Haryana: ग्रामीण कॉलेजों में नहीं रुझान; 51.5 फीसदी सीटें खाली, सरकार ने 20 किलोमीटर के दायर में खोले थे कॉलेज
हरियाणा में कई कॉलेजों का संचालन स्कूल या मंदिर के भवन में हो रहा है। इसलिए भी विद्यार्थी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां दाखिला लेना पसंद नहीं कर रहे। प्राचार्य का कार्यभार भी दूसरे कॉलेज के प्राचार्य के पास है। ऐसे में कम विद्यार्थी होने के कारण इन संस्थानों और यहां चल रहे कोर्सों का भविष्य संकट में है।
विस्तार
प्रदेश सरकार ने हर 20 किलोमीटर के दायरे में कॉलेज तो खोल दिया है, लेकिन इनमें पढ़ने के लिए विद्यार्थियों का रुझान कम हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के काॅलेजों की स्थिति ज्यादा खराब है, यहां 51.5 फीसदी सीटें रिक्त हैं। जबकि करनाल शहर के दोनों प्रमुख राजकीय कॉलेजों में महज 10.5 प्रतिशत सीटें ही शेष हैं।
घरौंडा कॉलेज की 78 प्रतिशत सीटें रिक्त
यह स्थिति तब है जब दो चरणों की दाखिला प्रक्रिया और 15 दिन लगातार ओपन काउंसिलिंग चली। इसके बावजूद संस्थानों की सीटें नहीं भर पाईं। जबकि सीटों से तीन गुना विद्यार्थियों ने 12वीं की परीक्षा पास की थी मगर इन संस्थानों में पढ़ना विद्यार्थियों ने पसंद नहीं किया। ग्रामीण महाविद्यालयों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति घरौंडा कॉलेज की है, यहां 78 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं। इसके बाद निगदू और पाढ़ा के महाविद्यालय में 71 और तरावड़ी व बस्तली कॉलेज में 66 प्रतिशत सीट पर कोई दाखिला लेने नहीं पहुंचा।
कोर्सों का भविष्य संकट में
ग्रामीण कॉलेजों में दाखिले कम होने के पीछे बड़ी वजह प्राध्यापकों की कमी भी है। यहां शहर के कॉलेजों से प्राध्यापक प्रतिनियुक्ति पर पढ़ाने जाते हैं। वहीं कई कॉलेजों का संचालन स्कूल या मंदिर के भवन में हो रहा है। इसलिए भी विद्यार्थी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां दाखिला लेना पसंद नहीं कर रहे। प्राचार्य का कार्यभार भी दूसरे कॉलेज के प्राचार्य के पास है। ऐसे में कम विद्यार्थी होने के कारण इन संस्थानों और यहां चल रहे कोर्सों का भविष्य संकट में है। यदि ऐसी ही स्थिति आगामी वर्षों में भी रही तो इन्हें मजबूरन बंद करना पड़ेगा।
- 11 राजकीय महाविद्यालयों की 5785 सीटों में से 68 प्रतिशत यानी 3919 भरी
- 02 शहरी महाविद्यालयों की 2710 सीटों में से 89.5 प्रतिशत यानी 2426 भरी
- 09 ग्रामीण महाविद्यालयों की 3075 सीटों में से 48.5 प्रतिशत यानी 1493 भरी
असंध कॉलेज की सर्वाधिक 94 फीसदी सीटें भरी
सह शिक्षा (को-एजूकेशन) संस्थानों में सर्वाधिक 94 प्रतिशत दाखिले असंध के महाविद्यालय में हुए। यहां बीए और बीकॉम कोर्स चल रहा है। बीए की सभी 240 सीटें भरी जबकि बीकॉम की 80 में से 18 सीट रिक्त हैं। दूसरे नंबर पर पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय है, यहां की 90 प्रतिशत सीटें भर गई हैं। 1750 में से 172 सीटें रिक्त हैं। कन्या महाविद्यालयों की श्रेणी में राजकीय महिला महाविद्यालय करनाल पहले और जिले में तीसरे नंबर पर है, यहां की 12 प्रतिशत सीटें ही रिक्त हैं। 960 में से 848 पर दाखिला हो चुका है।
बीएससी और बीकॉम में पांच से आठ दाखिले
इस वर्ष बीए का रुझान सबसे से ज्यादा रहा है। बीए की सीटें सबसे पहले भरी हैं। जबकि बीएससी और बीकॉम का रुझान इस बार सबसे कम है। निगदू में बीकॉम की 80 में से 15, तरावड़ी में बीएससी की 60 में से 05, बस्तली में बीकॉम की 80 में से 05, पाढ़ा में बीकॉम की 80 में से 08 और घरौंडा में बीए की 300 में से 87 व बीकॉम की 160 में से 22 सीटें ही भरी हैं। इसी तरह शहर के महाविद्यालयों में भी बीएससी या प्रोफेशनल कोर्स की सीटें ही रिक्त हैं।
किस राजकीय कॉलेज में सीटों की क्या है स्थिति
कॉलेज कुल भरी रिक्त (%)
जीसी घरौंडा 520 117 403 (78)
जीसी निगदू 240 69 171 (71)
जीसीजी पाढ़ा 240 68 172 (71)
जीसीजी तरावड़ी 320 108 212 (66)
जीसीजी बस्तली 240 81 159 (66)
जीसी दादुपुर रोड़ान 260 92 168 (65)
जीसीडब्ल्यू बसताड़ा 260 163 097 (37)
जीसी इंद्री 675 493 182 (27)
जीसीडब्ल्यू करनाल 960 848 112 (12)
जीसी करनाल 1750 1578 172 (10)
जीसी असंध 320 302 18 (06)
कुल 5785 3919 1866 (32)
अधिकारी के अनुसार
ग्रामीण महाविद्यालयों की काफी सीटें रिक्त हैं। इन पर दाखिला देने के लिए निदेशालय से एक बार और पोर्टल खोलने की मांग की है। इसके लिए पत्र भी लिखा गया है। असंध कॉलेज में सबसे ज्यादा दाखिले हुए हैं। - डॉ. विकास अत्री, प्रिंसिपल, राजकीय महाविद्यालय इंद्री और असंध।