{"_id":"66cfd0d2897522c8ea06d214","slug":"now-the-slab-broken-from-the-other-side-of-the-canal-questions-on-quality-karnal-news-c-18-knl1008-462277-2024-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: अब नहर की दूसरी तरफ से टूटी स्लैब, गुणवत्ता पर सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: अब नहर की दूसरी तरफ से टूटी स्लैब, गुणवत्ता पर सवाल
विज्ञापन
करनाल। पश्चिमी यमुना नहर की रेलवे पुल के समीप दूसरी तरफ से भी स्लैब टूट गई। जिससे अधिकारियों की सांसें फूल गईं। मंगलवार को एक तरफ के टूटे तट को अभी तक अधिकारी मजबूत नहीं कर पाए थे कि दूसरी तरफ से भी कटाव हो गया। बुधवार सुबह सिंचाई विभाग के एक्सईएन, एसडीओ सहित सभी अधिकारी मौके पर पहुंचे और दूसरी तरफ से टूटे तट के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया।
नहर में अलग-अलग जगहों पर हो रहे तट के कटाव के कारण नहर के बनाए गए स्लैब की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। नहर के पानी ने स्लैब निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री के राज खोल दिए हैं। आसपास के लोगों ने आरोप लगाया है कि नहर के पूर्व निर्माण कार्य में खानापूर्ति की गई है। तभी नहर में अलग-अलग जगहों पर कटाव हो रहा है। जिससे उनके लिए खतरा पैदा हो गया है।
पश्चिमी यमुना नहर के पुनर्निर्माण कार्य पर 2021 में करीब 202 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इंद्री से मूनक तक इस नहर का पुनर्निर्माण किया गया था। इसके बावजूद नहर की स्लैब टूट रही है। इससे साफ है कि उस दौरान घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। लोगों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि नहर की स्लैब की गुणवत्ता की जांच कराई जाए ताकि भविष्य में दूसरी जगह से स्लैब न टूटे।
विज्ञापन
पश्चिमी यमुना नहर पर मंगलवार को हुए करीब 100 फूट के कटाव को रोकने के लिए 250 मजदूर कार्य में लगे हुए हैं। जो मिट्टी के कट्टों को भरने का कार्य कर रहे हैं। वहीं डंपरों की मदद से मिट्टी व पत्थर डाले जा रहे हैं। छह जेसीबी इस कार्य में जुटी हैं। अब दूसरी जगह हुए कटाव से विभाग के अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ गई है कि कहीं रात को अधिक कटाव होने पर नहर टूट न जाए। हालांकि अधिकारियों ने पानी का बहाव कम करा दिया है। फिलहाल करीब पांच हजार क्यूसेक पानी नहर में बह रहा है।
लापरवाही उजागर
किसान राममेहर व मोहन लाल का कहना है कि नहर के तट में कटाव होने के पीछे अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही है। जब यह नहर का पुनर्निर्माण कराते हैं तो वह ठेकेदार के कार्य पर ध्यान नहीं देते और न ही यह चेक करते हैं कि निर्माण कार्य में किस तरह की सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि पानी के बहाव में वह स्लैब टूट जाती है और तट में कटाव होने लगता है।
आवर्धन नहर की भी टूटी थी स्लैब
आवर्धन नहर का करीब 382 करोड़ रुपये से पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। जब इस नहर का ट्रायल किया गया तो कलवेहड़ी गांव के समीप स्लैब टूट गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने स्लैब के सैंपल लेकर जांच कराने की मांग की थी लेकिन अधिकारियों ने इसकी जांच नहीं की और मामले को दबा दिया। उस नहर का अभी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आवर्धन नहर के निर्माण कार्य में भी घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। भविष्य में इस नहर की पटरी में भी स्लैब टूटने पर कटाव होंगे।
वर्जन
नहर में पहले हुए कटाव को ठीक किया जा रह है। बुधवार को नहर की दूसरी तरफ भी स्लैब में नीचे की तरफ कटाव हुआ है। उसे भी भरा जा रहा है। पानी के तेज बहाव के कारण ही यह हुआ है।
- रणवीर सिंह, एक्सईएन सिंचाई विभाग करनाल
विज्ञापन
नहर में अलग-अलग जगहों पर हो रहे तट के कटाव के कारण नहर के बनाए गए स्लैब की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। नहर के पानी ने स्लैब निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री के राज खोल दिए हैं। आसपास के लोगों ने आरोप लगाया है कि नहर के पूर्व निर्माण कार्य में खानापूर्ति की गई है। तभी नहर में अलग-अलग जगहों पर कटाव हो रहा है। जिससे उनके लिए खतरा पैदा हो गया है।
विज्ञापन
पश्चिमी यमुना नहर के पुनर्निर्माण कार्य पर 2021 में करीब 202 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इंद्री से मूनक तक इस नहर का पुनर्निर्माण किया गया था। इसके बावजूद नहर की स्लैब टूट रही है। इससे साफ है कि उस दौरान घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। लोगों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि नहर की स्लैब की गुणवत्ता की जांच कराई जाए ताकि भविष्य में दूसरी जगह से स्लैब न टूटे।
विज्ञापन
पश्चिमी यमुना नहर पर मंगलवार को हुए करीब 100 फूट के कटाव को रोकने के लिए 250 मजदूर कार्य में लगे हुए हैं। जो मिट्टी के कट्टों को भरने का कार्य कर रहे हैं। वहीं डंपरों की मदद से मिट्टी व पत्थर डाले जा रहे हैं। छह जेसीबी इस कार्य में जुटी हैं। अब दूसरी जगह हुए कटाव से विभाग के अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ गई है कि कहीं रात को अधिक कटाव होने पर नहर टूट न जाए। हालांकि अधिकारियों ने पानी का बहाव कम करा दिया है। फिलहाल करीब पांच हजार क्यूसेक पानी नहर में बह रहा है।
लापरवाही उजागर
किसान राममेहर व मोहन लाल का कहना है कि नहर के तट में कटाव होने के पीछे अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही है। जब यह नहर का पुनर्निर्माण कराते हैं तो वह ठेकेदार के कार्य पर ध्यान नहीं देते और न ही यह चेक करते हैं कि निर्माण कार्य में किस तरह की सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि पानी के बहाव में वह स्लैब टूट जाती है और तट में कटाव होने लगता है।
आवर्धन नहर की भी टूटी थी स्लैब
आवर्धन नहर का करीब 382 करोड़ रुपये से पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। जब इस नहर का ट्रायल किया गया तो कलवेहड़ी गांव के समीप स्लैब टूट गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने स्लैब के सैंपल लेकर जांच कराने की मांग की थी लेकिन अधिकारियों ने इसकी जांच नहीं की और मामले को दबा दिया। उस नहर का अभी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आवर्धन नहर के निर्माण कार्य में भी घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। भविष्य में इस नहर की पटरी में भी स्लैब टूटने पर कटाव होंगे।
वर्जन
नहर में पहले हुए कटाव को ठीक किया जा रह है। बुधवार को नहर की दूसरी तरफ भी स्लैब में नीचे की तरफ कटाव हुआ है। उसे भी भरा जा रहा है। पानी के तेज बहाव के कारण ही यह हुआ है।
- रणवीर सिंह, एक्सईएन सिंचाई विभाग करनाल