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आमजन के साथ ही वीआईपी भी हुए दवाओं के लिए मोहताज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 12:39 PM IST
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Not common VIP also helpless for medicines
जिले में बढ़ते ब्लैक फंगस के केसों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ा दी है। जिले में 12 लोगों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। खास बात यह है कि ज्यादातर मरीज कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर ठीक हुए थे। सात मरीज करनाल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जबकि पांच जिले के अलग-अलग निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सरकारी व्यवस्था में फंसी दवाइयों के कारण मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। आमजन तो क्या पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कमला वर्मा-92 को भी उपचार के लिए दवाओं का इंतजार करना पड़ रहा है।
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जिले में ब्लैक फंगस के जो भी मरीज मिले हैं। सभी कोरोना को मात दे चुके हैं। कुछ को शुगर, हाइपरटेंशन और अन्य गंभीर बीमारी देखने को मिली है। बहरहाल, जिले के निजी अस्पतालों में उपचाराधीन ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज सरकारी व्यवस्थाओं और दवाओं की डिमांड में फंसा हुआ है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कमला वर्मा को सरकार के हस्तक्षेप से अभी तक 15 इंजेक्शन मिल पाए हैं। उनके बेटे वरुण ने बताया कि अभी डिमांड के तहत भी इंजेक्शन पूरे नहीं दिए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि जो इंजेक्शन लगे हैं, उनसे उनकी मां को काफी आराम है, लेकिन यदि दवाई में इस प्रकार की लेटलतीफी रही तो स्थिति खराब भी हो सकती है।
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रेफर सेंटर बना जिला अस्पताल
-जिला अस्पताल में ब्लैक फंगस से निपटने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के पास कोई भी विशेषज्ञ नहीं है और न ही दवाई। निजी अस्पतालों में मरीज इलाज करा रहे हैं। गंभीर मरीजों को करनाल रेफर किया जा रहा है। हां, इंजेक्शन और दवाई की व्यवस्था कराने में स्वास्थ्य विभाग जिम्मेदारी निभा रहा है।
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बाजार में नहीं इंजेक्शन, तीमारदार परेशान
-ब्लैक फंगस में लगने वाले एंटीफंगल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन की किल्लत बनी हुई है। डिमांड के अनुसार मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं मेडिकल स्टोरों पर ब्लैक फंगस में प्रयोग होने वाले एम्फोटेरिसिन बी व अन्य दवाएं नहीं होने से तीमारदारों को सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
महंगा इंजेक्शन नहीं पहुंचाता किडनी को नुकसान
-जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. नितिन गुप्ता का कहना है कि ब्लैक फंगस में दो प्रकार के इंजेक्शन का प्रयोग होता है। लगभग 325 से 350 रुपये तक का लिपिड एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन नेफ्रोटॉक्टिक होता है। यह किडनी पर असर डालता है। वहीं दूसरा लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन जो लगभग छह हजार रुपये तक का आता है।

-ब्लैक फंगस को लेकर जैसे ही डिमांड आती है, तुरंत संबंधित अस्पताल में दवाई भिजवा दी जाती है, जो सिस्टम बनाया गया है। उसके अनुसार ही दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। चाहे कोई भी हो इलाज सभी को समान दिया जा रहा है। -डॉ. विजय दहिया, सिविल सर्जन
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