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अधिकारियों की अनदेखी से सड़ा लाखों क्विंटल गेहूं
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Sun, 08 Jun 2014 01:08 AM IST
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शहर के लल्याणी रोड पर एक राइस मिल में लगा लाखाें क्विंटल गेहूं हरियाणा एग्रो के अधिकारियों की अनदेखी के कारण सड़ गया। अब सड़े गेहूं से उठने वाली बदबू और उसमें पैदा सुरसरी ने आसपास के लोगाें का जीना मुहाल कर दिया है।
आसपास के लोग जल्द से जल्द इस गेहूं को यहां से उठाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन शायद अभी अधिकारी शायद इस सड़े गेहूं की मिट्टी बनने का इंतजार कर रहे हैं। हरियाणा की एक खरीद एजेंसी हरियाणा एग्रो ने वर्ष 2011 में दो लाख बोरियां गेहूं तरावड़ी मंडी से खरीदकर लल्याणी रोड स्थित किसान राइस मिल में लगाई थीं। इसके बाद अधिकारियों ने इस गेहूं की ओर से आंखें बंद कर ली।
इस अनदेखी के कारण गेहूं बरसात व धूप में खुला पड़ा सड़ता रहा। इस बीच आसपास के लोगों द्वारा अधिकारियों को जगाने की कोशिशें हुईं, लेकिन सब बेकार गई। इसके चलते जिस गेहूं को किसान ने तैयार किया था कि यह किसी के भूखे पेट को भरेगा, वही गेहूं अब सड़ने के बाद जहर बन गया है और उसे फेंकने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। गेहूं के सड़ने के बाद में उसमें भयंकर बदबू हो गई, जिसके चलते इस राइस मिल के पास से गुजरने वाले लोगों को मुंह दबाकर निकलना पड़ता है और अब इसमें पैदा हुई सुरसरी ने आसपास के लोगाें का जीना मुहाल कर दिया है। सुरसरी के कहर से परेशान रामकुमार, सुभाष चंद, रमेश कुमार, मेहर चंद, प्रदीप कुमार व सुरेश चंद का कहना है कि अब तो रात को चैन से सोना भी मुश्किल हो गया है।
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इन लोगाें की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द इस गेहूं को यहां से उठाए और उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही कर सके और जिसके कारण यह गेहूं सड़ा।
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आसपास के लोग जल्द से जल्द इस गेहूं को यहां से उठाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन शायद अभी अधिकारी शायद इस सड़े गेहूं की मिट्टी बनने का इंतजार कर रहे हैं। हरियाणा की एक खरीद एजेंसी हरियाणा एग्रो ने वर्ष 2011 में दो लाख बोरियां गेहूं तरावड़ी मंडी से खरीदकर लल्याणी रोड स्थित किसान राइस मिल में लगाई थीं। इसके बाद अधिकारियों ने इस गेहूं की ओर से आंखें बंद कर ली।
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इस अनदेखी के कारण गेहूं बरसात व धूप में खुला पड़ा सड़ता रहा। इस बीच आसपास के लोगों द्वारा अधिकारियों को जगाने की कोशिशें हुईं, लेकिन सब बेकार गई। इसके चलते जिस गेहूं को किसान ने तैयार किया था कि यह किसी के भूखे पेट को भरेगा, वही गेहूं अब सड़ने के बाद जहर बन गया है और उसे फेंकने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। गेहूं के सड़ने के बाद में उसमें भयंकर बदबू हो गई, जिसके चलते इस राइस मिल के पास से गुजरने वाले लोगों को मुंह दबाकर निकलना पड़ता है और अब इसमें पैदा हुई सुरसरी ने आसपास के लोगाें का जीना मुहाल कर दिया है। सुरसरी के कहर से परेशान रामकुमार, सुभाष चंद, रमेश कुमार, मेहर चंद, प्रदीप कुमार व सुरेश चंद का कहना है कि अब तो रात को चैन से सोना भी मुश्किल हो गया है।
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इन लोगाें की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द इस गेहूं को यहां से उठाए और उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही कर सके और जिसके कारण यह गेहूं सड़ा।