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अब सीएम सिटी में व्यापार करने के लिए देनी होगी मोटी फीस
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Wed, 12 Oct 2016 12:09 AM IST
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भवन निर्माण के नक्शा पास कराने की फीस दरों में बेतहाशा वृद्धि के बाद अब नगर निगम ने सीएम सिटी में व्यापार करने वालों के लिए ट्रेड लाइसेंस लेना जरूरी कर दिया है। इसके साथ ही करीब 50 अलग-अलग कारोबारों के लिए लाइसेंस लेने के लिए एक हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक की फीस निर्धारित की है। हालांकि, अभी यह केवल तैयारी है। इस मुद्दे को आगामी 14 अक्टूबर को होने वाली सदन की बैठक में रखा जाएगा। अगर प्रस्ताव पास हुआ तो यकीनन नगर निगम को प्रति साल करोड़ों रुपये की आमदनी होगी, लेकिन व्यापारियों को इसके लिए फीस देनी पड़ेगी। इतना ही नहीं, ट्रेड लाइसेंस से पहले कुछ अन्य शर्तें भी रखी गई हैं।
संभावना जताई जा रही कि इस मुद्दे पर निगम की बैठक में हंगामा हो सकता है। उधर, ट्रेड लाइसेंस की फीस तय करने को लेकर व्यापारियों ने नेताओं ने पहले से ही भौहें तान ली हैं। बता दें कि तीन माह बाद नगर निगम के सदन की बैठक हो रही है। इसमें कुल 19 प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इनमें कई प्रस्ताव ऐसे हैं, जिनसे निगम का खर्च बढ़ेगा, ऐसे में निगम ने आमदन बढ़ाने के लिए ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य किया है, साथ ही अलग अलग व्यापार के लिए अलग फीस तय की है, जो एक हजार से लेकर दस हजार तक है। इसके लिए निगम से 50 व्यापारों को कैटेगरी वाइज किया है। हालांकि, इसे लागू कराने के लिए सदन की मुहर जरूरी है। देखना यह है कि 14 अक्टूबर को यह प्रस्ताव पास होता है या नहीं है।
निगम क्षेत्र में 30 हजार दुकानें
नगर निगम के क्षेत्र में करीब 30 हजार दुकानें हैं, लेकिन ट्रेड लाइसेंस केवल 1900 दुकानदारों के पास ही हैं। ऐसे में हजारों की संख्या में लोग बिना लाइसेंस के लिए व्यापार कर रहे हैं। हालांकि, ट्रेड लाइसेंस का कार्य निगम ने इसी साल शुरू किया है, इससे पहले यह नहीं था। अब तक निगम ट्रेड लाइसेंस के माध्यम से 30 लाख रुपये एकत्र कर चुका है। अगर यह मामला लागू होता है तो निगम को प्रति साल करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी।
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ट्रेड लाइसेंस को कई शर्तें पूरी करनी होंगी
फीस के अलावा निगम के अधिकारियों ने ट्रेड लाइसेंस लेने वालों के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें दुकान का नक्शा पास होना चाहिए, साथ ही अग्निशमन विभाग की एनओसी होना जरूरी है। दुकान के मालिकाना हक का सबूत, दुकान इंडस्ट्रीयल इलाके में ही हो और पिछले एक साल का टर्न ओवर दिखाना जरूरी है। ऐसे में इन शर्तों को पूरा करने में व्यापारियों के पसीने छूट सकते हैं। कड़ी शर्तों के कारण पिछले तीन माह में कोई नया ट्रेड लाइससें नहीं बन पाया है। इस बारे में नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि यह अच्छा प्रस्ताव है, इसमें व्यापारियों का भी लाभ है। मुद्दा हाउस की बैठक में रखा जाएगा, उसके बाद ही पता चल पाएगा।
शर्तों को पूरा करना आसान नहीं
नगर निगम द्वारा शुरू किए गए ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए कई कड़ी शर्तें लगाई गई हैं। इनको पूरा करना दुकानदार के लिए आसान नहीं है। हमारी मांग है कि शर्तों में छूट मिलनी चाहिए। इसका सरलीकरण होना चाहिए। पहले, केवल आईडी देकर ट्रेड लाइसेंस बनता था, लेकिन अब बड़ा कठिन कर दिया गया है। -दीपक धवन, प्रधान, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल।
