थे। इस यात्रा के रूट में गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश , मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के साथ-साथ विशेष रूप से हरियाणा को शामिल किया गया था। भले ही ये रूट बहुत छोटा था मगर बताया जाता है कि आडवाणी चाहते थे कि श्रीराम रथ यात्रा हरि की भूमि यानी हरियाणा से होकर ही दिल्ली में प्रवेश करे। इसलिए इस यात्रा के रूट में हरियाणा को शामिल किया गया।
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13 अक्तूबर 1990 को यह रथ यात्रा राजस्थान के खेतड़ी शहर से होती हुई रोहतक पहुंची। उस वक्त इस यात्रा का स्वागत करने के लिए मौजूदा गृहमंत्री व तत्कालीन विधायक अनिल विज समेत हरियाणा भाजपा, आरएसएस व विहिप के कई दिग्गज मौजूद रहे। रोहतक में यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। यहां आडवाणी ने लोगों को श्री रामजन्म भूमि के संघर्ष में शामिल होने के लिए गर्मजोशी से प्रेरित किया। इसके बाद यह रथयात्रा 14 अक्तूबर को दिल्ली पहुंची।
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अंबाला से किया था चुनावी शंखनाद
वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने अंबाला से चुनावी शंखनाद किया था। मुद्दा था हिंदुत्व और प्रदेश के विकास का। अंबाला कैंट के निकल्सन रोड स्थित सदर बाजार चौक पर आडवाणी की पहली चुनावी रैली थी। इस दौरान आडवाणी का अधिकतर भाषण हिंदुत्व के इर्द- गिर्द ही रहा। उन्होंने केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद विकास के मामले में हरियाणा की भी कायाकल्प करने का वादा किया था।
आडवाणी की यह चुनावी रैली इसलिए भी अहम थी क्योंकि वर्ष 1996 में भाजपा से अलग हुए मंत्री अनिल विज की वापसी भी इसी दौरान हुई थी। किसी बात पर नाराज होकर विज ने भाजपा का दामन छोड़ विकास परिषद नाम से राजनीतिक पार्टी बना ली थी, मगर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले करीब 14 साल बाद विज की दोबारा भाजपा में एंट्री कराई गई। बताया जाता है कि विज की वापसी में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की अहम भूमिका थी, क्योंकि विज भी आडवाणी के विश्वास पात्रों में से एक थे।
पूर्व मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफा देकर राज्यसभा में जाने के बाद वर्ष 1990 के उपचुनाव में भी पहली बार अनिल विज ने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज कर अटल और आडवाणी की तारीफ बटोरी थी। इस जीत के बाद बाकायदा विज को दिल्ली बुलाकर आडवाणी ने उनकी पीठ थपथपाई थी। उस वक्त वहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उमा भारती, प्रमोद महाजन समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता शामिल थे। इसके अलावा भी लालकृष्ण आडवाणी का कई बार हरियाणा के विभिन्न जिलों में आना हुआ।