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Karnal News: यमुना में सैलाब, दरिया बने गांव
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- इंद्री और कुंजपुरा के 46 गांवों तक पहुंचा पानी, तटबंध नहीं बन सके, इंद्री के 20 गांवों का संपर्क कटा
- डबकौली कलां गांव में बाढ़ के पानी में गिरने से 72 वर्षीय महिला की मौत
कुशाग्र मिश्रा
करनाल। तीन दिन बीत गए हैं, लेकिन गढ़पुर टापू और समसपुर के पास टूटे तटबंधों को बनाया नहीं जा सका है। जिसका नतीजा यह हुआ कि वीरवार को कुंजपुरा तक पानी पहुंच गया है। इतना ही नहीं 1978 में आई बाढ़ के बाद अब इंद्री के बड़ा गांव तक बुधवार की देर रात पानी पहुंच गया। इंद्री के 36 और कुंजपुरा के 10 गांवों को बाढ़ के पानी ने चपेट में ले लिया है। वीरवार को इंद्री के नौ गांवों का संपर्क शहर से और टूट गया। इन गांवों की संख्या अब 20 हो गई है। उधर, डबकौली कलां गांव में बाढ़ के पानी में गिरने से एक 72 वर्षीय वृद्धा की मौत हो गई।
यमुना में वीरवार की शाम पांच बजे तक करीब तीन फुट पानी कम हुआ है और अपने स्वाभाविक बहाव की ओर यमुना बह रही है, लेकिन समसपुर और गढ़पुर टापू गांव के तटबंध टूटे होने से पानी गांवों को चपेट में लेता जा रहा है। तटबंद करीब 200 फुट लंबा और 50 फुट गहरा है। पानी का बहाव अधिक होने की वजह से मिट्टी रुक नहीं रही है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन नवतेज सिंह ने बताया कि शनिवार तक तटबंध की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी। तटबंधों की मरम्मत का काम चल रहा है, लेकिन पानी का बहाव तेज होने की वजह से दिक्कत पेश आ रही है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 25 हजार एकड़ से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है, हालांकि इसका सही आकलन सर्वे के बाद ही हो सकेगा।
- बोले लोग
देर रात 12 बजे के आसपास गांव में पानी आना शुरू हुआ। 1978 में आई बाढ़ के बाद अब गांव में पानी आया है।
- बलजीत सिंह, बड़ा गांव
करीब 250 किले खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। जीरी और सब्जी की फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है।
- दिवान चंद, बड़ा गांव
तटबंध टूटने की वजह से गांव में पानी आया है, बुधवार की शाम तक भी कुछ नहीं, सुबह तक हर जगह पानी था।
- रामदिया, बड़ा गांव
- तटबंध को बनाने के लिए एजेंसी लगाई गई
तटबंध को बंद करने के लिए जिला प्रशासन ने एक एजेंसी हायर की है। यमुना में पानी भी धीरे-धीरे कम हो रहा है, जिसकी वजह से तटबंध को बनाने के काम में तेजी आई है। इसमें 300 मजदूर, 40 डंफर, नौ जेसीबी, सात पोकलेन, दो लोडर और दो हाइड्रा लगाई हैं।
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- 200 एकड़ से अधिक के जंगल में भरा पानी, जीव-जंतुओं को खतरा
बड़ा गांव के पास 200 एकड़ से अधिक के जंगल में भी पानी भर गया है। जहां हजारों की संख्या में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं का वास है। वन विभाग एवं वन्य प्राणी विभाग की ओर से अभी तक यहां बचाव के कोई प्रबंध नहीं किए गए। इनके लिए भोजन की समस्या होगी।
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- डबकौली कलां गांव में बाढ़ के पानी में गिरने से 72 वर्षीय महिला की मौत
कुशाग्र मिश्रा
करनाल। तीन दिन बीत गए हैं, लेकिन गढ़पुर टापू और समसपुर के पास टूटे तटबंधों को बनाया नहीं जा सका है। जिसका नतीजा यह हुआ कि वीरवार को कुंजपुरा तक पानी पहुंच गया है। इतना ही नहीं 1978 में आई बाढ़ के बाद अब इंद्री के बड़ा गांव तक बुधवार की देर रात पानी पहुंच गया। इंद्री के 36 और कुंजपुरा के 10 गांवों को बाढ़ के पानी ने चपेट में ले लिया है। वीरवार को इंद्री के नौ गांवों का संपर्क शहर से और टूट गया। इन गांवों की संख्या अब 20 हो गई है। उधर, डबकौली कलां गांव में बाढ़ के पानी में गिरने से एक 72 वर्षीय वृद्धा की मौत हो गई।
यमुना में वीरवार की शाम पांच बजे तक करीब तीन फुट पानी कम हुआ है और अपने स्वाभाविक बहाव की ओर यमुना बह रही है, लेकिन समसपुर और गढ़पुर टापू गांव के तटबंध टूटे होने से पानी गांवों को चपेट में लेता जा रहा है। तटबंद करीब 200 फुट लंबा और 50 फुट गहरा है। पानी का बहाव अधिक होने की वजह से मिट्टी रुक नहीं रही है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन नवतेज सिंह ने बताया कि शनिवार तक तटबंध की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी। तटबंधों की मरम्मत का काम चल रहा है, लेकिन पानी का बहाव तेज होने की वजह से दिक्कत पेश आ रही है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 25 हजार एकड़ से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है, हालांकि इसका सही आकलन सर्वे के बाद ही हो सकेगा।
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- बोले लोग
देर रात 12 बजे के आसपास गांव में पानी आना शुरू हुआ। 1978 में आई बाढ़ के बाद अब गांव में पानी आया है।
- बलजीत सिंह, बड़ा गांव
करीब 250 किले खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। जीरी और सब्जी की फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है।
- दिवान चंद, बड़ा गांव
तटबंध टूटने की वजह से गांव में पानी आया है, बुधवार की शाम तक भी कुछ नहीं, सुबह तक हर जगह पानी था।
- रामदिया, बड़ा गांव
- तटबंध को बनाने के लिए एजेंसी लगाई गई
तटबंध को बंद करने के लिए जिला प्रशासन ने एक एजेंसी हायर की है। यमुना में पानी भी धीरे-धीरे कम हो रहा है, जिसकी वजह से तटबंध को बनाने के काम में तेजी आई है। इसमें 300 मजदूर, 40 डंफर, नौ जेसीबी, सात पोकलेन, दो लोडर और दो हाइड्रा लगाई हैं।
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- 200 एकड़ से अधिक के जंगल में भरा पानी, जीव-जंतुओं को खतरा
बड़ा गांव के पास 200 एकड़ से अधिक के जंगल में भी पानी भर गया है। जहां हजारों की संख्या में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं का वास है। वन विभाग एवं वन्य प्राणी विभाग की ओर से अभी तक यहां बचाव के कोई प्रबंध नहीं किए गए। इनके लिए भोजन की समस्या होगी।