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अब बॉक्स में लगेंगे बिजली मीटर
करनाल
Updated Tue, 18 Mar 2014 11:22 PM IST
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बिजली निगम ने चोरी को रोकने के लिए मीटर बॉक्स स्कीम लांच की है। इसके
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तहत उपभोक्ताओं के घर के बाहर या अंदर लगे मीटरों को ट्रांसफार्मर के नजदीक
बॉक्स में लगाया जाएगा।
एक बॉक्स में 15 से 20 मीटर लगेंगे और इस बॉक्स की चाबी एरिया के जेई या लाइनमैन पर होगी। इस तरह से उपभोक्ता मीटरों में छेड़खानी कर बिजली चोरी नहीं कर पाएंगे। बिजली निगम के अधिकारियों का दावा है कि यह स्कीम बिजली चोरी रोकने में सार्थक सिद्ध होगी।
इस तरह चोरी रुकने से ईमानदार उपभोक्ताओं के लिए भी बेहतर रहेगा, क्योंकि चोरी जैसे कदम से निगम को घाटा होता है और इसकी पूर्ति उपभोक्ताओं से ही होती है। जिले में तीन लाख 17 हजार 467 उपभोक्ताओं पर इस स्कीम का अमलीजामा पहनाने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है।
हर एरिया में एसडीओ द्वारा बनाई गई लाइनमैन, जेई की टीम 100 से 150 मीटर बॉक्स में लगा रहे हैं। सुबह सात बजे वर्किंग शुरू होती है और शाम पांच बजे तक मीटरों को उतारकर खंभों पर लेकर आ रहे हैं। बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ता इस स्कीम पर रोड़ा अटकाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अफसरों के सख्त निर्देश के बाद कर्मचारी फील्ड में कार्य के दौरान कोताही नहीं बरत पा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस स्कीम को पूरी तरह अमल में लाने के लिए दिन भी मात्र 12 रह गए हैं। 31 मार्च से पहले सभी मीटरों को बॉक्स में लगाया जाएगा।
मीटर से पहले कर लेते हैं ज्वाइंट
बिजली चोरी करने में उपभोक्ता भी आगे हैं। मीटर से पहले जोड़ बनाकर कुंडी लगाकर चोरी को अंजाम देते हैं। यह चोरी पकड़ में नहीं आती, क्योंकि एरिया में जाने के बाद लोगों को बिजली टीम का पता चल जाता है, जिससे वह टीम पहुंचने से पहले ही तार उतार लेते हैं। कई तरह के 219 केस पकड़े जा चुके हैं।
घर में उपकरण सभी, फिर भी बिल 214
बिजली निगम के अधिकारी बताते हैं कि जिन उपभोक्ताओं का बिल नाममात्र आता है। उनके घरों का निरीक्षण किया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। घर में वाशिंग मशीन से लेकर फ्रिज, कूलर, कमरों में तीन से चार पंखे आदि का उपयोग करने वाले के बिल मात्र 214 रुपये मिले हैं। किसी के 250 रुपये तो बहुतों के 450 रुपये भी मिले। छह रुपये प्रति यूनिट से बन रहे बिल में यह बिल होने से साफ है कि उपभोक्ता पूरी चतुराई से बिजली चोरी को अंजाम देते हैं और पकड़ में नहीं आते। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए मीटरों को उपभोक्ताओं से दूर लेकर जा रहे हैं।
एक बॉक्स में 15 से 20 मीटर लगेंगे और इस बॉक्स की चाबी एरिया के जेई या लाइनमैन पर होगी। इस तरह से उपभोक्ता मीटरों में छेड़खानी कर बिजली चोरी नहीं कर पाएंगे। बिजली निगम के अधिकारियों का दावा है कि यह स्कीम बिजली चोरी रोकने में सार्थक सिद्ध होगी।
इस तरह चोरी रुकने से ईमानदार उपभोक्ताओं के लिए भी बेहतर रहेगा, क्योंकि चोरी जैसे कदम से निगम को घाटा होता है और इसकी पूर्ति उपभोक्ताओं से ही होती है। जिले में तीन लाख 17 हजार 467 उपभोक्ताओं पर इस स्कीम का अमलीजामा पहनाने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है।
हर एरिया में एसडीओ द्वारा बनाई गई लाइनमैन, जेई की टीम 100 से 150 मीटर बॉक्स में लगा रहे हैं। सुबह सात बजे वर्किंग शुरू होती है और शाम पांच बजे तक मीटरों को उतारकर खंभों पर लेकर आ रहे हैं। बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ता इस स्कीम पर रोड़ा अटकाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अफसरों के सख्त निर्देश के बाद कर्मचारी फील्ड में कार्य के दौरान कोताही नहीं बरत पा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस स्कीम को पूरी तरह अमल में लाने के लिए दिन भी मात्र 12 रह गए हैं। 31 मार्च से पहले सभी मीटरों को बॉक्स में लगाया जाएगा।
मीटर से पहले कर लेते हैं ज्वाइंट
बिजली चोरी करने में उपभोक्ता भी आगे हैं। मीटर से पहले जोड़ बनाकर कुंडी लगाकर चोरी को अंजाम देते हैं। यह चोरी पकड़ में नहीं आती, क्योंकि एरिया में जाने के बाद लोगों को बिजली टीम का पता चल जाता है, जिससे वह टीम पहुंचने से पहले ही तार उतार लेते हैं। कई तरह के 219 केस पकड़े जा चुके हैं।
घर में उपकरण सभी, फिर भी बिल 214
बिजली निगम के अधिकारी बताते हैं कि जिन उपभोक्ताओं का बिल नाममात्र आता है। उनके घरों का निरीक्षण किया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। घर में वाशिंग मशीन से लेकर फ्रिज, कूलर, कमरों में तीन से चार पंखे आदि का उपयोग करने वाले के बिल मात्र 214 रुपये मिले हैं। किसी के 250 रुपये तो बहुतों के 450 रुपये भी मिले। छह रुपये प्रति यूनिट से बन रहे बिल में यह बिल होने से साफ है कि उपभोक्ता पूरी चतुराई से बिजली चोरी को अंजाम देते हैं और पकड़ में नहीं आते। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए मीटरों को उपभोक्ताओं से दूर लेकर जा रहे हैं।