फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   now dairy breed animals will be identified in just 30 days

Karnal: सात वर्ष में नहीं... अब सिर्फ 30 दिन में हो जाएगी दुधारू नस्ल के पशुओं की पहचान, नया मॉडल विकसित

Sat, 30 Aug 2025 06:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा देव शर्मा, अमर उजाला, करनाल
देव शर्मा, अमर उजाला, करनाल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 30 Aug 2025 06:53 AM IST
सार

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने जलवायु परिवर्तन की मध्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप जीनोमिक सलेक्शन मॉडल (सिंगल स्टेप जीनोमिक बीएलयूपी) विकसित किया है। इससे सात साल में पूरी होने वाली दुधारू सांड़ की पहचान सिर्फ एक माह में पूरी की जा सकेगी। 

विज्ञापन
now dairy breed animals will be identified in just 30 days
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के दौर में देसी नस्लें ही दूध का उत्पादन बनाए रखने में सक्षम हैं। इसके लिए राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने जलवायु परिवर्तन की मध्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप जीनोमिक सलेक्शन मॉडल (सिंगल स्टेप जीनोमिक बीएलयूपी) विकसित किया है। इससे सात साल में पूरी होने वाली दुधारू सांड़ की पहचान सिर्फ एक माह में पूरी की जा सकेगी। 

विज्ञापन


इस मॉडल से देश की सर्वाधिक दूध देने वाली देसी नस्ल शाहीवाल पर नस्ल सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि अब तक देश में फीनो टाइप पद्धति से दुधारू सांड़ का चयन होता था। इसमें पशु का रंगरूप, लंबाई, ऊंचाई, दूध की मात्रा, वंशावली देखी जाती थी। 
विज्ञापन


इसमें करीब सात साल का समय लग जाता था लेकिन कुछ समय से देश में जीनो टाइप सलेक्शन (जीन आधारित) चयन भी होने लगा है। वर्तमान में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग (डीएएचडी), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) व राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ने देसी नस्लों के सांड़ों का चयन डीबीएलयूपी तकनीक से शुरू किया है लेकिन एनडीआरआई की ओर से विकसित मॉडल इनसे अलग है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें भारतीय परिस्थितियों में जीनो टाइप, फीनो टाइप के साथ वंशावली को भी जोड़ा गया है, जो सिंगल स्टिक है। इससे सटीक जानकारी सिर्फ 30 दिनों में मिल जाएगी। इससे दूध उत्पादन क्षमता में वृद्धि, तीव्र आनुवंशिक सुधार और विशेष रूप से छोटे व मध्यम डेयरी किसानों के लिए आर्थिक लाभ सुनिश्चित होंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed