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अब आप भी कर सकेंगे दूध में मिलावट की जांच

Wed, 15 Feb 2017 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Wed, 15 Feb 2017 12:27 AM IST
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Now you can also check milk adulteration, Karnal
अब आप भी कर सकेंगे दूध में मिलावट की जांच - फोटो : Amar Ujala

अब आम उपभोक्ता भी मिलावटी दूध की पहचान आसानी से कर सकेगा। दूध में माल्टोडेक्सट्रिन की जांच करने के लिए एनडीआरआई के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित टेक्नोलॉजी को गुड़गांव की डैलमो रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को ट्रांसफर कर दिया गया है। कंपनी के संयोजक मनोज कुमार मौर्य और बब्बर सिंह ने बताया कि वे जल्द ही इसे मार्केट में उतारेंगे।  

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कंपनी के मनोज कुमार व बब्बर सिंह एनडीआरआई से ही बीटेक की पढ़ाई कर चुके हैं। उन्होंने किसी दूसरी कंपनी में काम करने की बजाय खुद का बिजनेस शुरू किया है, ताकि आम जनता को मिलावट की समस्या छुटकारा दिला सकें। एनडीआरआई के निदेशक डॉ. आरआरबी सिंह ने उन्हें बधाई दी और कहा कि साधनों की कमी के चलते आम लोग मिलावटी दूध की जांच कर पाने में असमर्थ हैं। एनडीआरआई की कोशिश रही है कि कुछ ऐसे टेस्ट बनाए जाएं, जिन्हें साधारण लोगों तक पहुंचाया जाए। इस दिशा में डेयरी रसायन प्रभाग के वैज्ञानिकों की ओर से  तैयार की गई इस किट को डेयरी उद्यमियों को हस्तांतरित किया गया है। उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ष संस्थान ने कुल 10 टेक्नोलॉजिज को डेरी उद्योगों को हस्तांतरित की हैं।
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मिलावटी दूध से बीमारियां खतरा
एनडीआरआई के संयुक्त निदेशक डॉ. बिमलेश मान ने बताया कि दूध में माल्टोडेक्सट्रिन नामक एक केमिकल्स को मिला कर दूध के सॉलिड नोट फैट  (एसएनएफ) को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया जाता है। इसका का सीधा असर उसके पॉष्टिक गुणों पर पड़ता है। मिलावट होने पर दूध में पौष्टिक गुणों की कमी हो जाती है। मिलावट के धंधे पर अंकुश लगाने के लिए सबसे पहले हमें जागरूक होना होगा। इसके अलावा साधारण, सरल और कम लागत के तरीकों (टेस्ट) के विकास से ही मिलावट की समस्या का समाधान किया जा सकता है।
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पेपर स्ट्रीप से पता लगता है मिलावट
डॉ. राजन शर्मा ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमानुसार दूध में माल्टोडैकस्ट्रिन मिलावट करने की अनुमति नहीं है। दूध में इसकी उपस्थिति का शीघ्रता से पता लगाने के लिए एक पेपर आधारित स्ट्रिप विकसित की गई है। यह किट एक किलो दूध में 150 मिली ग्राम तक माल्टोडैकस्ट्रिन की मिलावट की जांच करने में सक्षम है। यह टेस्ट मौजूदा तरल आधारित परीक्षण की तुलना में अधिक संवेदनशील है। इस परीक्षण पेपर स्ट्रीप को दूध में कुछ देर के लिए डूबोया जाता है, जिससे स्ट्रीप का रंग एकदम से बदल जाता है। पॉजिटिव सैंपल में स्ट्रीप का रंग पीला हो जाता है। इस परीक्षण के द्वारा दूध से बनने वाले पदार्थ (खोया एवं दही) में भी माल्टोडैकस्ट्रिन की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है।

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