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अब देसी ‘गिर’ गाय का क्लोन बनाने की तैयारी
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करनाल। मुर्राह नस्ल के भैंसों की क्लोनिंग पर काम कर रहे राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में अब देसी नस्ल की ‘गिर’ गाय का क्लोन बनाने की तैयारी चल रही है। इसका उद्देश्य देसी गायों के दूध का उत्पादन बढ़ाना है। संस्थान के प्रयास से देसी गायों का महत्व और अधिक बढ़ेगा।
यह संस्थान अब तक मुर्राह भैंस का 24वां क्लोन कटड़ा ‘शक्ति’ तैयार कर चुका है। मुर्राह नस्ल के कटड़े ‘शक्ति’ का जन्म 20 दिसंबर 2020 में हुआ था। वर्ष 2009 में इस संस्थान में हस्त निर्मित क्लोनिंग तकनीक से पहली मुर्राह नस्ल की कटड़ी का जन्म होने के साथ पूरी दुनिया आश्चर्यचकित हो गई थी। इस तकनीक से शरीर की विभिन्न कोशिकाओं को लेकर क्लोन कटड़े पैदा किए गए। यह नर क्लोन कटड़े उच्च गुणवत्ता के वीर्य पैदा कर रहे हैं। जो मादा क्लोन हैं उसने भी कई कटड़ों को जन्म दिया।
संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि हस्त निर्मित क्लोनिंग तकनीक में नर व मादा प्रजनन के लिए भी उपयुक्त हैं। नर क्लोन के वीर्य का प्रयोग करके संस्थान में कई कटड़ों का जन्म हो चुका है। संस्थान मुर्राह नस्ल की भैंसों की क्लोनिंग कर रहा है। भविष्य में देसी नस्ल की गायों की क्लोनिंग करने की योजना है।
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गुजरात का सौराष्ट्र क्षेत्र है गिर का उद्गम स्थल
भारतीय ‘गिर’ गाय का उद्गम स्थल गुजरात का सौराष्ट्र क्षेत्र है। दूध उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह नस्ल हिंदुस्तान से एशियाई देशों के अलावा अन्य देशों में भी ले जाई गई। भारत में यह ज्ञात नस्ल है और इसका करीब 700 साल पुराना इतिहास है। राजा-महाराजा भी अपने फार्म में इसे पालते रहे हैं। राष्ट्रीय आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डा. प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि वर्ष 2013 में हुए सर्वे के अनुसार भारत में शुद्ध गिर गाय की संख्या 13 लाख 80 हजार 208 रही। गिर की ही तरह की जिनमें शुद्धता कम होती है, उनकी संख्या 37 लाख 32 हजार 786 थी।
‘गिर’ गाय की एक ब्यांत (करीब 300 दिन) में दूध देने की क्षमता 2200 से 2500 लीटर तक है। देश में सालाना कुल दूध उत्पादन 198.4 मिलियन टन है। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता 400 ग्राम से अधिक है। कुल दूध उत्पादन का 20 प्रतिशत देसी गायों से मिलता है। 27 प्रतिशत संकर गायों से, 49 प्रतिशत भैंसों से व तीन प्रतिशत बकरी का योगदान है।
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यह संस्थान अब तक मुर्राह भैंस का 24वां क्लोन कटड़ा ‘शक्ति’ तैयार कर चुका है। मुर्राह नस्ल के कटड़े ‘शक्ति’ का जन्म 20 दिसंबर 2020 में हुआ था। वर्ष 2009 में इस संस्थान में हस्त निर्मित क्लोनिंग तकनीक से पहली मुर्राह नस्ल की कटड़ी का जन्म होने के साथ पूरी दुनिया आश्चर्यचकित हो गई थी। इस तकनीक से शरीर की विभिन्न कोशिकाओं को लेकर क्लोन कटड़े पैदा किए गए। यह नर क्लोन कटड़े उच्च गुणवत्ता के वीर्य पैदा कर रहे हैं। जो मादा क्लोन हैं उसने भी कई कटड़ों को जन्म दिया।
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संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि हस्त निर्मित क्लोनिंग तकनीक में नर व मादा प्रजनन के लिए भी उपयुक्त हैं। नर क्लोन के वीर्य का प्रयोग करके संस्थान में कई कटड़ों का जन्म हो चुका है। संस्थान मुर्राह नस्ल की भैंसों की क्लोनिंग कर रहा है। भविष्य में देसी नस्ल की गायों की क्लोनिंग करने की योजना है।
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गुजरात का सौराष्ट्र क्षेत्र है गिर का उद्गम स्थल
भारतीय ‘गिर’ गाय का उद्गम स्थल गुजरात का सौराष्ट्र क्षेत्र है। दूध उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह नस्ल हिंदुस्तान से एशियाई देशों के अलावा अन्य देशों में भी ले जाई गई। भारत में यह ज्ञात नस्ल है और इसका करीब 700 साल पुराना इतिहास है। राजा-महाराजा भी अपने फार्म में इसे पालते रहे हैं। राष्ट्रीय आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डा. प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि वर्ष 2013 में हुए सर्वे के अनुसार भारत में शुद्ध गिर गाय की संख्या 13 लाख 80 हजार 208 रही। गिर की ही तरह की जिनमें शुद्धता कम होती है, उनकी संख्या 37 लाख 32 हजार 786 थी।
‘गिर’ गाय की एक ब्यांत (करीब 300 दिन) में दूध देने की क्षमता 2200 से 2500 लीटर तक है। देश में सालाना कुल दूध उत्पादन 198.4 मिलियन टन है। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता 400 ग्राम से अधिक है। कुल दूध उत्पादन का 20 प्रतिशत देसी गायों से मिलता है। 27 प्रतिशत संकर गायों से, 49 प्रतिशत भैंसों से व तीन प्रतिशत बकरी का योगदान है।