ट्रेड लाइसेंस लागू हुआ तो करेंगे विरोध
हम इसका पूर जोर विरोध करेंगे। पहले से ही व्यापारियों पर टैक्स लगे हुए हैं, व्यापार घाटे में चल रहे हैं। एक और ट्रेड लाइसेंस आ गया है। अगर यह लागू हुआ तो वे इस मामले में विरोध करेंगे और सीएम तक से मिलेंगे। अगर फिर भी बात नहीं बनी तो बाजार बंद कराएंगे। दुकानदार इतनी कठिन शर्तों को पूरा नहीं कर सकते।
कृष्ण लाल तनेजा, प्रधान, हरियाणा व्यापार मंडल।
संभावना जताई जा रही कि इस मुद्दे पर निगम की बैठक में हंगामा हो सकता है। उधर, ट्रेड लाइसेंस की फीस तय करने को लेकर व्यापारियों ने नेताओं ने पहले से ही भौहें तान ली हैं। बता दें कि तीन माह बाद नगर निगम के सदन की बैठक हो रही है। इसमें कुल 19 प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इनमें कई प्रस्ताव ऐसे हैं, जिनसे निगम का खर्च बढ़ेगा, ऐसे में निगम ने आमदन बढ़ाने के लिए ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य किया है, साथ ही अलग अलग व्यापार के लिए अलग फीस तय की है, जो एक हजार से लेकर दस हजार तक है। इसके लिए निगम से 50 व्यापारों को कैटेगरी वाइज किया है। हालांकि, इसे लागू कराने के लिए सदन की मुहर जरूरी है। देखना यह है कि 14 अक्टूबर को यह प्रस्ताव पास होता है या नहीं है।
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निगम क्षेत्र में 30 हजार दुकानें
नगर निगम के क्षेत्र में करीब 30 हजार दुकानें हैं, लेकिन ट्रेड लाइसेंस केवल 1900 दुकानदारों के पास ही हैं। ऐसे में हजारों की संख्या में लोग बिना लाइसेंस के लिए व्यापार कर रहे हैं। हालांकि, ट्रेड लाइसेंस का कार्य निगम ने इसी साल शुरू किया है, इससे पहले यह नहीं था। अब तक निगम ट्रेड लाइसेंस के माध्यम से 30 लाख रुपये एकत्र कर चुका है। अगर यह मामला लागू होता है तो निगम को प्रति साल करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी।
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ट्रेड लाइसेंस को कई शर्तें पूरी करनी होंगी
फीस के अलावा निगम के अधिकारियों ने ट्रेड लाइसेंस लेने वालों के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें दुकान का नक्शा पास होना चाहिए, साथ ही अग्निशमन विभाग की एनओसी होना जरूरी है। दुकान के मालिकाना हक का सबूत, दुकान इंडस्ट्रीयल इलाके में ही हो और पिछले एक साल का टर्न ओवर दिखाना जरूरी है। ऐसे में इन शर्तों को पूरा करने में व्यापारियों के पसीने छूट सकते हैं। कड़ी शर्तों के कारण पिछले तीन माह में कोई नया ट्रेड लाइससें नहीं बन पाया है। इस बारे में नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि यह अच्छा प्रस्ताव है, इसमें व्यापारियों का भी लाभ है। मुद्दा हाउस की बैठक में रखा जाएगा, उसके बाद ही पता चल पाएगा।
शर्तों को पूरा करना आसान नहीं
नगर निगम द्वारा शुरू किए गए ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए कई कड़ी शर्तें लगाई गई हैं। इनको पूरा करना दुकानदार के लिए आसान नहीं है। हमारी मांग है कि शर्तों में छूट मिलनी चाहिए। इसका सरलीकरण होना चाहिए। पहले, केवल आईडी देकर ट्रेड लाइसेंस बनता था, लेकिन अब बड़ा कठिन कर दिया गया है। -दीपक धवन, प्रधान, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल।
ट्रेड लाइसेंस लागू हुआ तो करेंगे विरोध
हम इसका पूर जोर विरोध करेंगे। पहले से ही व्यापारियों पर टैक्स लगे हुए हैं, व्यापार घाटे में चल रहे हैं। एक और ट्रेड लाइसेंस आ गया है। अगर यह लागू हुआ तो वे इस मामले में विरोध करेंगे और सीएम तक से मिलेंगे। अगर फिर भी बात नहीं बनी तो बाजार बंद कराएंगे। दुकानदार इतनी कठिन शर्तों को पूरा नहीं कर सकते।
कृष्ण लाल तनेजा, प्रधान, हरियाणा व्यापार मंडल।