{"_id":"6776faa25031ecf0b7009a50","slug":"nitish-achieved-success-despite-losing-a-leg-in-a-train-accident-karnal-news-c-18-knl1008-551971-2025-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: ट्रेन हादसे में एक पैर गंवाने के बावजूद नितीश ने पाया मुकाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: ट्रेन हादसे में एक पैर गंवाने के बावजूद नितीश ने पाया मुकाम
विज्ञापन
- अर्जुन अवार्ड के लिए चयन होेने पर परिजनों में खुशी की लहर
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कर्ण स्टेडियम के वरिष्ठ बैडमिंटन कोच नितीश कुमार ने वर्ष 2009 में एक ट्रेन दुर्घटना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद बैडमिंटन खेल में नाम कमाया है। दिव्यांगता को शिकस्त देकर वह खेल विभाग में वरिष्ठ कोच बने हैं। आज वह विश्व के नंबर वन रैंकिंग खिलाड़ी बन चुके हैं। नितीश ने चीन में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीते हैं। वह बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में विश्व में नंबर वन व मिक्स डबल में तीसरे स्थान पर हैं। अब नितीश का अर्जुन अवार्ड के लिए चयन होने पर परिजनों में खुशी की लहर है।
करनाल निवासी नितीश ने बताया कि उनकी बचपन में खेलों में रुचि नहीं थी, वह पढ़ाई में अव्वल रहे। दुर्घटना से कुछ समय पहले उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। जब दुर्घटना हुई तब एक बार तो सब कुछ खत्म होता नजर आया मगर जब पैरा में बेहतर भविष्य देखा तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिकता में कांस्य पदक जीता फिर 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता। उनका कहना है कि लगातार अभ्यास से उन्होंने खुद को तराशा है। उन्होंने 2014 में आईआईटी मंडी से पढ़ाई की।
नितीश के पिता बिजेंद्र ने बताया कि नितीश की बचपन में खेलों में रुचि नहीं थी। जब हादसा हुआ उससे कुछ समय पहले ही उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। एक बार तो उन्हें लगा कि अब कॅरिअर खत्म हो गया है मगर बाद में उन्होंने हौसला बरकरार रखते हुए पैरा में भविष्य बनाने की ठान ली। पिता बिजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 में नितीश ने पहली बार नेशनल में कांस्य पदक जीता फिर 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीत दर्ज की।
विज्ञापन
नितीश की उपलब्धियां
- 2024 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
- 2022 में भी वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
- 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
- 2018 में एशियन गेम में कांस्य पदक जीता है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कर्ण स्टेडियम के वरिष्ठ बैडमिंटन कोच नितीश कुमार ने वर्ष 2009 में एक ट्रेन दुर्घटना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद बैडमिंटन खेल में नाम कमाया है। दिव्यांगता को शिकस्त देकर वह खेल विभाग में वरिष्ठ कोच बने हैं। आज वह विश्व के नंबर वन रैंकिंग खिलाड़ी बन चुके हैं। नितीश ने चीन में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीते हैं। वह बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में विश्व में नंबर वन व मिक्स डबल में तीसरे स्थान पर हैं। अब नितीश का अर्जुन अवार्ड के लिए चयन होने पर परिजनों में खुशी की लहर है।
करनाल निवासी नितीश ने बताया कि उनकी बचपन में खेलों में रुचि नहीं थी, वह पढ़ाई में अव्वल रहे। दुर्घटना से कुछ समय पहले उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। जब दुर्घटना हुई तब एक बार तो सब कुछ खत्म होता नजर आया मगर जब पैरा में बेहतर भविष्य देखा तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिकता में कांस्य पदक जीता फिर 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता। उनका कहना है कि लगातार अभ्यास से उन्होंने खुद को तराशा है। उन्होंने 2014 में आईआईटी मंडी से पढ़ाई की।
विज्ञापन
नितीश के पिता बिजेंद्र ने बताया कि नितीश की बचपन में खेलों में रुचि नहीं थी। जब हादसा हुआ उससे कुछ समय पहले ही उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। एक बार तो उन्हें लगा कि अब कॅरिअर खत्म हो गया है मगर बाद में उन्होंने हौसला बरकरार रखते हुए पैरा में भविष्य बनाने की ठान ली। पिता बिजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 में नितीश ने पहली बार नेशनल में कांस्य पदक जीता फिर 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीत दर्ज की।
विज्ञापन
नितीश की उपलब्धियां
- 2024 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
- 2022 में भी वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
- 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
- 2018 में एशियन गेम में कांस्य पदक जीता है।