फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   no doctor, infloe crode, karnal

अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज, घट रहे डॉक्टर

Thu, 06 Apr 2017 11:58 PM IST
Updated Thu, 06 Apr 2017 11:58 PM IST
विज्ञापन
no doctor, infloe crode, karnal
hospital - फोटो : bureau
सीएम सिटी करनाल में मरीज बढ़ते जा रहे हैं, जबकि अस्पतालों में डॉक्टर कम हो रहे हैं। हालांकि, इस साल जिले को मेडिकल कॉलेज के रूप में बहुत बड़ी सौगात मिली है, लेकिन यहां भी अभी डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। इसके अलावा, उपकरण और मशीनरी भी यहां पर नहीं आ पाये हैं, जिस कारण लोगों को इलाज के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ जाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में डॉक्टरों के आधे के करीब पद खाली पड़े हैं। इसी प्रकार मेडिकल कॉलेज में करीब 50 डॉक्टरों की और जरूतत है। वहीं, जिले की बात करें यहां की जनसंख्या 15 लाख है, जबकि डाक्टरों की संख्या 91 पद स्वीकृत हैं, जबकि 49 डॉक्टर ही तैनात हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज में सामान्य अस्पताल के डॉक्टरों को मिलाकर भी 66 डॉक्टर तैनात हैं। दूसरी ओर सीएचसी से लेकर सामान्य अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मरीजों की ओपीडी साल दर साल बढ़ रही है। फिलहाल करनाल मेडिकल कॉलेज की ओपीडी 1500 के करीब है। जिले में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के अलावा सामान्य जिला अस्पताल, 7 सीएचसी और 19 पीएचसी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन सभी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब पांच हजार मरीज अपनी जांच कराने पहुंचते हैं। इनमें से करीब पांच सौ मरीज गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। इन अस्पतालों में आने वाले ज्यादातर मरीज सस्ते इलाज के लिए यहां आ तो जाते हैं, लेकिन सही स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने के कारण उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। जिले में यह स्थिति आज से नहीं बल्कि कई सालों से है। हालांकि, चार साल पहले यहां पर डॉक्टरों की संख्या 100 के करीब थी, लेकिन धीरे-धीरे डॉक्टरों की संख्या कम होती गई। वहीं, मेडिकल कॉलेज शुरू होने के चलते सामान्य अस्पताल के डॉक्टरों को कॉलेज में डेपुटेशन पर ले लिया गया। आज भी सामान्य अस्पताल और मेडिकल कालेज के डॉक्टरों को संशय बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस समय सामान्य अस्पतालों में मात्र 49 डॉक्टर हैं, जबकि चार पहले इनकी संख्या दो गुना थी। वहीं, पहले अस्पताल की ओपीडी एक हजार थी, जो अब बढ़कर 1500 से 2000 तक पहुंच गई है। काफी संख्या में डाक्टर सेवानिवृत्त हो गए, तो कुछ डॉक्टरों ने अपने तबादले करनाल से दूसरे जिलों में करा लिये। अब हालात यह है कि ओपीडी में नंबर के लिए यहां पर लंबी लंबी लाइनें लगती हैं और डाक्टर मरीज को मुश्किल से एक मिनट में ही चेक कर पाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। 
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग में सैकड़ों पद खाली 
जिले के सामान्य अस्पताल के साथ सभी सीएचसी और पीएचसी में मरीजों की देखभाल के लिए डॉक्टर, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर, नर्सिंग सिस्टर व स्टाफ नर्स की 223 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस समय 140 पदों पर ही स्वास्थ्य कर्मी नियुक्त हैं। सबसे ज्यादा कमी डॉक्टरों की है। जिले में डॉक्टरों की 91 पोस्ट हैं, लेकिन इस समय 49 डॉक्टर ही यहां कार्य कर रहे हैं। इसी तरह स्टाफ नर्स की 74 पद है, लेकिन कार्य कर रही हैं सिर्फ 51 नर्स, नर्सिंग सिस्टर के 9 पद में से सिर्फ 7 पर तैनाती। फार्मासिस्ट के 42 पदों में से सिर्फ 29 पदों पर फार्मासिस्ट की नियुक्ति है। जिले में रेडियोग्राफर के 7 पर हैं, लेकिन नियुक्ति सिर्फ 4 पर ही है।
विज्ञापन


मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रहीं सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज का भवन भले ही बनकर तैयार खड़ा हो गया है और यहां पर ओपीडी के साथ ट्रामा सेंटर शुरू हो गया। लेकिन यहां पर आज भी मरीजों को सामान्य अस्पताल जैसी सुविधाएं ही मिल रही हैं। मेडिकल कॉलेज में आने वाले हादसे के शिकार व गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को रोहतक व चंडीगढ़ पीजीआई ही भेजा जाता है। नए भवन में मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद से यहां पर हर सप्ताह हादसे में गंभीर रूप से घायल दो से तीन लोग पहुंचते हैं, उनको प्राथमिक उपचार देने के बाद चडीगढ़ पीजीआई भेज दिया जाता है। मेडिकल प्रशासन का कहना है कि अभी यहां पर सभी मशीनें नहीं पहुंच पाई हैं, जिसके कारण ही मजबूरी में उन्हें भेजना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्टाफ की कमी से जूझ रहा तरावड़ी का सीएचसी
तरावड़ी। एक तरफ जहां सरकार प्रदेश के अस्पतालों की व्यवस्था को सुधारने का दम भर रही हैं। वहीं तरावड़ी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां पर शुरू से ही 14 पद खाली पड़े हैं। वहीं अस्पताल की लैब भी एक चिकित्सक के सहारे की चल रही है। तरावड़ी के अस्पताल में रोजाना 300 से 350 के करीब मरीज पहुंचते हैं। स्टाफ की कमी होने के कारण यहां पर मरीजों को घंटों लाईनों में लगने पर मजबूर होना पड़ता है। इस स्वास्थ्य केंद्र को लंबे समय के बाद एक्स-रे मशीन की सुविधा मिली थी। लेकिन मशीन पर किसी चिकित्सक की ड्यूटी नहीं है। जिसके कारण यहां पर सिर्फ बुधवार और शनिवार को ही एक्स-रे हो पाता हैं। स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. कृष्णकांत ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। कई बार लिखा जा चुका है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसबार समस्याओं के निदान के लिए 26 लाख का बजट पास होने की उम्मीद है।


इंद्री में चार पद खाली 
इंद्री। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इंद्री बदहाल अवस्था में पहुंच गया है। यहां पर न तो डॉक्टर हैं और न ही साफ-सफाई। स्टाफ की कमी के कारण यहां पर मरीजों की संख्या भी घट रही है। यहां पर आठ पद स्वीकृत हैं, लेकिन डाक्टर मात्र चार ही हैं। हालांकि, इस अस्पताल को सामान्य अस्पताल का दर्जा मिल गया है। जब इस बारे में एसएमओ डॉ. दीपक से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी यहां निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण यह अव्यवस्था है, जिसे जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। उधर, घरौैंडा, असंध, नीलोखेड़ी के अस्पतालों के भी हालात इसी प्रकार के हैं और सभी जगहों पर डॉक्टरों की कमी बनी हुई है।



स्टाफ की कमी से अभी जरूर परेशानी हो रही है, लेकिन जल्द ही यह खत्म हो जाएगी। क्योंकि की स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्टाफ की कमी पर रिपोर्ट मांगी गई थी, नई नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है एक-दो माह में नए स्टॉप की नियुक्ति हो जाएगी। इसके बाद लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
- डॉ. संत लाल वर्मा, सिविल सर्जन, करनाल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed