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शिक्षक पूरे न शिक्षण संस्थान, विद्यार्थियों का हो रहा नुकसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 02:27 AM IST
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no complete teachers nor education center, student facing problem
गगन तलवार
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करनाल। समय के साथ आबादी बढ़ी तो शहरों का दायरा भी बढ़ा। लेकिन सुविधाएं आज भी पर्याप्त नहीं हैं। बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ें और बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए जरूरी कदम भी उठाए गए, लेकिन हालात अब भी नहीं सुधरे हैं। जिले में जरूरत के हिसाब से न शिक्षण संस्थान हैं न शिक्षक। विभागों की लापरवाही के कारण नुकसान केवल विद्यार्थियों का ही हो रहा है। कई विद्यार्थी तो शिक्षण संस्थान तक नहीं पहुंच पाते और जो पहुंच पाते हैं, वो वहां की अव्यवस्थाओं के कारण पढ़ाई ही नहीं कर पाते।
जिले में सरकार ने 6 नए कन्या कॉलेज शुरू किए हैं। लेकिन कई साल से इनके भवन ही तैयार नहीं हो पाए। ऐसे में छात्राएं नजदीकी मंदिर, स्कूल और आईटीआई परिसर में कॉलेज की कक्षाएं लगाने को मजबूर हैं। हालात ये हैं कि भवनों के निर्माण कार्य पूरे करने की समय सीमा भी निकल चुकी है। कॉलेजों का नया सत्र भी शुरू हो गया है, लेकिन दावों को अधिकारी पूरा नहीं कर पाए।
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जिले के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी सहित अन्य विषयों की पढ़ाई भी नियमित नहीं कर पाते, क्योंकि 175 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में लेक्चरर के एक तिहाई पद खाली हैं। जिले में लेक्चरार के 2124 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 1355 पर नियमित और 84 पर गेस्ट लेक्चरर सेवाएं दे रहे हैं। 686 पद रिक्त हैं, जिन स्कूलों में ये पद खाली हैं, वहां के विद्यार्थियों को पढ़ाई में ज्यादा परेशानी होती है। इसके अलावा कुल 779 राजकीय स्कूलों में से कई स्कूलों में प्रिंसिपल के पद भी खाली हैं। सभी कॉलेजों और राजकीय स्कूलों में करीब दो लाख विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं।
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मूनक खंड में कॉलेज ही नहीं, 17 गांवों के युवा उच्च शिक्षा से वंचित
सरकार ने मूनक को खंड का दर्जा तो दिया, लेकिन खंड बनने के बाद भी यहां के 17 गांवों के युवाओं को उच्च शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है, क्योंकि खंड में कॉलेज ही नहीं हैं। खंड मूनक करनाल शहर, असंध, घरौंडा और पानीपत के बीच बसा है। चारों दिशाओं में ये अलग-अलग खंड हैं। मूनक से करनाल की दूरी 23, असंध की 23 और पानीपत की 23 किलोमीटर है, जबकि घरौंडा खंड करीब 20 किलोमीटर दूर पड़ता है। ऐसे में जो विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं, उन्हें लंबा सफर तय करना पड़ता है। अभिभावक बेटियों को दूर जाने की इजाजत नहीं देते, इसलिए बेटियां को सबसे ज्यादा कॉलेज न होने का नुकसान है।
इन मुख्य विषयों के लेक्चरर के पद खाली
विषय स्वीकृत रिक्त
गणित 277 92
कंप्यूटर साइंस 100 85
अंग्रेजी 311 80
संस्कृत 163 77
हिंदी 241 44
शारीरिक शिक्षा 41 37
भौतिकी 97 35
पंजाबी 73 21
गृह विज्ञान 28 18
संगीत 12 04
कॉलेजों की स्थिति : किसी का 30 तो किसी का 90 प्रतिशत कार्य लंबित
- बसताड़ा : 17.92 करोड़ रुपये से भवन बन रहा है। अब तक एक मंजिल भी तैयार नहीं हुई। दिसंबर 2021 तक काम पूरा होना है। आईटीआई में कॉलेज की कक्षाएं लग रही हैं।
- जुंडला : 90 प्रतिशत काम पूरा है। 17.11 करोड़ का प्रोजेक्ट है, जुलाई 2021 में कार्य पूरा होना था। कक्षाएं स्कूल के भवन में चल रही हैं। फिनिशिंग का कार्य अटका है।
- जयसिंहपुरा : असंध उपमंडल के गांव जयसिंहपुरा में 19.77 करोड़ की लागत से भवन बन रहा है। लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। जुलाई 2021 में काम पूरा होना था। आईटीआई परिसर में कक्षाएं लगी हैं।
- तरावड़ी : 12 करोड़ से भवन बन रहा है। काफी काम लंबित है। नवंबर 2021 में कार्य पूरा होना था। कक्षाएं नीलोखेड़ी के एक मंदिर में बने स्कूल की लैब में लग रही हैं।
- बस्तली : 10 प्रतिशत काम भी हुआ। 11.77 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। काम बंद है। कक्षाएं राजकीय स्कूल के भवन में लग रही हैं। मार्च 2022 तक कार्य पूरा करना है।
- पाढ़ा : 17.65 करोड़ से बनने वाले भवन का कार्य धीमी गति से चल रहा है। 30 प्रतिशत कार्य अटका है। कॉलेज की कक्षाएं साथ लगते गुरुकुल में चल रही हैं। जून 2022 तक काम पूरा होना है।
अधिकारियों को कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अब समीक्षा बैठक की जा रही है। इसी सत्र में जुंडला, पाढ़ा और जयसिंहपुरा कॉलेज नए भवन में शुरू हो जाएंगे।

- निशांत कुमार यादव, उपायुक्त करनाल
ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से विभाग को रिक्त पदों की जानकारी होती है। जहां शिक्षक की कमी हो वहां सामंजस्य बैठाया जाता है। वहीं, उसके बारे में विभाग को पत्र लिखकर सूचित भी कर दिया जाता है।
- राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
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