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Karnal News: अब किरायेदारों को महंगी पड़ेंगी नगर निगम की दुकानें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Dec 2023 02:05 AM IST
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Now Municipal Corporation shops will become expensive for tenants
- पॉलिसी के तहत होगा मूल्यांकन, कलेक्टर रेट पर आधारित बने फार्मूले अनुसार निगम वसूलेगा किराया
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- 20 साल पुराने दुकानदार स्वामित्व योजना के तहत बन सकते हैं मालिक, 31 दिसंबर तक करें आवेदन



माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। शहर के अलग-अलग स्थानों पर जिन लोगों ने नगर निगम की दुकानें किराये पर ली हैं, उन्हें भविष्य में निगम को महंगा किराया चुकाना पड़ेगा। इसके लिए नगर निगम की ओर से योजना बनाई जा रही है। इसके लिए नई पॉलिसी के तहत मूल्यांकन होगा। इसके बाद कलेक्टर रेट पर आधारित बने फार्मूले अनुसार निगम किराया वसूलेगा। केवल वही दुकानदार इस महंगे किराये से राहत पा सकते हैं, जिन्हें स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक मिलेगा।

मुख्यमंत्री शहरी स्थानीय निकाय स्वामित्व योजना का नगर निगम के किराया दुकानदार लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से नवंबर माह में सेल ऑफ शॉप पोर्टल खोला गया था, जोकि 31 दिसंबर को बंद होगा। ऐसे में 20 साल पुराने जो भी दुकानदार हैं, वे इस पोर्टल पर दुकान का मालिक बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, सेल ऑफ शॉप पोर्टल पर नगर निगम करनाल की 556 दुकानें पंजीकृत हैं, इनमें से 290 दुकानों के किराएदारों ने मालिकाना हक लेने के लिए आवेदन किया था।
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कुल दुकानों में से 161 दुकानें शामलात कस्बा भूमि पर हैं, जिन पर सिविल कोर्ट ने स्टे लगाया है। 64 दुकानें अन्य विभागों की भूमि पर बनी हैं, ऐसे केस संबंधित विभाग को आगामी कार्यवाही के लिए भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त 33 दुकानों की रजिस्ट्री करवाई जा चुकी है। दस्तावेजों की कमी के कारण 20 केस रद्द किए गए हैं और 10 केस प्रक्रियाधीन हैं। जिन दुकानों की रजिस्ट्री हुई, वे कर्ण पार्क स्थित बाइक मार्केट, पुरानी सब्जी मंडी, अर्जुन गेट व जुंडला गेट क्षेत्र और नगर सुधार मंडल की दुकानें हैं।
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तीन माह में करना होगा पूर्ण राशि का भुगतान

आवेदक या दुकानदार द्वारा कन्वेंस डीड की एनओसी के लिए, नियमानुसार दुकान की भूमि से संबंधित विकास शुल्क, जल सीवरेज उपयोग शुल्क और ठोस अवशेष शुल्क को ऑनलाइन नगर निगम कार्यालय में जमा करवाना होगा। डिमांड नोटिस प्राप्त होने उपरांत कुल राशि का 25 प्रतिशत भुगतान 15 दिनों के अंदर-अंदर जमा करवाने के बाद शेष राशि का पूर्ण भुगतान तीन माह के अंदर-अंदर करना होता है। कन्वेंस डीड में पंजीकरण, स्टांप ड्यूटी व अन्य खर्चे भी आवेदक द्वारा वहन किए जाएंगे।



मालिक बनने के लिए यह हैं निर्देश

योजना से संबंधित व नगर निगम कार्यालय द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। भविष्य में कार्यालय नगर निगम की ऑडिट ब्रांच या चंडीगढ़ मुख्यालय पर एजी ऑडिट द्वारा पोस्ट ऑडिट के दौरान यदि कोई शुल्क या अन्य देय राशि नियमानुसार संबंधित भूमि को लेकर बकाया निकलती है, तो उसे भी 15 दिनों के अंदर-अंदर भरने के लिए आवेदक बाध्य होंगे। इसे लेकर प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट का शपथ पत्र सत्यापित करवाकर नगर निगम कार्यालय में देना होगा।



ऐसे वसूला जाएगा किराया

जिन दुकानदारों ने अब तक आवेदन करने में रुचि नहीं दिखाई है, उन्हें भविष्य में किराए को लेकर दुकान महंगी पड़ेगी। ऐसी दुकानों का मौका-मुआयना किया जा रहा है। पॉलिसी के तहत उनके किराये का दोबारा मूल्यांकन होगा। पॉलिसी में फार्मूले के अनुसार जिस लोकेशन में दुकान है, वहां कलेक्टर रेट से एक साल का जितना किराया बनेगा, उसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की फिक्सड डिपोजिट पर वार्षिक ब्याज दर की तर्ज पर अतिरिक्त प्रभार जुड़ जाएगा। इस प्रकार एक वर्ष की जितनी राशि बनेगी, वह दुकानदार को चुकानी होगी। इस राशि को चाहे मासिक किराए के रूप में या एक साल की इकट्ठी भी चुका सकते हैं।




ऐसे किराया दुकानदार जो 31 दिसंबर 2020 तक 20 साल की अवधि पूरी कर चुके हैं, वे इस पॉलिसी का लाभ लेने के पात्र हैं। सबसे पहले योजना के सेल ऑफ शॉप्स पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। इसलिए किराया दुकानदारों को जल्द आवेदन करना होगा, ताकि वे इसका लाभ ले सकें।
- अभिषेक मीणा, आयुक्त, नगर निगम
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