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पांच माह से स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं, सिजेरियन डिलीवरी ठप
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले पांच माह से स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में स्टाफ नर्सें ही एमबीबीएस डॉक्टर के साथ मिलकर सिर्फ नार्मल डिलीवरी करा रही हैं। वहीं हाई रिस्क व अन्य सभी सीजेरियन डिलीवरी होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के लेबर रूम में रेफर किया जा रहा है। पिछले माह नागरिक अस्पताल में कुल 166 डिलीवरी हुई, इसके अलावा 43 गर्भवतियों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां रोजाना डिलीवरी के लिए करीब सात से आठ केस आते हैं जिनमें से दो या तीन केस सिजेरियन होने के कारण रेफर किए जाते हैं। जिससे ये भटकने को मजबूर हो जाते हैं।
एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी
नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के रूटीन के चेकअप के लिए भी पांच एमबीबीएस डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र दो ही हैं। जो सुबह और रात की शिफ्ट कर रही हैं। ऐसे में अस्पताल के डिलीवरी वार्ड पर काम का बोझ अधिक है। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार पांच महीने पहले अस्पताल के पास मौजूद एक एमडी डॉ. अंजू गर्ग इंद्री चली गईं। जिसके बाद से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। डॉक्टरों की कमी के कारण रूटीन चेकअप की व्यवस्था बिगड़ रही है।
डॉक्टर के बजाय मिली स्टाफ नर्सें
पिछले माह जिला नागरिक अस्पताल में 47 स्टाफ नर्सों ने ज्वाइन किया। अस्पताल के डिलीवरी वार्ड को सबसे ज्यादा जरूरत स्त्री रोग विशेषज्ञ की एमडी की है, लेकिन वार्ड में स्टाफ नर्स 10 से बढ़कर 15 हो गईं। अब बिना एमडी के ये स्टाफ नर्सें सीजेरियन डिलीवरी नहीं कर सकतीं हैं। ऐसे में रोजाना दो से तीन केस अस्पताल से रेफर हो रही हैं। साथ ही अन्य केस वो भी हैं, जो बिना स्लिप लिए सीधे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में जाती हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कई बार स्त्री रोग विशेषज्ञ के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन मिलता है। ऐसे में अगर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज न हो तो सभी सिजेरियन डिलीवरी अन्य जिलों या प्राइवेट अस्पतालों में होती।
डॉ. पीयूष शर्मा, प्रधान मेडिकल ऑफिसर, जिला नागरिक अस्पताल
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करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले पांच माह से स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में स्टाफ नर्सें ही एमबीबीएस डॉक्टर के साथ मिलकर सिर्फ नार्मल डिलीवरी करा रही हैं। वहीं हाई रिस्क व अन्य सभी सीजेरियन डिलीवरी होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के लेबर रूम में रेफर किया जा रहा है। पिछले माह नागरिक अस्पताल में कुल 166 डिलीवरी हुई, इसके अलावा 43 गर्भवतियों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां रोजाना डिलीवरी के लिए करीब सात से आठ केस आते हैं जिनमें से दो या तीन केस सिजेरियन होने के कारण रेफर किए जाते हैं। जिससे ये भटकने को मजबूर हो जाते हैं।
एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी
नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के रूटीन के चेकअप के लिए भी पांच एमबीबीएस डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र दो ही हैं। जो सुबह और रात की शिफ्ट कर रही हैं। ऐसे में अस्पताल के डिलीवरी वार्ड पर काम का बोझ अधिक है। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार पांच महीने पहले अस्पताल के पास मौजूद एक एमडी डॉ. अंजू गर्ग इंद्री चली गईं। जिसके बाद से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। डॉक्टरों की कमी के कारण रूटीन चेकअप की व्यवस्था बिगड़ रही है।
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डॉक्टर के बजाय मिली स्टाफ नर्सें
पिछले माह जिला नागरिक अस्पताल में 47 स्टाफ नर्सों ने ज्वाइन किया। अस्पताल के डिलीवरी वार्ड को सबसे ज्यादा जरूरत स्त्री रोग विशेषज्ञ की एमडी की है, लेकिन वार्ड में स्टाफ नर्स 10 से बढ़कर 15 हो गईं। अब बिना एमडी के ये स्टाफ नर्सें सीजेरियन डिलीवरी नहीं कर सकतीं हैं। ऐसे में रोजाना दो से तीन केस अस्पताल से रेफर हो रही हैं। साथ ही अन्य केस वो भी हैं, जो बिना स्लिप लिए सीधे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में जाती हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कई बार स्त्री रोग विशेषज्ञ के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन मिलता है। ऐसे में अगर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज न हो तो सभी सिजेरियन डिलीवरी अन्य जिलों या प्राइवेट अस्पतालों में होती।
डॉ. पीयूष शर्मा, प्रधान मेडिकल ऑफिसर, जिला नागरिक अस्पताल